Monday, January 25, 2010

मीडिया में यौनाचार.... भाग 1

अखिलेश अखिल
मीडिया में भ्रस्टाचार के साथ ही मीडिया में यौनाचार की परम्परा भी इन दिनों कुलाचे मार रही है। हालाकि मीडिया में यौनाचार की परम्परा काफी पुरानी है। पहले और आज में अंतर केवल इतना है की पहले इक्का दुक्का लोग गलत यौन संबंधो के लिए जाने जाते थे , लेकिन आज बहुतेरे मीडिया कर्मी सेक्सुअल संबंधो को अपना अधिकार और कर्त्तव्य मान बैठे है। देश में ऐसा न कोई राज्य बचा है और न ही कोई मीडिया संस्थान जहा सेक्सुअल संबंधो की कहानियाँ मौजूद नहीं है।ईमान की पत्रकारिता ख़त्म हो जाने के बाद नातिक हिन् पत्रकारिता का जो चेहरा हमारे सामने आया है , उसकी चर्चा करने में भी शर्म आती है। पटना में पिछले कुछ महीनो में रंद्दीवाज पत्रकारों की एक लम्बी सूचि तैयार हो गयी है। इसमें कुछ चैनलों के कलाकार है तो कुछ अखवारो के।इस खेल में महिला पुरुष पत्रकारों ने मिलकर ऐसी नंगई की है की पूरी पत्रकारिता पर ही कालिख पूतगयी है।किस चैनेल में किस कथित पत्रकार ने कैसी रासलीला की है और किस अख्वारी पत्रकार ने कितनी महिला पत्रकारों का शोषण किया है , इनके नाम जारी कर दिए जाए तो संभव है की ये लोग कही के नहीं रहेंगे। इनके घर भी टूटेंगे और इनका सामाजिक बहिस्कार भी होगा। लेकिन इशारों में ही इन रंद्दीवाजो के बारे में कुछ तस्वीर तो खिची ही जा सकती है। अभी कुछ महीने पहले की घटना है की एक चैनेल के दफ्तर में उस वक्त मार पीट शुरू हो गयी जब एक पत्रकार की रखैल महिला पत्रकार के साथ चैनेल प्रमुख बंद कमरे में मजा ले रहे थे।बंद कमरे में अपनी प्रेमिका के साथ अपने बॉस को देख कर रिपोर्टर ने अपनी आपा खो दी और बॉस को पीट दिया। बतादे की उस बॉस ने उस महिला पत्रकार को इन्तेर्न्शिप से सीधे स्टाफ बना दिया था। बाद में दोनों पत्रकार संसथान से बाहर कर दिए गए। आजकल दोनों एक दुसरे चैनेल में पटना में ही काम कर रहे है। देल्ली में बैठे बॉस आजकल पटना कम जा रहे है।
पटना में ही एक दुसरे चैनेल की दो महिला पत्रकार से एक एक ब्यूरो प्रमुख ने जामकरलुफ्त उठाया । मीडिया में बाते फ़ैल गयी और एक दिन पत्रकार महोदय पीट गए।चर्चा है की पत्रकार भाई ने दोनों को अपने यहाँ काम देने का वादा किया था। मामला पत्रकार भाइयो तक ही सिमित नहीं है। कई मामले तो ऐसे भी है जिनमे कई महिला पत्रकारों ने अपनी नौकरी के लिए या फिर आगे बढ़ने के लिए अपने साथी पत्रकार का भरपूर उपयोग किया।पटना में कमसेकम ६ ऐसी महिला पत्रकार है जिन्होंने अपने पीछे कई पत्रकारों की वर्जनाये तोर दी है। इनमे से दो महिला पत्रकार आजकल डेल्ही पहुच गयी है और एक अखवार का हिस्सा बन गयी है।
मुजफ्फरपुर में दो वरिस्ट पत्रकार वेश्या के कोठे पर पकरे गए और पुलिस से पीट गए । इनमे से एक रास्ट्रीय चैनेल में काम करते है। यही के एक पत्रकार ने गलत तरीके से इतना धन कमाया है की उसे रोज लड़की की जरूरत होती है। कहा जा रहा है की ये महोदय हर रोज नेताओं को भी माल पहुचाने का काम करते है।
पटना में एक अखवार के सम्पादक आये तो थे दरिद्र के रूप में , लेकिन आज ओह करोरो के मालिक है। हर शाम इन्हें शराब के साथ माल भी चाहिए होता है। इस महोदय ने अबतक दर्जनों महिला पत्रकारों को बर्बाद कहे या आबाद कर रखा है। इनकी रंदिवाजी की चर्चा पटना से लेकर बाहर तक है। पटना की कोई चार महिला पत्रकारों की शादी टूट चुकी है । इन पत्रकारों की सी दी बनी हुई है । आरा की एक महिला पत्रकार का सम्बन्ध एक नेता से है । और पटना मीडिया सर्किल में इस महिला के खौफ से कई बड़े पत्रकार भी डरते है। नेताओं के यौनाचार के बाद मीडिया में यौनाचार की कहानी समाज के लिए एक नयी जानकारी हो सकती है । हमारी नजर इस पर है । हम कई चीजो से आपको रूबरू करायेंगे। जारी है........

3 comments:

  1. पत्रकारिता के इस क्षेत्र को टच करना निसेंदेह साहस का काम है, यदि आप इस पर लगातार लिखते रहे तो सारे आलेख एक किताब की शक्ल मे आ जाएंगे...और फिर इन्हें भी पत्रकारिता के कोर्स में शामिल कर लिया जाएगा ताकि विभिन्न तरह के कुकुरमुत्ते वाले जर्नलिस्टिक संस्थान थोड़ा ग्लैमर के साथ इस क्षेत्र को भी पढाएंगे...और भावी पत्रकार लोग भी पत्रकारिता के इस खेल को शुरु से ही समझ सकेंगे....

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  2. anabarul haq ki bedroom leela ek channel me dikhae jaane ke baad jasn manane vaale bihar ke patrakaaron ko apani biradari kee kartoot se bhee vakif hona chahiye. pad kaa durupayog kar mahila sahakarmi se yaun sambandh kee mishale janata dekh sun rahi hai. patrakaaron ko accountable bananaa hee parega. ummid hai akhilesh delhi ki media houson me parvaan par chadhi is vikriti par bhee gaur farmaaenge.
    sanjay mishra

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