Thursday, December 2, 2010

मध्यावधि चुनाव की आहट

akhilesh akhil

इस बार प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह बुरी तरह फंसे दिखाई दे रहे हैभ्रस्टाचार और घोटालो ने मनमोहन की इस सरकार की कलाई खोल दी हैउदारीकरण के बाद सबसे ज्यादा घोटाला नरसिंघा राव के समय में हुआ थाउसके बाद घोटालो की यही सरकार दिख रही हैयह बात और है की तमाम जन विरोधी नीतिओं के बावजूद इस सरकार में आर्थिक विकास दर बढती जा रही है , लेकिन घोटालो ने यह सावित कर दिया है की मनमोहन अब तक के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैआलम यह है की आज की तारीख में आम चुनाव हो जाय तो इस सरकार और इस में शामिल डालो की खटिया खड़ी हो जाएगी

लगता है काग्रेस के लिए यह परीक्षा की घडी हैऔर अभी कांग्रेस नहीं सम्हली तो उसका सफाया निश्चित हैमामला एक दो भ्रस्टाचार तक ही सिमित नहीं है , लगता है पूरी व्यवस्था ही सड सी गयी हैइस सरकार की एक जो नयी बात देखने को मिल रही है , वह है सभी दलो के नेताओं पर घोटालो के आरोपऐसी कोई पार्टी नहीं है जिन पर घोटालो के आरोप नहीं लगे है

देश का सुप्रीम कोर्ट घोटालो को देख कर चकरा रही है और बार बार सरकार को डाट रही है की सरकार और सरकार के लोग इस खेल से बाज आये और दोषियों के खिलाफ कारवाई करेआब तक जितने घोटाले सामने आये है , उनमे एक आदमी अभी तक जेल नहीं पहुचा हैऔर नहीं लूटे गए पैसे की वापसी हुयी हैजांच दर जांच की प्रक्रिया चल रही है और दोषी लूटे गए पैसे के जरिये ही केश को उलझाते जा रहा हैसरकार कहा दोषीओ को दंड देती , उसका पूरा जोर अपने को बचाने में लगा हुआ हैघोटालो के इस खेल में संसद थप है और देश का करोडो बर्बाद हो रहा हैयह अपने तरह का एक नया घोटाला है

घोटालो के इस पुरे खेल में जनता लगातार लुट की शिकार होत जा रही हैमहंगाई अपने चरम पर है और उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं हैलोगो के बिच में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है और चारो तरफ सरकार की हसी हो रही हैइस पुरे खेल से लगता है की देश मध्यवती चुनाव की तरफ बढ़ रहा है और संभावना बन रही है की २०१२ तक ऐसी स्थिति भी जाएऔर यदि ऐसा होता है तो इसके लिए जिम्मेदार यही सरकार होगीऔर फिर कांग्रेस के सफाए को कोई रोक नहीं सकताराहुल और सोनिया गाँधी को इस पर मनन करना चाहिए

2 comments:

  1. Dukh ki baat to ye hai ki isme media ke log bhi samil ahi to bhala phir aaina dikhane ki umeed kis se ki jae. ab bina stand ki deewar wale gharo me rahne walo ko aaina kaun dikhaega.

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