Monday, April 4, 2011

कटघरे में सरकार

अखिलेश अखिल भ्रष्टाचार के मामले में केंद्र सरकार कटघरे में है। भ्रष्टाचार के मसले पर जिस तरह सरकार काम करती दिख रही है ,साफ़ जाहिर है की सरकार और उसके लोग जनता को बेवकूफ बना रही है। हलाकि इस मामले में जनता भी कोई कम दोषी नहीं है । अगर सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार के लिए कारण है तो जनता मुख्य कारक। लेकिन इतना तै मानिये की भ्रस्टाचार से लड़ने वालो की भी कमी नहीं है। अभी अन्ना हजारे ने इस सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंका है जो सरकार के लिए परेशानी का शबब बना हुआ है। अन्ना हजारे ने बिगुल बजा दिया है। हजारे का यह बिगुल मनमोहन को जगाने के लिए है। मनमोहन को जगाने के लिए अन्ना भूख हड़ताल पर बैठ रहे है। अन्ना चाहते है की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए लोकपाल संस्था के लिए ठोशक़ानून बने। मनमोहन सरकार जागे ,नागरिक समाज से बात करे और उसे भरोसे में लेकर क़ानून बनाए। हजारे और उनके साथ्यो की बातो से मनमोहन सिंह अभी तक नींद से नहीं जाग पाए है.मनमोहन सिंह चुप्पी साधे रहे। अन्ना ने ऐलान किया है की जब तक लोकपाल बिल संसद में नहीं आ जाता तब तक वे महाराष्ट्र नहीं लौटेंगे। ७२ साल के अन्ना का अनशन पर बैठना मनमोहन की लीडरशिप को कटघरे में लाने वाला है। हलाकि मनमोहन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है.विचार के लिए मंत्रियो का एक जी औ ऍम बनाया।लेकिन इस के प्रमुख प्रणव मुखर्जी के पास लोकपाल बिल पर विचार के लिए समय नहीं है। उससे भी बात नहीं बनी तो एक सब कमेटी भी बना डाली। इसके प्रमुख अंटोनी है। लेकिन अंटोनी को केरल चुनाव से फुर्सत नहीं है। इस सब ग्रुप के अंटोनी, सिब्बल,मोइली और नारायण शमी ने इंडिया अगेंस्ट करप्सन के लोगो को बुलाकर बात की। लेकिन उनकी कोशिस यह थी की किसी तरह हजारे आमरण अनशन का इरादा छोड़ दे। इस ग्रुप ने यह नहीं कहा की सरकार लोकपाल बिल में देरी नहीं करेगी और सरकार ने जो ड्राफ्ट बनाया है उसमे सिविल सोसिटी के सुझावों को भी शामिल किया जायगा। अब मनमोहन सिंह, सरकार और सोनिया गांधी की राष्ट्रिय सलाहकार परिषद् के सरकारी समाज सेवी इस कोशिस में है की ले देकर सहमती बनाई जाए । कहने का मतलब की अन्ना जो कहना चाह रहे है उनकी कुछ बातो को शामिल कर लिया जाए और लोकपाल बिल की सहमती का नाटक हो जाए। आपको बता दे की अन्ना ने उस जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट आगे किया हुआ है जिसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संतोष हेगड़ेवकील प्रशांत भूषण और समाज सेवी अरविन्द केजरीवाल ने बनाया है। इसकी खास बात ये है की केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त पूर्ण स्वायत और कार्यपालिका से स्वतंत्र संस्था बने.इन्हें अपने आप किसी मामले की जांच और एक्शन लेने का अधिकार हो। प्रधानमन्त्री तक के खिलाफ शिकायत लेने , जांच और करवाई करने का अधिकार हो। अफसर -बाबू के खिलाफ तुरंत कारवाई करने का अधिकार हो। सुचना देने वाले पर्दाफासी को प्रोटेक्ट करने की गारंटी हो। लोकपाल सीधे लोगो की शिकायत सुने और जांच और करवाई की सूचनाओं को जनहित में जारी किया जाता रहे। ऐसी ताकतवर लोकपाल संस्था की कल्पना प्रधानमन्त्री दफ्तर और कैबिनेट सचिवालय के अफसरों और मंत्रियो को नहीं जम रही है। इसलिए मनमोहन सरकार ने लोकपाल बिल का जो ड्राफ्ट बनाया है ओग सौ फीसदी ठगी है। सरकारी बिल में लोकपाल की सलाहकारी भूमिका सोची गयी है। मतलब सरकार शिकायत भेजेगी। ओग विचार करेगा और फिर स्पीकर को शिफारिश करेगा की आगे करवाई हो। जाहिर ऐसा ड्राफ्ट बनवाकर मनमोहन सिंह ने अपने नियत पर संदेह पैदा किया है। अन्ना हजारे और उनके समर्थन में बैठे लोग गांधीवादी तरीके से सच की खोज कर रहे है और सरकार और सरकार के लोग अपनी चोरी से बाज नहीं आ रहे है। जाहिर है हमारा लोकतंत्र भ्रष्टाचारियो का गुलाम हो गया है। अब इस गुलामीसे मुक्ति के लिए फिर जुंग की जरूरत है

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