Friday, September 2, 2011

राजनीति के ‘युवा नादिरशाह’

अखिलेश अखिल


युवाओं के जौहर से हतप्रभ दुनिया को भारतीय युवा नेताओं के एक और जौहर से रूबरू होना पड़ेगा। गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकार्ड्स वालों के लिए यह जौहर जांच का विषय हो सकता है। एक ओर राहुल गांधी जहां राजनीति में युवाओं को लाने के लिए गांव-गांव दौरा कर रहे हैं, वहीं राजनीति में युवा नादिरशाहों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। कैसे?

पिछले कुछ सालों की राजनीति में जहां बड़ी संख्या में युवाओं की इंट्री हुई है, वहीं बड़ी संख्या में युवा केंद्रीय मंत्री और राज्य के मंत्री जेल की सलाखों के पीछे भी गए हैं। कई लोग जाने की कतार में हैं। राजनीति करने वाले ये सफेदपोश अपराध की राजनीति की वजह से जेल में बंद नहीं हुए हैं, बल्कि देश का खजाना लूटने के आरोप में बंद होते जा रहे हैं। इन लुटेरे युवा नेताओं को देखकर कहा जा सकता है कि इतिहास का सबसे बड़ा लुटेरा नादिरशाह अगर आज जिंदा होता, तो वह भी शरमा जाता। देश के कुछ चर्चित युवा राजनीतिक लुटेरों से हम आपका परिचय कराएंगे, लेकिन सबसे पहले कुछ इतिहास की जानकारी। इतिहास के उस नादिरशाह को तो आप जानते ही होंगे, जिसने न सिर्फ भारत को अंजुलीभरकर लूटा बल्कि लाखों लोगों की हत्या भी की। सन् 1739 में ईरान का लुटेरा नादिरशाह दिल्ली पहुंचा और देश में तबाही मचाकर 1753 तक कुल 85,500,000 पौंड की लूट की। अपनी इस लूट को अंजाम देने के लिए उस लुटेरे ने दो लाख से ज्यादा लोगों, महिलाओं और बच्चों का कत्ल किया। इस लुटेरे ने भारत में केवल लूट ही नहीं की, हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया। हजारों को गुलाम बनाकर अपने देश ले गया। हजारों टन सोना, चांदी और हीरे-जवाहरात के साथ ही यह नराधम भारत का मयूर सिंहासन भी अपने साथ ले गया। मध्यकालीन भारत में हुई इस लूट की गाथा को बाद में अंग्रेजों ने दो सौ साल तक आगे बढ़ाया।

आजादी के बाद नेताओं ने भी इस देश को कम नहीं लूटा। लेकिन पिछले आठ से दस सालों में जिस तरह से युवा नेताओं ने देश को लूटा, उसके सामने नादिरशाह भी बौना नजर आता है। आइए, देश के इन युवा नादिरशाहों से आपका परिचय कराते हैं। ये युवा नादिरशाह हैं-ए. राजा, कनिमोझी, दयानिधि मारन, मधु कोड़ा, एनोस एक्का और हरिनारायण राय, कमलेश सिंह, भानु प्रताप शाही। इनमें से पहले तीन ए. राजा, कनिमोझी और मारन तमिलनाडु में द्रमुक की राजनीति करते हैं। द्रमुक मुखिया करुणानिधि के खासमखास हैं। बाकी के ये नादिरशाह झारखंड राज्य से आते हैं। इन्होंने लूट की नई परिभाषा गढ़ी है। हालांकि भ्रष्टाचार और लूट की कहानी हर सूबे से जुड़ी है। हर पार्टी के लोग अपने-अपने अंदाज में देश को लूटते रहे हैं। वैसे यहां हम केवल उन्हीं लोगों पर नजर डालने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें युवा समझ कर देश की जनता ने अपना प्रतिनिधि बनाया और लुट गई। 40-45 साल के इन युवाओं की करतूत को देखकर एक सवाल खड़ा होता है कि आज जिस युवा राजनीति की बात की जा रही है, वह कितनी जायज है? कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी कांग्रेस के लिए भविष्य की राजनीति कर रहे हैं। युवा कांग्रेस से लेकर छात्र कांग्रेस इकाई में कई तरह के बदलाव करते दिख रहे हैं। मकसद एक ही है, समाज में क्रांति लाना.. बदलाव की क्रांति। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1974 में देश के हालात को देखते हुए युवाओं का आह्वान कर संपूर्ण क्रांति का आगाज किया था। क्रांति का असर हुआ और राजनीति में भारी बदलाव आया। इंदिरा गांधी सत्ता से बेदखल हो गर्इं।

जनता पार्टी की सरकार बनी। मोरारजी देसाई पहली बार गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। कई राज्यों की सरकार पलटी। जिन युवाओं ने जेपी के सामने व्यवस्था परिवर्तन की कसमें खार्इं, वे बाद में कई राज्यों में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और सांसद से लेकर विधायक तक बने। चारों तरफ जनता की सरकार दिखी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में युवाओं के लिए राजनीति में प्रवेश का यह सबसे पहला और सुनहरा काल था। हालांकि, हुआ वही, जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। समाज को बदलने के नाम पर इन युवा नेताओं ने स्वयं को बदला और उन तमाम कर्मकांडों के हिस्सेदार बने, जिसके विरोध में उन्होंने जेपी के सामने कसमें खाई थीं। आज भी कई अवसरों पर जेपी के ध्वजवाहक होने का दंभ भरने वाले मंत्री, संतरी, नेताओं, सांसदों और विधायकों से यह तो पूछा ही जाना चाहिए कि उनकी समाज निर्माण में क्या भूमिका है? जाहिर है, इस सवाल का जवाब भी जेपी के लोगों के पास होगा। खैर, इससे इतना तो कहा ही जा सकता है कि जब 74 के व्यापक छात्र आंदोलन से निकले हजारों युवक सीधे राजनीति में प्रवेश करके भी राजनीति की गंदगी साफ नहीं कर सके, तो आज के युवा क्या कर सकेंगे, कहना मुश्किल है। आइए, अब आपको मिलवाते हैं उन युवा नेताओं से जिन्हें चुनाव में वोट देकर आपने युवा राजनीति का सपोर्ट किया था। सपोर्ट ही क्यों, संभव है कि आपने इन्हें जिताने के लिए कुछ अच्छे-बुरे काम भी किए हों। तमिलनाडु में नीलगिरी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले ए. राजा को तो आप जानते ही हैं। द्रमुक राजनीति में यह आदमी दलितों का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। द्रमुक के अन्य नेताओं में ए. राजा काफी पढ़े-लिखे होने से करुणानिधि के भी चहेते रहे हंै। ए. राजा यूपीए-एक सरकार में दूर संचार मंत्री बने और देश को लूटने का काम शुरू कर दिया।

44 साल के इस युवा नेता पर युवकों को नाज था, लेकिन इसने देश को लूटने में नादिरशाह को भी पीछे छोड़ दिया। एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ की लूट इस नेता ने एक ही बार में कर ली। आज यह आदमी भले ही जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन इसने युवा राजनीति को भी कलंकित कर दिया है। ए. राजा के जेल जाने के बाद लगा था कि युवा राजनीति को कलंकित करने वाला यह आदमी शायद अपवाद हो, लेकिन इसी टूजी घोटाले में करुणानिधि की सांसद बेटी कनिमोझी जेल गई, तो साफ हो गया कि युवाओं में भी मौकाटेरियन्सकी कमी नहीं है। कनिमोझी न सिर्फ युवा हैं, बल्कि महिला भी। इस महिला ने जिस तरह ए. राजा के साथ मिलकर घोटाले को अंजाम दिया है, उससे महिलाओं को भी गहरा धक्का पहुंचा है। 40 साल की एमए पास कनिमोझी अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी बेहतर दखल रखती हैं। सरकारी फाइलों में आठ करोड़ की संपत्ति की मालकिन कनिमोझी की दूसरी शादी है और विदेशी खबरों पर यकीन करें, तो कनिमोझी के ए. राजा के साथ मधुर संबंध रहे हैं। पत्रकारिता करने से लेकर कविता और किताब लिखने वाली कनिमोझी युवा राजनीति के लिए किसी कलंक से कम नहीं है। उधर, इस दयानिधि मारन को आप क्या कहेंगे? टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में अब यह छोटे कद वाला गोरा चिट्टा व्यापारी युवा नेता भी फंस चुका है। कपड़ा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाला यह नेता यूपीए-एक में 26 मई 2004 से लेकर 13 मई 2007 तक दूरसंचार मंत्री पद का स्वाद चख चुका था।

650 करोड़ रुपए की घूसखोरी की थी। मारन ने इस लूटकांड को 2006 में अंजाम दिया था। घूसखोरी की यह रकम तमाम मायाजाल के जरिए मारन ने अपने सन टीवी चैनल तक पहुंचाने का खेल किया था। सन टीवी पर मारन परिवार का मालिकाना हक है। मारन के भाई कलानिधि मारन इस टीवी के अध्यक्ष हैं। पांच दिसंबर 1966 को जन्मे दयानिधि मारन सेंट्रल चेन्नई का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां से दो बार वह सांसद चुने गए हैं।

दयानिधि द्रमुक नेता करुणानिधि का रिश्तेदार है। करुणानिधि की बहन दयानिधि की दादी है। दो बच्चों का बाप यह युवा नेता डिजायनर कपड़ों का तो शौकीन है ही, क्रिकेट और गोल्फ का भी दीवाना है। मारन टूजी लूटकांड के एक आरोपी के रूप में सामने आए हैं। संभव है कि वे जेल भी जाएं। पहले यही मारन चेन्नई के युवाओं के लिए एक मॉडल था, लेकिन अब इसकी साख गिर गई है। इस आधुनिक नादिरशाह के लूट स्टाइल को देख-सुनकर चेन्नईवासी हतप्रभ हैं।

इसी क्रम में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड का दर्द और बढ़ गया है। बिहार के जमाने से ही यह इलाका शोषण और माओवादियों की धमक से परेशान था। राज्य बनने के बाद युवा नादिरशाहों ने इस राज्य की कमर ही तोड़ डाली है। राज्य को बने 10 साल हो गए, लेकिन किसी पार्टी ने भी यहां स्थायी सरकार नहीं दी। एक दशक के भीतर जिन युवा नेताओं के हाथ में शासन की बागडोर दी गई, उनमें अधिकतर दलाल और लुटेरे साबित हुए।

जिन लोगों के कंधे पर राज्य के भ्रष्टाचारियों को दंड देने की जिम्मेदारी थी, आज वे खुद जेल की सलाखों के पीछे तो पहुंच ही गए, पूरी युवा राजनीति को भी कलंकित कर गए। आइए आपको मिलवाते हैं राज्य के कुछ उन युवा नेताओं से जो अभी जेल के भीतर हैं।

ये हैं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा। 40 वर्षीय मधु कोड़ा 2006 से 2008 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। कोड़ा देश के तीसरे ऐसे निर्दलीय विधायक थे, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। किसान रसिक कोड़ा के बेटे मधु ने राजनीति की शुरुआत तो छात्र राजनीति से की थी और एक संघर्षर्शील नेता के रूप में उभरे थे, लेकिन राजनीति के खेल से वे बच नहीं पाए। करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप कोड़ा पर है। कोड़ा पिछले दो साल से जेल में बंद हैं। कोड़ा अभी पूरी तरह से कानून के शिकंजे में हैं। युवा राजनीति में इनकी तुलना नादिरशाह से की जा रही है। हालांकि जेएमएम के युवा नेता और राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरी युवा राजनीति को गलत मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार एक व्यापक शब्द है। इसमें यह देखने की जरूरत है कि जनता के पैसों की लूट न हो।

झारखंड के दूसरे युवा नादिरशाह के रूप में एनोस एक्का का नाम सामने आता है। इसे राज्य की बजबजाती राजनीति कहिए या फिर एक्का के पैसों का खेल। भ्रष्टाचार में फंसने के बावजूद इसने फिर कोलेबीरा, सिमडेगा से चुनाव जीतने में सफलता हासिल की। 40 साल के एक्का अपनी अलग पार्टी चलाते हैं।

पिछले चुनाव में इन्होंने तीन करोड़ की संपत्ति के मालिक होने का दावा किया था। एक्का के इस दावे को सरकार झूठ मान रही है। कुल जमा 10वीं पास एक्का पढ़ने में तो नाकाबिल रहे, लेकिन राज्य की संपत्ति को लूटने में अव्वल। इनकी लगभग आठ करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और कई अन्य मामले की जांच चल रही है। एक्का कई अन्य मामलों में भी आरोपित हैं। धारा 120बी, 302, 147, 148, 409 और 465 समेत कई अन्य मामले दर्ज हैं। अगर राजनीति भ्रष्ट हो गई है, तो एनोस एक्का युवा राजनीति के नादिरशाह हैं। 47 साल के कमलेश सिंह से झारखंड के लोग तो परिचित हैं और मीडिया के लोग भी। कमलेश सिंह अभी एनसीपी की राजनीति करते हैं और इनके तार मुंबई के कई नेताओं से जुड़े हैं। हुसैनाबाद पलामू से विधानसभा पहुंचने वाले कमलेश सिंह न सिर्फ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जेल में बंद हैं, बल्कि कई और आपराधिक मामलों के भी आरोपी हैं। इन पर धारा 384, 307, 120बी, 147 और 148 समेत कई अन्य मामले भी हैं। सरकारी फाइलों में कमलेश सिंह मात्र छह लाख की संपत्ति के मालिक हैं, जबकि इनके पास से चार करोड़ 73 लाख से ज्यादा की संपत्ति पाई गई है। राज्य को लूटने में जिन लोगों की राजनीति सबसे आगे रही है, उनमें कमलेश भी एक हैं। झारखंड में ही युवा राजनीति को कलंकित करने वालों में हरिनारायण राय को भी आप शामिल कर सकते हैं। हरिनारायण राय हालांकि 48 साल के हो गए हैं। इन्हें जातीय वोट के अलावा युवाओं के वोट ज्यादा मिलते हैं। देवघर के रहने वाले राय साहब पर संभव है कि भोले बाबा की कृपा बनी रहती है। राय साहब भी जांच के दायरे में हैं। आय से अधिक संपत्ति रखने की जांच चल रही है। स्नातक राय साहब की संपत्ति सरकारी फाइलों में एक करोड़ है, लेकिन जांच एजेंसियां उन्हें बड़ा खिलाड़ी मान रही हैं। कई आर्थिक मामलों के अलावा राय साहब पर 120बी, 406, 465, 424, और 409 समेत कई अन्य मामले दर्ज हैं।

No comments:

Post a Comment