Thursday, February 10, 2011

विकसित देश,अविकसित लोग

अखिलेश अखिल
सरकार कह रही है की देश तेजी से विकास के पथ पर है और यह विकास दर करीब ९ फीसदी के आसपास है। सरकार कहती है तो हमें इसे मानना ही पडेगा। चुकि आम जनता के पास इसे मानने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। लेकिन जनता इन सरकारी आंकड़ो से भौंचक है। उसे समझ में नहीं आ रहा है की अगर देश इतनी तेजी से विकास कर रहा है तो उसका विकास क्यों नहीं हो रहा है?क्यों उसकी कामद महंगाई से टूटी हुयी है?क्यों उसके घरो में खाने पिने की चीजो के लाले पड़े हुए है?क्यों उसके बच्चे की स्कूल की फी समय से नहीं जाती? क्यों उसके बच्चे के स्कूल की इमारत दुरुस्त नहीं हो पाती?क्यों उसे रासन की दूकान से सस्ता रासन नहीं मिल रहा है? क्यों उसके नल में साफ पानी नहीं आ रहा है? और क्यों उसे घंटो तक बिना बीजली के रहना पड़ता है?
पिछले डेढ़ दशक से देश के विकास की बात की जाती रही है,पर देश की ९५ फीसदी जनता ,जिसमे गरीब और माध्यम बर्ग शामिल है,लगातार पिछ्रती हुयी महशुस कर रही है? जिन चीजो पर सरकार सब्सिडी देने का दावा करती है,मसलन किरोसिन तेल ,सस्ता राशन,सरकारी स्कुलो में शिक्षा , वे या तो आम आदमी को मुहैया नहीं है और है भी तो इस हालत में की न उनका इस्तेमाल हो सकता है और ना छोड़ा जा सकता है।
हालाकि देश को आजाद हुए भले ही ६४ साल हो गए ,लेकिन देश की जनता अभी जाग नहीं पायी है। जिस दिन देश जाग जाएगा उसी दिन आम आदमी की समस्या समाप्त हो जायेगी। फिर भी जनता के कुछ सवाल है। अगर देश की विकास दर इतनी अछि है तो हर महीने उसकी क्रय शक्ति कम क्यों होत जा रही है? उसकी बचत बढ़ने के बजाये हर शाल कम क्यों होत जा रही है? वह क्यों हर महीने की २० तारीख को उधार लेने के लिए हाथ पाऊँ मारता फिरता है?क्यों उसे सरकारी अस्पताल में न इलाज की सुबिधा है और न ही दबा मिलती है? आम आदमी अपना काम इमानदारी से कर रहा है, सारे कर अदा करता है , नियमो का पालन करता है और क़ानून से उसकी घिघी भी बंधी रहती है।
सरकार कह रही है की इस वर्ष कृषि विकास दर भी अछि है और वह करीव ५.४ फीसदी के आसपास है। अगर ये आंकरे सही है तो देश के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है? लेकिन सवाल ये है की खेती के बेहतर होने के बावजूद किसान मरते जा रहे है। सन १९९७ से लेकर अबतक हमारी विकास दर इतनी अछि बनी हुयी है की हम विश्व में आर्थिक महाशक्ति बन्ने का सपना देख रहे है। और इन्ही सालो में देश के २ लाख से ज्यादा किसानो ने आत्महत्या कर ली है। ये वे मामले है जिनकी जानकारी लोगो को है।
इन आंकरू को देख कर ऐसा लगता है की विशेषज्ञों का एक बड़ा दल और सरकारी तंत्र हाथो में हाथ डाले एक ऐसी विज्ञापन कंपनी के रूप में काम कर रहे है, जिसका काम सपने दिखाकर आकर्षक शैली में अपनी तथाकथित उपलब्धियों का माल जनसाधारण को बेचना है। विकास दर आगे हैतो जनसंख्या पीछे क्यों है? ऐसे सवालों से आम आदमी थकता जा रहा है। आज हालत ये है की देश के ९५ फीसदी लोग गरीबी में जी रहे है .और सबसे बड़ा सवाल ये हैकी विकास का लाभ आम लोगो को क्यों नहीं मिल रहा है? देश के ये पैसे किसके पास जा रहे है। देश के सारे नेता अमीर कैसे बन रहे है? देश के सारे नौकरशाह अमीर क्यों है? देश का कर्पोराते घराना इतनी जल्दी आगे कैसे बढ़ जा रहा है? विदेशो में काले धन किसके है? और जिसके है उसे सजा क्यों नहीं मिलती? देश के अधिकतर गरीबो से ही जेल क्यों भरी है? फिर दलितों, पिछ्रो को न्याय क्यों नहीं मिलता? सवाल कई है । लेकिन इसका जबाव शायद ही कोई दे पाए? फिर भी कहो लोकतंत्र की जय।

1 comment:

  1. vikas dar adhik badhne se mahangai badhti hi hai....des soche ki use kaisi vikas dar chahiye.....japan jab amerika ko vikas ke mamle me chunauti de raha thaa to uske nagrik living cost badhne se lahuluhan hue.....bharat me arthik gatividhiyan bajaronmukh hai...sarkar apni nitiyon ki vajah se lachaar bani hai....hame mix economy ko nahi tyagna chahiye...sath hi sarkari tantra ke delivery system ko durust karna hoga....anyatha logon me suicidal tendency badhti hi jaegy...
    sanjay mishra

    ReplyDelete