Monday, February 8, 2010

मीडिया में यौनाचार -5

अखिलेश अखिल

उदारीकरण के बाद मीडिया का जो रूप बदला है अब किसी से छिपा नहीं है। मीडिया का चरित्र बदला तो हम पत्रकार भी बदले। इस बदलाव में हम अपनी सुचिता, इमानदारी,प्रतिबधता ,चरित्र और सामाजिक कर्त्तव्य को दफनाते चले गए। बावजूद इसके न पूरा समाज गंदा है और न ही पूरी पत्रकारिता और पुरे पत्रकार। प्रेस को जब लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना गया था तो उसके पीछे की बात यह थी की प्रेस के लोग समाज को दिशा देंगे और लोक तंत्र के तीनो स्तंभों पर नजर रखेंगे ताकि हर हाल में राष्ट्र और जनता का भला हो। इसके पीछे का सच यह भी था की जो लोग मीडिया में आयेंगे ,वे समाज के लिए आदर्श होंगे । इसका मतलब ये है की मीडिया और मीडिया के लोग आम नहीं खाश लोग है और खाश लोगो से अपेक्षा की जाती है की उनका दामन साफ़ हो।

इस बहस में कई लोगो ने सवाल उठाया है की किसी के निजी जीवन पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। इसमें सचाई भी है। लेकिन जो सर्ब्जनिक लोग है उन्हें अपने पद के मर्यादा का भी ख़याल रखना होता है। यहाँ किसी से प्यार मोहब्बत करने की बात नहीं है, मामला पद के दुरूपयोग का है। और फिर प्यार किसी एक से ही संभव है। क्या मान लिया जाय की हम पत्रकारों के बारे में जो बाते कही जा रही है, और पिछले कुछ सालो में जो हम करते आ रहे है सब बकवाश है। आज हमें इसपर सोचने की जरुरत है नहीं तो आने वाला कल और ही भयावह हो सकता है।
आज हम कुछ और जानकारी आप तक पहुचने की कोशिश कर रहे है। जानकारी के मुताबिक़ उत्तरप्रदेश के लखनऊ में एक ऐसे पत्रकार के वरिष्ठ पत्रकार है जो बिना आचमन किये हुए किसी का प्रमोशन नहीं करते। कई लोगो की शिकायत है की उन्होंने ऐसा करके ही प्रमोशन पा सके है। इसी शहर के एक पुराने अखवार में कम से कम दो लडकियों को इसलिए नौकरी छोडनी पड़ी थी की उसके साथ समाचार सम्पादक कुछ हरकत करना चाह रहे थे। इस बाबत शिकायत होने पर इस सज्जन की मरम्मत भी हुयी थी । इसी शहर में एक चैनल के इनपुट हेड मार खा चुके है। इनकी पिटाई किसी खबर को लेकर नहीं, गलत आचरण को लेकर हुयी थी। एक चानेल में काम करने वाले उस पत्रकार को क्या कहेंगे जो खुद तो काम करते नहीं लेकिन महिला पत्रकार इनके पीछे जमी रहती है। कहते है की यह भीड़ बॉस से मिलवाने के लिए होत है। आगरा में भी दो पत्रकार भाई ऐसे है जिन्हें आदम्खोद तक कहा जाता है। ये पत्रकार आजकल टी वी में जाने के लिए तड़प रहे है। उधर उत्तराखंड की पत्रकारिता को कई पत्रकारों ने लज्जित कर रखा है। इनमे से दो पत्रकार अखवार से आते है । ये लोग नै नै महिला पत्रकारों को लाते है और जब इनका मकसद पूरा हो जाता है या फिर पूरा नहीं होता है तो उसे निकाल देते है। देहरादून की कई महिला पत्रकारों ने एक बार इनकी बेइजती भी की थी। यही के चानेल में काम कर रही कई पत्रकार नौकरी के नाम पर विवश होकर रहने को मजबूर है। एक चानेल के बॉस अक्सर कहते है की नौकरी संबंधो से मिलेगी न की पत्रकारिता करके। हरिद्वार में एक चानेल के बड़े आदमी महिला पत्रकार के साथ आये थे। शाम ढलते ही महिला जाने की जिद करने लगी और पत्रकार महोदय पिने में जुटे रहे। लड़की लौट गयी। दुसरे दिन उसकी नौकरी चली गयी। दो साल पहले उसी हरिद्वार में दो लड़की एक व्यापारी को ब्लाक्मैल करने के लिए खुद का स्टिंग ओपरेशन कर लिया।

चरित्रहीनता की कहानी बंगाल की मीडिया में भी काफी है। यहाँ शोषण का बाजार कुछ ज्यादा ही गर्म है। एक पुराने अखवार के फोटोग्राफर के बारे में वहा चर्चा है की उसने नैतिकता की साड़ी सीमाए तोड़ दी है।फोटोग्राफी सिखाने के नाम पर महिला पत्रकारों के साथ यह किसी भी हद तक चला जाता है। कोलकाता में एक महिला पत्रकार इतनी कड़क है की कामी पत्रकार रास्ता छोड़ देते है। इस महिला पत्रकार ने कई लोगो को रास्ता दिखाने का काम किया है। लेकिन एक स्थानीय चैनेल की दो महिला पत्रकार अपने साथी पत्रकार के शोषण से तंग आकर कोलकता छोड़ने पर मजबूर भी हुयी। कोलकता से हमारे एक साथी ने कई लोगो की सूचि भेजी है जो यौनाचार में लिप्त रहते है। इनमे से कई लोगो की उम्र ४० के पार है। यही के एक चानेल के एक वरिष्ट पत्रकार दार्जिलिंग में नौकरी देने के नाम पर तिन लड़कियों के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखे गए थे। बाद में इन्हें नौकरी से हाथ धोनी पड़ी। उधर झारखंड में भी कई ऐसे पत्रकार है जो महिला पत्रकारों का शोषण करते रहे है। रांची के एक पत्रकार तो इस बावत कई बार पिटाई भी खा चुके है। धनबाद और जमशेदपुर कुछ नेता और पत्रकार मिलकर कई असामाजिक गतिविधियो में शामिल रहे है।

1 comment:

  1. Bahut achhe. hari anant hari katha ananta. Abhi bahut logo ki gandagi baki hai.

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