Tuesday, February 2, 2010

मीडिया में यौनाचार ---4

अखिलेश अखिल
जिस ब्यक्ति,समाज और संस्थान में चरित्र और नैतिकता का अभाव होता है वह कभी भी आदरणीय नहीं हो सकता। थोड़े समय के लिय वहा सब कुछ खुशनुमा लगता दिखता है , लेकिन वह ज्यादा दिनों तक ठहर नहीं सकता। इस धारावाहिक के तीसरे भाग की प्रतिक्रया पर हमारे कोई साथी ने दो बाते कहने की कोशिश की है.एक उन्होंने क्षेत्र बाद का मामला उठाया है और दुसरा मेरी बेटी से सम्बंधित बाते कही है .इनका कहना है की भोपाल और रायपुर की मीडिया पाक साफ है और यहाँ कोई गन्दी बाते नहीं होत। ऐसा केवल बिहार में ही संभव है। जिस भड़ास पर अपनी प्रतिक्रया दे रहे थे उसी पर खबर आयी की भोपाल के दो पत्रकारों से एक महिला तंग आकर चैनेल वालो से रक्षा की गुहार लगाई है। इस सज्जन ने मेरी बेटी के बारे में लिखा की कहीमेरी बेटी भी इस धंधे का शिकार न हो जाये। नरेन्द्र जी अगर आप मीडिया में है तो दिमाग को साफ़ रखे। भोपाल की घटना से आपको आपके सवाल का जबाव मिल गया होगा। और जहा तक मेरी बेटी का सवाल है ,वह आज की मीडिया को अछि तरह से जानती है और आप जैसे लोगो को भी। उसे क्या करना है उसे पता है। और जहा तक मेरा सवाल है मई मेरे लिया पत्रकारिता कोई कैरियर नहीं है। जो लोग इसे कैरियर मान कर आये है वही लोग अपनी नौकरी बचाने के लिया हर तरह का खेल कर रहे है। मेरे लिया यह जनून है, मिसन है और सेल्फ एक्स्प्रेसन का माध्यम है। नौकरी से आना जाना लगा रहता है.कई बार संभव होता है की हम किसी की अपेक्षा पर खड़े नहीं उतरते और कई बार हम वह कर नहीं सकते जो सामने वाला चाहता है। खैर ,आपकी प्रतिक्रया के लिया बधाई।
आज हम आपका परिचय कराते है देश की राजधानी दिल्ली के मीडिया घरानों और उससे जुड़े कुछ ऐसे पत्रकारों से जो उदारीकरण के इस दौर में खुलेपन का भरपूर फैदा उठाया है या फिर आज भी फैदा उठा कर पत्रकारिता को कलंकित कर रहे है। सबसे पहले संगठित रूप से मीडिया में यौनाचार की कहानी हमें झंडेवालान इलाके में एक अखवार में देखने को मिली थी। अखवार के मालिक एक बड़े आदमी थे। १६ आदमी का स्टाफ था यहाँ। चार महिला पत्रकार भी थी। इन चारो को कही का नहीं छोड़ा गया। इस मालिक सम्पादक के साथ दो और पत्रकार शाम को आते और शराब के साथ जश्न मानते थे। वह मालिक तो एक बम कांड में मारा गया और हर शाम मजा लेने वाले दोनों पत्रकार आज यहाँ बड़े पत्रकार बने बैठे है। महरौली इलाके से निकलनेवाले एक अखवार की नक् चढ़ी महिला को बहुत लोग जानते होंगे। यह महिला मालिक के साथ न सिर्फ सोती थी वल्कि कई और महिलाओं को भी हाजिर करती थी। पश्चिम विहार इल्लाके में एक छोटे अखवार दे दफ्तर से ६ लड़किया पकरी गयी थी। १९९९ की घटना है। दिन में पत्रकारिता और रात में ब्लू फिल्म की कहानी यहाँ दोहराई जाती थी। पत्रिका के मालिक आजकल एक चानेल में वरिस्ट पत्रकार है। इसी दिल्ली में पोर्न पत्रकारिता करने वाले कम से कम १५ लोग आज कई अखवार निकाल रहे है । इनके यहाँ सिर्फ लड़किया ही काम करती है। ये लड़किया यहाँ क्या करती है नहीं कह सकता। लडकियों के रसिया एक पत्रकार महोदय एक बड़े अखवार में समय से पहले ४ लडकियों को प्रोनात्ति दिला चुके है। नॉएडा में एक अखवार के दो वरिस्ट पत्रकार लड़कियों के चक्कर में अपना घर तोड़ चुके है। सी पि इस्थित एक अखवार के सम्पादक की लड़किया कमजोरी है । दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अखवार में तिन लड़कियों ने एक कार्टेल बना कर तमाम तरह की सुविधाए लेती रही। अंग्रेजी अखवार की ये लड़किया अपने दम पर अबतक ७ लोगो की नौकरी ख़त्म कर चुकी है। इनमे से एक लड़की दक्षिण दिल्ली से आती है और अपने परिवार से अलग रहती है। दिल्ली के कई इलाको से निकलने वाले दर्जनों अखवारो और पत्रिकाओं में महिलाओं के शोषण की अनंत गाथा है। लक्ष्मी नगर में ही दो अखवार के मालिक सम्पादक पिटे जा चुके हैसेक्स के आरोप में । डेल्ही से ही निकलनेवाली एक पत्रिका के तिन वरिस्ट लोग सदा से ही कामुक रहे है। जब ये अखवार में थे तो वहा भी रास रचाते थे।
वरिस्ट पत्रकार खुशवंत सिंह कहते है की राजनीति में कई महिलाओं का प्रवेश बिस्तर से होकर गुजरता है ठीक उसी तरह पत्रकारिता में भी कई कई महिलाओं का प्रवेश शायद इसी तरह से हो रहा है। कई उदाहरण है इसके। एक ऐसी पत्रिका के प्रकाशन की दास्ताँ हमारे सामने है जिसकी बुनिआद ही सेक्स की भावना से दी गयी थी। दो लड़कियों के करामात के कारण ये पत्रिका तो बंद हो गयी । सम्पादक पत्रकार सड़क पर आ गए लेकिन वो दोनों महिला पत्रकार आज सेलिब्रेटी बनी हुयी है। देश में प्राइवेट चैनेल की उम्र कोई १५ सालोकी है। इन १५ सालो में पत्रकारिता के रूप रंग, आचार, विचार, सब बदले है। मिसनरी पत्रकारिता का रूप प्रोफेसन और करियर के रूप में सामने है। बाजार ब्यवस्था है। और उसका ब्यापक असर भी। जब मिसन की बात ही नहीं है तो ग्लामर की इस दुनिया में भला कौन नहीं आना चाहे। बाजार बाद के इन्ही दिनों में लोगो की प्रतिबधता समाज से कम होकर ब्यक्ति के प्रति बढ़ गयी। आज टी वि की दुनिया में जो भी कुछ हो रहा है उसके लिए हम सब दोषी है।
नॉएडा आज टी वी की दुनिया का केंद्र बना हुआ है। लेकिन यहाँ दर्जनों ऐसे केस है जो आधुनिक पत्रकारिता और पत्रकार के चरित्र को दिखाता है। यहाँ के ही एक ऐसे प्रबंध संपादक है जिन्हें एक महिला पत्रकार से बेहद लगाव है। कहते है की इसमहिला पत्रकार से हर कोई डरता है। एक चैनेल के एक एसैन्मेंट एडिटर को लड़किओ की ऐसी भूख थी की उसे हर रोह किसी का साथ चाहिय था। लड़किया आपस में बात करती थी की आज उन्होंने कैसे क्या किया। पांडव नगर से एक चैनेल में काम करने वाली लड़की अपने इनपुट एडिटर की खासी प्यारी रही है। इस लड़की को दो प्रमोसन मिल चुका है।एक चैनेल की एंकर अपने लटके झटके के दम पर औत्पुत एडिटर को फसाया । फिर यह लड़की सम्पादक से मिलकर उसकी छुट्टी करा दी। इस लड़की की उस चैनेल में खूब चल रही है और नौकरी के दर से कोई बोलने को तैयार नहीं है। एक चानेल की प्रोग्रामिंग एडिटर को मालिक ने खूब आगे बढ़ाया । बाद में इसकी बिदाई हो गयी । यह महिला आज नॉएडा में ही काम कर रही है। एंकरों की दुनिया भी खूब है। इस दिल्ली की चार एंकर की सी दी बनी हुयी है और उसमे भीतर के खेल को दरसाया गया है। एक चैनेल के मालिक और उसके पुत्र अपने दोस्तों के साथ ही महिलाओं की इज्जत उतारते है । जिन लोगो ने बिरोध किया उनकी नौकरी चली गयी। एक स्टिंग ओपेरासन टीम के सी इ ओ ने बंगलौर जाकर तिन लड़कियों के साथ गड़बड़ किया। उस लड़की ने पुलिस में कम्प्लेंकरने की बजाय नौकरी छोड़ गयी।इनमे दो लडकिया सबसे तेज चैनेल में है और एक नॉएडा की एक चैनेल में । इसी नॉएडा के एक बड़े चैनेल में दो पत्रकार महोदय पहले १६ लडकियो की बहाली की । बाद में चार लडकिया निकाल दी गयी । इन लडकियों ने मेल के जरिये बताया है की उसे कुछ पाने के लिया कुछ देने की बात कही गयी थी। एक प्रोडक्सन हाउस में एक भी टी एडिटर को खुश करने के लिए लड़कियों ने काफी लिफ्ट दी। बाद में उसी के जरिये ये लडकिय एक चैनेल में सामूहिक रूप से पहुच गयी। दो लड़की अभी झंडेवाला में काम करती है। विशेष संबाददाता के रूप में काम कर रही इस लड़की के पास शायद मुक्कम्मल डिग्री भी नहीं है। सी पि एक चैनेल के सीधी पर ही एंकर और कैम्रामान आसक्त हो गए। सभी ने देखा। यह कैमरा पर्सन मालिक का ख़ास है।ग्रेटर कैलास से आने वाली उस एंकर को फिल्म सिटी में कौन नहीं जानता जो हेड से ही गाली गलौज से बात करती है।
हमारे मेल पर दर्जनों महिलाओं ने अपनी बात भेजी है । और दर्जनों पुरुष पत्रकारों ने भी अपने अनुभव भेजे है। इनमे कई लोगो के नाम और काम भी है। कई मालिको के कारनामे भी। बावजूद इसके पत्रकारिता एक पवित्र धर्म है। समाज में बदलाव लाने का जरिया है। केवल नौकरी के नाम पर सब कुछ गवा देने की जो परम्परा चल रही है हमें रसातल की और ले जाएगा। इस पुरे खेल में काम करने वाले लोग परेशान हो रहे है। चाहे वह पुरुष हो या महिल्ला। इस पुरे मामले को चैनेल मालिको को भी समझना चाहिय। जारी----

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