Thursday, October 22, 2009

पत्रकारिता कैसे की जाय....

अखिलेश अखिल

कोलकत्ता की महिला पत्रकार के साथ रेल मंत्री ममता बनर्जी और उसके पार्टी समर्थकों द्बारा की गयी असंसदीय व्यवहार से आहात और लोकतंत्र में पत्रकार और पत्रकारिता को बचाने के लिए वरिष्ट पत्रकार पुन्य प्रसून बाजपाई की चिंता -''की कैसे की जाय पत्रकारिता '' आज के इस माहौल में सोचने के लिए बाध्य करती है। पुण्य जी जमीनी पत्रकार है और जमीनी पत्रकारिता के पक्षधर भी। आज की पत्रकारिता कर रहे बहुत ही कम लोग है जो पत्रकारिता की कम हो रही विस्वसनीयता , पत्रकारों के गिरते आचरण , उनके ईमान और पत्रकारीय संस्कार को लेकर चिंतित है। पुण्य जी की चिंता जायज है । एक पत्रकार के भीतर ख़बरों को लेकर जो अकुलाहट होती है , उसी को आधार मान कर और इमानदार काम कर रहे पत्रकारों और पत्रकारिता की हिफाजत के लिए अपनी बात रखने की उन्होंने कोशिस की। यह उनका फर्ज भी है और बड़प्पन भी। लेकिन उधर आलोक नंदन ने जो सवाल उठाया है वह सच्चाई के बिल्कुल ही करीब है। आलोक नंदन जी बार बार कह रहे है की '' आख़िर पत्रकारिता है क्या?'' इस सवाल का जवाब पुण्य जी समेत उन सभी भाइयो को देना चाहिए जो पत्रकारिता में दुबकी लगाकर गंगा स्नान करने की दुहाई दे रहे है। आगे बढे इसके पहले एक जानकारी देना चाहूँगा की ये आलोक नंदन कौन है। आलोक जी पिछले एक दशक से गंभीर पत्रकारिता कर रहे है और इन दिनों दलाली की पत्रकारिता से उब कर मुंबई में फ़िल्म लेखन बखूबी कर रहे है। अगर नौकरी में बने रहना ही पत्रकारिता है , तो आलोक जी इसमे असफल माने जा सकते है और उन्हें इसका कोई गम भी नही है। वे अपना काम बखूबी कर रहे है।
अब आलोक जी का वही सवाल फ़िर यहाँ रखना चाहूँगा की पत्रकारिता क्या है ? और पत्रकार कौन है? पत्रकारिता का पहला उद्देश्य है सत्य को उद्घाटित करना। और पत्रकार का पहला धर्म है ईमान का वरन करना। ये दोनों बातें वैसे तो पुरे समाज पर लागू होत है , लेकिन लोकतंत्र के रखवालो प्रेस से इसकी ज्यादा अपेक्षा की जाती है। क्या पुण्य जी बताएँगे की इसका पालन हम कर रहे है। और यदि इसका पालन मीडिया में हो भी रहा है तो कितने पत्रकारों द्बारा। मानवीय जीवन के साथ ही पत्रकारीय जीवन में सुचिता की बात भी आती है। निरपेक्षता की बात होती है , और बात होती है संस्कार की भी।
पुण्य जी आपने जिन पत्रकारों को एक होने की बात कही है , उसका एजेंडा तो पहले पता चले। हलाकि आप बहुत कुछ जानते है । और जानते हुए बहुत कुछ कहना बोलना नही चाहते। आप जिन पत्रकारों को पत्रकारिता पर दमन के खिलाफ आवाज़ उठाने की बात कह रहे है , कुछ बानगी आपको दे रहा हूँ। १९९१ के बाद और ख़ास कर नयी आर्थिक निति के बाद के इन दो दशको की पत्रकारिता और पत्रकारों पर हमारी नजर लगी है, और हम इसका बखूबी अध्यन कर रहे है । आप को बता दे की इन लगभग २० वर्षो में डेल्ही और अन्य प्रदेशो के कोई १०८ पत्रकार करोड़ों में खेल रहे है । इसमे किसिम किसिम के पत्रकार है। अपने एक साक्षात्कार में आपने ही कहा था देश में लखटकिया पत्रकारों की भीड़ जमा हो गयी है जिनका ख़बरों से कोई वास्ता नही है। क्या आप इन्ही पत्रकारों से गुहार लगा रहे है की पत्रकारों की एका बनी रहे। पुण्य भाई मामला केवल भ्रस्त तरीके से धन बनने तक ही सिमित नही है । विभिन्न अखवार और चैनलों में काम कर रहे कुछ विशिष्ट भैओं ने तो स्नातक की डिग्री भी नहीं ली है । जाली कागजात पर पत्रकारिता को कलंकित कार रहे है। चैनलों और अखबारों में काम कर रहे ११ लोग पत्रकारिता से पहले पासपोर्ट , राशन कार्ड , ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम करते थे । येही लोग कई जगहों पर पत्रकारिता पढा भी रहे है। पुण्य भाई क्या इन्ही लोगों को एकजूट होने को कह रहे है। आप बेचैन, तपिश, मिजाज , जैसे शब्दों का अक्सर इस्तेमाल करते है । ये शब्द हम पत्रकारों के लिए होनी चाहिय । ऐसे संपादकों को आप क्या कहेंगे जो रात दिन कामसूत्र का ताना बाना बुनते रहते है। चैनल के उस हेड को आप क्या कहेंगे जो पत्रकारों से हर माह चावल दाल से लेकर घर का सारा समान मनवाते है। पुण्य जी आप को मालुम है की पिछले कुछ वर्षों में मीडिया संस्थानों में गाली गलौज की एक नयी संस्कृति बनी है । और गुंडई का आलम ये है की आने वाले दिनों में कोई भी सरीफ आदमी अपनी बच्चो को पत्रकारिता में जाने नहीं इस्क्वाजी करने के नाम पर कई लोगों की नौकरी जा चुकी है। जहाँ तक मेरी जानकारी है दो दर्जन से ज्यादा महिला पत्रकार की नग्न फूटेज बाजार में तैर रही है। और ये सब सफल पत्रकार माने जाते है।
और जहाँ तक पत्रकारिता की बात है जैसा की आलोक जी ने पूछा है इस सम्बन्ध में मेरा आकलन है की जिस पूंजीवादी पत्रकारिता को हम गली देते नहीं थकते उसके मूल में वही दलाल पत्रकार है जो पत्रकारिता को वेश्या और अपने को दलाल की भूमिका में रखकर मालामाल हो रहे है। येही हाल जनवाद के नाम पर काम करने वाले कई भाइयों का है। बाकी आप ख़ुद बेहतर जानते है। इस हालत से कैसे निकला जाय इसकी बागडोर आप ले और हमें राह दिखाएँ।

13 comments:

  1. khub kahi sir ji aapne.....
    aaj kam hi aap jaise patrkar hai jo sacchi partkarita karte hai. aapse aage bhi yahi ummid karte rahenge

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  2. आप का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, हमने भी आज ही एक और नया चिटठा "चर्चा पान की दुकान पर" प्राम्भ किया है, चिट्ठे पर आपका स्वागत है.
    http://chrchapankidukanpar.blogspot.com

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  3. आपका लेख पड्कर अछ्छा लगा, हिन्दी ब्लागिंग में आपका हार्दिक स्वागत है, मेरे ब्लाग पर आपकी राय का स्वागत है, क्रपया आईये

    http://dilli6in.blogspot.com/

    मेरी शुभकामनाएं
    चारुल शुक्ल
    http://www.twitter.com/charulshukla

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  4. स्वागत है.शुभकामनायें.

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  5. आप हमेशा विस्फोटक रहे हैं। आपने पत्रकारिता में जब भी कुछ गलत देखा है, उस पर उचित प्रतिक्रिया दी है। आपसे हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिला है। उम्मीद है कि आप खासकर हम न्यूकमर पत्रकारों को यूं ही मार्गदशन करते रहेंगे। धन्यवाद। ब्लाग जगत में आपका तहेदिल से स्वागत।

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  6. patrakarita ke sudhikaran ki jaroorat aarse se mahsoos ki ja rahi hai. punyaprasoon ne patrakarita karne me dikkaton ki baat uthai hai jabki akhilesh akhil patrakarita me suchita bahaal karne ki muhim ke paksdhar hain. meri samajh se sankat baahri aur aantarik dono hain. sabhi sankat ka samadhan patrakar ke haath me nahi hai. lekin jo unke haath me hai uss disa me gambhirta se pahal ho. patrakarita kya hai iss par manthan baad me bhi ho sakta hai. pahle iss pese ko rojana jo jalalat jhelni par rahi hai uss par vichaar ho. pese ki viswasniyata ke bagair patrakarita ke badle dalali hi ho sakti.
    sanjay mishra

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  7. hamare gyanvardhan ke liye apako sadhuvaad.

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  8. blog par bhi post ke baad comment karne kee ek nai raajneeti aa gayi hai baavjood iske jab hum patrakaarita ko dalaal street kee tarah dekhne lage hai bloging ek achha avsar ban kar ubhra tha, ab lagta yah hai kee vanha hum apni patrakaarita trp ke aage jhukkar rakhte the yanha tippadi ke aadhaar par humaari baton me dum hoga.patrakaaro ke ekjut ho apne ko dalaal banaane se bachne ke liye kitnee baar aur kitnaa avaahan ho chuka hai lekin yanha bhee tippedi ke siva shaayaad kuch nahi khair aap likhte rahe pryaas kare kee media kee asmita humaare aapke paryaason se bach sake www.jungkalamki.blogspot.com

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  9. चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. मेरी शुभकामनाएं.
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    हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

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  10. हिंदी ब्लॉग परिवार में आपका स्वागत है!लिखते रहिये और पढ़ते रहिये....

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  11. Parnam sir.mera naam nitin hai.mujhe aapka lekh bahut acha laga.sir mai bhi patarkarita karna chahata hu.lekin mujhe samaj nahi aa raha hai kese karu.sir kya aap mujhe guide karge to mujhe apna lakshay pura karne me bahut sahayta milegi.mera e.mail add hai
    hindwan_18@indiatimes.com
    Thanks Sir

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  12. sir apka blog acha hai sir me bhi patrkar bana chata ho lekin mujhe samaz nahi araha me kya karo koi advice dena piz
    my email id anujjainkranti@gmail.com

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