Tuesday, January 19, 2010

बदल रहा है बिहार ....

अखिलेश अखिल
बिहार बदल रहा है। ऐसा बिहारी नहीं बाहरी लोग बोल रहे है। नितीश सरकार अपना काम कर रही रही है और सिर्फ काम के नाम पर ही बिहार बदल रहा है। बिहार इज ए देवेलोपिंग स्टेट -ऐसा विकसित राज्यों के लोग, व्यापारी, उद्यमी, बुरोक्रेत और तेच्नोक्रेत कह रहे है। अभी हाल में केंद्र सरकार की एक विकास रिपोर्ट में बिहार की आर्थिक विकास की दर ११ फीसदी से ज्यादा बताई गयी है। कहते है की देश का सबसे ज्यादा विकसित राज्य गुजरात है और गुजरात के बाद बिहार दुसरे पदान पर आ गया है। यह बाकई चौकाने वाली खबर है। नितीश सरकार इसके लिए बधाई के पात्र है। बिहार के विकास की खबर जानकार बिहार के बाहर रहने वाले लोगों में भी उत्साह बढ़ा है और जिस पिछरेपन के कारण बिहार के लोगों को बिहार से बाहर बिहारी शब्दों से दो चार होने पड़ते थे अब ये शब्द धीरे धीरे कम सुनाई पड़ने लगे है।
बिहार की विकास गाथा को लेकर किसी के मन में कोई भ्रान्ति नहीं होनी चाहिए । बिहार की जो छबि बदल रही है इसके लिए नितीश सरकार की जीतनी तारीफ़ की जाए कम ही होगी। नितीश ने यह दिखा दिया है की संकल्प और इमानदारी के साथ कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर दिखाई पड़ती है। येही कारण है की लोग और उद्यमी चाह रहे है की अगली सरकार भी नितीश की अगुआई में ही बने ताकि बिहार की सम्पूर्ण तस्वीर बदल जाये और बिहार के लोगों को इसका लाभ मिले। लेकिन क्या बिहार में रहने वाले लोग भी नितीश के शासन से खुश है। क्या बिहार के लोगो की अपेक्षा पर नितीश सरकार कड़ी उतारी हैक्या बिहार के लोगो का कोई विकाश हो पाया है ? क्या बिहार के क्षेत्रीय असंतुलन में कोई कमी आयी है ? और सबसे बड़ी बात ये की रोजगार की तलाश में बाहर भाग रहे लोगों के लिए बिहार में रोजगार करने की संभावना विकसित हो पायी है ?
निश्चित तौर पर नितीश ने पहली बार बिहार की उपरी तस्वीर बदलने का काम किया है। विकाश का माहौल बनाने का काम किया है। और विकास की जो पहली प्राथमिकता अपराध में कमी, बेहतर क़ानून व्यवस्था,भ्तास्ताचारियो पर लगाम और बिजली सड़क की होत है , नितीश सरकार ने इस दिशा में बेहतर काम किया है। लेकिन ये ऐसी चीजे है जो जनता को साफ़ दिखाई नहीं पड़ती। अभी तक नितीश सरकार ने गरीबी और बेरोजगारी पर दीरेक्ट अत्तैकनहीं किया है। गरीबी और बेकारी राज्य की सबसे बड़ी समस्या है और जब तक इस समस्या से लोगों को निजात नहीं मिलता, तब तक बिहार की विकास गति अधूरी ही मानी जाएगी। इसके अलावा बिहार में सह्रिकरण की गति बहुत ही मंद है। गाँव और कस्बों को मुलभुत सुबिधाओं से जोरकर सह्रिकरण की गति तेज करने की जरूरत है। फिर अभी तक विकास की जो चीजें थोड़ी बहुत दिखाई पड़ती है , बड़े शहरों तक ही सिमित है। राज्य की अधिकतर शहरो का विकास न के बराबर हुआ है। इसी तरह एक शहरो से दुसरे शहरो के बिच नागरिक सुविधाओं में भी अंतर है। नितीश सरकार अभी तक इसे नहीं पात सके है। फिर रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर उद्योग की जरूरत होत है जो अभी तक संभव नहीं हो पाया है। संभव है अगली बार ऐसा ही कुछ हो सके। लेकिन बिहार की जो जातिगत राजनीति है , उसमे यह कहना मुस्किल है की अगली सरकार नितीश ही बना सकेंगे । लेकिन बिहार आगे बढेगा इसकी जमीं नितीश ने तैयार कर दी है।

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