Wednesday, October 12, 2011

लालू ने फंसाया,नीतीश ने फंासी तक पहुंचायाः आनंद मोहन

अखिलेश अखिल

राबिन हुड, दबंग,अपराधी,शूटर,डान और अंत में गरीबों व मुजलिमों का मसीहा कहे जाने वाले बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया हत्या कांड मामले में सहरसा जेल में उम्र कैद की सजा काट करे हैं। उम्र कैद की ये सजा पटना हाई कोर्ट ने दे रखी है। इससे पहले निचली अदालत ने आनंद मोहन को इसी मामले में फंासी की सजा दी थी। 74 आंदोलन की उपज आनंद मोहन अपनी हरकतो के लिए हमेशा चर्चा में रहे हैं। बिहार विधान सभा से लेकर संसद तक उनकी हरकतों के गवाह रहे हैं। लालू प्रसाद को चुनौती देकर उन्होने बिहार पीपुल्स पार्टी की स्थापना की और ढेरों सुर्खियां बटोरी थी, लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी धराशायी हो गई। फिर जदयू से जुड़े और सांसद भी बने। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के साथ राजनीति कर चुके आनंद मोहन की पहचान भले ही एक राबिन हुड की रही हो, लेकिन उनकी बेबाक राजनीतिक सोंच के कायल आज भी बहुत सारे नेता हैं। सहरसा जेल में रहकर आनंद मोहन आज भी न सिर्फ गरीब मजलुम कैदियों की कानूनी लड़ाई लड़कर उन्हें रिहा कराने में लगे हुए हैं बल्कि गांधी और बौद्ध दर्शन का ब्यापक अध्ययन कर चार खंडों में अपनी जेल डायरी को सहेजने में भी लगे हुए हैं। दो खंडों में तैयार उनका काब्य संग्रह कैद में आजाद कलम और दो खंडों में तैयार काल कोठरी से उनकी जेल डायरी भारतीय समाज, राजनीति और दर्शन पर काफी कुछ कह रहा है। पिछले 29 सितंबर 2011 को एक मुकदमें में हाजिर होने सीतामढी अदालत से लौटते वक्त आनंद मोहन से मुजफ्फरपुर ढोली के अशोक विहार होटल में तमाम राजनीतिक, सामाजिक मसलों पर बातचीत की। पेश है बातचीत के संपादित अंश.......

राबिनहुड आनंद मोहन का समय जेल में कैसा कट रहा है।?
मैं जेल में क्या कर रहा हूुं, इस पर चर्चा तो बाद में करेंगे पहले राबिन हुड पर मुझे आपत्ति है। ये राबिन हुड का नाम आप मीडिया वालों ने दे रखा है। मैंन कभी भी अपने को राबिन हुड कहलाने की बात नहीं की है। हालाकि मैं इसे स्वीकार भी करता हूं। देखिए कमजोरों,मुजलिमों, गरीबों और महिलाओं पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना और बंदुक उठाना गलत है तो मैं राबिन हुड हूं।तब तो अर्जुन, श्रीकृष्ण और हनुमानजी भी राबिन हुड हैं। मुझे विधायक रहते हुए बंदुक उठानी पउ़ी थी। जब औरतो की इज्जत लूटी जा रही हो और पिछड़ों के साथ अन्याय किया जा रहा हो ता क्या उनकी रक्षा नहीं की जानी चाहिए?

हां तो आपकी जेल यात्रा कैसी चल रही है?
जेल तो जेल है। इस चारदिवारी के भीतर जो हम कर सकते हैं बखुबी कर रहे हैं। सुबह चार बजे हमें कमरे से बाहर किया जाता है। दैनिक क्रिया से निवृत होकर हम पढाई में जुट जाते हैं। अखवार से लेकर कई महान लोगों की किताबों का अध्ययन हम कर रहे हैं और अपने अनुभव को भी लिख रहे हैं। फिर साढे आठ से साढे दस बजे तक हमारा जनता दरबार लगता है। बिहार सरकार तो कभी कभार जनता दरबार लगाती है, हमारा दरबार रोज चलता है। जेल के भीतर बंद गरीब और लाचार कैदियों की कहानी सुनते हैं और फिर अपने वकीलों के जरिए इनकी केस की पैरबी करते हैं। आपको बता दें कि अब तक हम सैकउ़ों कैदियों को इन जेलों से कानून के जरिए बाहर निकालने में सफल हुए हैं। साधारण साधारण दफा में ये कैदी सालों से जेल में बंद हैं।

अभी आप कह रहे थे कि जेल में आप महान लोगों की किताबे पढ रहे हैं और कुछ लिख भी रहे हैं?
कुछ किताबें तो हाई लेवल की पढ रहा हूं।आचार्य नरेंद्रदेव का बौद्ध दर्शन 700 पन्नें की किताब है। इसके अलावा उनकी ही संस्कृति के चार अध्याय का गहन अध्ययन कर चुका हूं। अभी इस जेल की लाइबे्ररी में ही संपूर्ण क्रांति वांग्मय की सौ खंडो वाली किताब को पढ रहा हूं।इन किताबों के पढने के बाद मैनंे गांधी शीर्षक से एक रचना की है जो मेरी जेल डायरी का एक हिस्सा है।

आपने अभी तक कितनी रचनाएं की है?
‘काल कोठरी से’ नाम से दो खंडों में मेरी जेल डायरी तैयार है। इसके अलावा दो खंडों में मेरा काब्य संग्रह तैयार है। इस संग्रह का नाम ‘कैद में आजाद कलम’ है। इसी काब्य संग्रह का एक शीर्षक है धैर्य, जिसकी एक पंक्ति है- ‘हर क्षमाशील व्यक्ति में धैर्य छुपा है,जंग रूका जबतक कि धैर्य रूका है’। कई तरह के अनुभवों को अपने काब्य संग्रह में दर्ज करने की कोशिश की है। इसी तरह एक कविता है गुमनाम नहीं मरूंगा।
आप पर हत्या करने का दोष है। आप अपने को दोषी मानते हैं या नही?
हमें हत्या करने के मामले में जेल में बंद किया गया है। पहले फंासी की सजा दी गई फिर बाद में उम्र कैद की। मुकदमा अभी सुप्रीम कोर्ट में है। जनवरी में केस खुलना है। देश की न्यायिक ब्यवस्था पर हमें भरोसा है और इश्वर में आस्था। इश्वर कही वाकई में है तो हमे न्याय मिलेगा। न्याय को अपना दामन बचाना है। इश्वर की परीक्षा होनी है। हमारा कुछ नहीं होगा।

फिर डीएम कृष्णैया की हत्या किसने की?
यह हम नहीं जानते। जिस आदमी को हमने देखा तक नहीं उस आदमी की हत्या के आरोप में हम जेल में बंद हैं। डीएम के बाडी गार्ड और ड्ाइवर ने अपने बयान में कहा है कि गोली नहीं चली थी। इंट, पत्थर और रोड़ा से डीएम को मारा गया था।पटना हाई कोर्ट के जस्टिस एस एन झा ने कहा है कि अगर सीएम भी इस मामले में गवाही देंगे तो यह नहीं माना जा सकता कि आनंदमोहन घटना स्थल पर थे और उन्होंने गोली चलवाई। फिर नीतीश कुमार ने भी धरना पर बैठ कर कहा था कि आनंदमोहन को फंसाया गया है। लेकिन हम जेल में हैं।

ल्ेकिन आपकी राजनीति तो अपराध से ही शुरू हुई थी?
ये गलत सोंच है। आप हमारे बैग्राउंड को देखे।मेंरे दादा जी को इलाके में गांधी कहते थे लोग। हमारे घर पर महात्मा गांधी और राजेंद्र प्रसाद आते थे। दादा जी का अंतिम क्षण पांडीचेरी के अरबिंदों आश्रम में बीता था। 74 के आंदोलन के समय हम क्रांतिदूत अखवार के संपादक थे। कोसी इलाके का यह चर्चित अखवार था। बिहार का तीसरा जलियावाला बाग कांड के नाम से हमारी एक स्टोरी काफी चर्चित हुई थी । हां राजनीति में आने के बाद गरीबों की लड़ाई हमने लड़ी और बंदूक भी उठाए। लेकिन यह सब न्याय पाने के लिए था।

थोड़ी बात राजनीति पर हो जाए। आप लालू और नीतीश दोनो के साथ काम कर चुके है। दोनो में क्या अंतर पाते हैं?
हां हमने दोनो के साथ काम किया हैं । दोनेा को जानते भी है और समझते भी हैं। सच कहूं तो एक ने हमें फंसाया और दूसरे ने जेल तक पहुचाया है।

लेकिन नीतीश जी तो सुशासन और न्याय की बात करते हैं?
बिहार में सुशासन कैसा है यह बिहारवासी ही जानते हैं। जबतक जनता इस सरकार से आजीज नहीं हो जाती तबतक इनकी सरकार चल रही है और तभी तक इनका सुशासन को ढोंग चलेगा। लालू के राज से भी ज्यादा यहां भ्रष्टाचार और लूट है। अफसरशाही चरम पर है और अपराध भी। फिर नीतीश जी ने विकास का कौन सा काम किए है बताएं। नीतीश जी विकास नहीं रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। कितनी नई सड़के उन्होने बनायी? कितनी फैक्ट्यिां बिहार में लगी? कितने लोगों को रोजगार मिला है? देखिए जिन लोगों ने उन्हें चुना है वही जाने।

लेकिन नीतीश जी अपराध की राजनीति को बंद करने का दावा भी कर रहे है?
सभी दलों के इतिहास को पहले आप देख ले और यह भी देखें कि किस दल में कितने अपराध के आरोपी लोग सांसद, विधायक है। पहले इसे छापे। जिस दल में सबसे ज्यादा अपराधी है वह पवित्र बना हुआ है । जिसने कहा कि परिवारवाद नहीं चलने देंगे उसी ने सबसे ज्यादा परिवारवाद को पोषा है। वृष्ण पटेल,जगदीश शर्मा,मुन्ना शुक्ला के परिजनों को किसने टिकट दिया था।

और भ्रष्टाचार के मामले में नीतीश जी को कहां पाते है?
जिसके सरकार में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है वह आदमी अन्ना के समर्थन में बयान दे रहा है । इससे ज्यादा कुछ नही कहा जा सकता।चारा घेटाला में इनके उपर भी आरोप लगे हैं। इनके उपर भी 164 के तहत बरूान है। मैनेज करके निकल गए।

अन्ना के भ्रश्टाचार विरोधी और जनलोकपाल के लिए आंदोलन को आप किस रूप में देख रहे है?
अन्ना पर कुछ कहूंगा। एक कविता है मेरी जिसकी पंक्ति है- ‘है सत्ता जब जब भी संत से टकराई।है तब तब सच जीता,सत्ता मूंह की खाई’।
अन्ना इमानदार है और उनकी पहल को मै नमन करता हूं। लेकिन उनकी टीम इमानदार नहीं है। हालाकि अन्ना को पहले अंशन नहीं करना चाहिए। अनशन तो गांधीवाद का अंतिम अहिंसात्मक प्रयास है। इससे पहले अन्ना को और कुछ करना चाहिए था। लेकिन उनको मैं सलाम करता हूं। मेरी पहल पर सहरसा जेल में भी अन्ना के समर्थन में जेल के सारे स्टाफ अनशन पर बैठे थे। इसमें लेकर से लेकर कैदी तक और चपरासी से लेकर सिपाही तक शामिल थे।

और रामदेव का आंदोलन?
वह तो ढोंगी है।11 साल पहले वह साइकिल पर चलता था अब 11 हजार करोड़ का मालिक है। उसके पास अपना प्लेन है, विदेश में एक आयलैंड है। फिर वह नैतिकता की बात कैसे करता है। वह भी अनशन करने दिल्ली पहुंच गया था। अनैतिक आदमी को गांधीबादी हथियार अनशन नहीं अपनाना चाहिए।

नीतीश और नरेंद्र मोदी को आप पीएम का उम्मीदवार मानते हैं?
यह सब आप लोगों का परसेपशन है। नीतीश तब प्रधानमंत्री बन सकते हैं जब उनकी पाटी्र राष्ट्ीय हो जाएगी। वे तो बिहार में भी पूरा नहीं है। आधा बीजेपी है। वे झारखंउ, यूपी में भी नहीं है। बिहार के बाहर कहीं नहीं है। फिर नीतीश खुद कहते हैंकि वे पीएम के रेस में नहीं है। और नरेंद्र मोदी को पीएम कौन बनायगा। उसका मुकाबला नीतीरूा से नहीं है आडवाणी से है। नागपुर को फैसला लेना है।गडकरी कुछ नहीं कर सकते है।

आप वर्तमान में किस आदमी से प्रभावित है?
कलाम और मनमोहन सिंह से। मनमोहन सिंह निजी तौर पर बेहद इमानदार आदमी है और देश की सेवा भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी टीम ठीक नहीं है। टीम अन्ना और टीम मनमोहन दोनो पर भरोसा नहीं किया जा सकता ।

भविष्य की रणनीति?
अभी तो अपनी किताबों को सजेने में लगे हैं। आगे क्या होगा अभी नहीं कहा जा सकता ।

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