Friday, November 4, 2011

कांग्रेस की काक-दृष्टि


अखिलेश अखिल

झारखंड में अर्जुन मुंडा की सरकार फिलहाल तो अपने ट्रैक पर चलती दिखाई पड़ती है, लेकिन सरकार के भीतर और बाहर जो खेल चल रहे हैं, उससे सरकार के भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। जिस गति से रांची और दिल्ली में पिछले एक पखवाड़े से राजनीतिक सरगर्मियां चल रही हैं, उससे लगता है कि अर्जुन मुंडा की सरकार इस साल के दिसंबर तक भी चलने की स्थिति में नहीं है। झारखंड पर अब कांग्रेस की काक-दृष्टि ठहर गई हैं और वह अब किसी भी तरह मुंडा सरकार को हटाने की तैयारी में है। कांग्रेस इस खेल के लिए फिर उसी शिबू सोरेन को अपने पाले में लाने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था में लग गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी चाहते हैं कि मुंडा की सरकार की ‘बलि’ ली जाए और इसके लिए वे झामुमो, राजद और कांग्रेस के कई विधायकों से सीधे संपर्क में हैं। आपको बता दें कि प्रदेश में राजद के पांच विधायक हैं और लालू प्रसाद कांग्रेस, झामुमो और आजसू को लेकर सरकार बनाने की रणनीति बना रहे हैं।

उधर, कांग्रेस ने इस पूरे खेल की जिम्मेदारी अहमद पटेल को दे रखी है। हाल के दिनों में अहमद पटेल से सीता सोरेन की मुलाकात के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में गर्माहट आ गई है। बताया जा रहा है कि सरकार परिवर्तन को लेकर सीता सोरेन की यह तीसरी बार दिल्ली के कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात हुई है। सीता सोरेन झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की बहू हैं और वर्तमान में संथाल परगना के जामा विधानसभा से विधायक हैं। आपको बताते चलें कि सीता के स्व. पति दुर्गा सोरेन पहले इसी क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सीता को मंत्रिमंडल में शामिल करने की बात थी, लेकिन शिबू सोरेन अपने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कर सके। उसके बाद से ही सीता अपने ही घर की राजनीति से खफा होकर लगभग अलग हो गर्इं और झामुमो में रहते हुए ‘एकला चलो’ की राजनीति करने लगीं। फिर अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में जब सरकार बनी, तो उसमें भी सीता सोरेन को कोई महत्व नहीं दिया गया। इसके बाद सीता ने अपने पिता के साथ मिलकर दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया। खबर है कि हाल में सीता की मुलाकात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी से हुई है, जिसमें राज्य की तमाम राजनीति पर चर्चा की गई।

हाल-फिलहाल के अपने दिल्ली दौरे में भी सीता के साथ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अहमद पटेल से हुई मुलाकात के बाद रांची की राजनीति में भूचाल आ गया। हालांकि हेमंत से जुडेÞ सूत्रों की मानें, तो हेमंत की पटेल से मुलाकात किसी राजनीति के तहत नहीं थी। इस मुलाकात को प्रदेश की विकास योजनाओं से जोड़कर देखने की बात कही गई है। संभव है कि हेमंत और सीता की दिल्ली के कांग्रेसजनों से हुई मुलाकात के पीछे राज्य की योजनाओं का ही मामला हो, लेकिन पिछले दिनों लालू प्रसाद और शिबू सोरेन की बातचीत को क्या कहा जाए, इस पर झामुमो के लोग चुप हैं। इसके अलावा झारखंड में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक राजेंद्र सिंह से शिबू सोरेन की दो बार की लंबी बातचीत को जब मीडिया ने प्रसारित किया, तो गुरुजी ने उस बातचीत को घरेलू और व्यक्तिगत बातचीत करार दिया और कहा कि सरकार चल रही है और चलती रहेगी।

दरअसल, झामुमो के भीतर कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसी भी तरह चाहते हैं कि अर्जुन मुंडा की सरकार गिर जाए और कांग्रेस के साथ सरकार बने। प्रदेश के मुख्यमंत्री को झामुमो के विद्रोही लोगों के बारे में सारी जानकारियां हंै, लेकिन अभी झामुमो को तोड़ना उनके लिए लाभकारी नहीं है। लेकिन जिस तरह इन दिनों अर्जुन मुंडा की नजदीकी झामुमो के वरिष्ठ नेता साइमन मरांडी से बढ़ी है, उसके भी कई राजनीतिक अर्थ लगाए जा रहे हैं।

आपको बता दें कि इधर साइमन की मुंडा से तीन मुलाकातें हुई हैं और मुंडा ने खुलकर साइमन के सामने कई प्रस्ताव भी रखे हैं। हालांकि उन प्रस्तावों पर साइमन की कोई सहमति नहीं बनी है और वे अभी भी संभावनाओं की बात कर रहे हैं। साइमन मरांडी कहते हैं कि राजनीति में संभावनाओं की कमी नहीं होती। सरकार अभी चल रही है और विकल्प मिलने पर देखा जा सकता है। इस सरकार में जनता के लिए कोई ऐसा काम नहीं हुआ है, जिससे इसके समर्थन में बोला जाए। हालांकि झामुमो के बारागोरा से विधायक विद्ुत बरण महतो सरकार के पक्ष में खड़े दिखते हैं। महतो कहते हैं कि सरकार चल रही है और चलेगी भी। विकास का काम हो रहा है और जनता खुश है। लेकिन इस सवाल का जवाब महतो नहीं दे पाए कि शिबू, हेमंत और सीता की कांग्रेस नेताओं से हुई मुलाकात को क्या कहा जाए?

झामुमो सूत्रों की मानें, तो जल्द ही दिल्ली में सभी झामुमो विधायकों की एक अहम बैठक होने वाली है। ये सभी विधायक पहले कोलकाता जाएंगे और फिर लौटकर दिल्ली पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि इन विधायकों के साथ कांग्रेस के प्रदेश नेता राजेंद्र सिंह भी होंगे। आपको बता दें कि आजसू के तीन विधायक भी पिछले दिनों साइमन मरांडी से मिले थे और मुंडा सरकार से अलग होने की अपील भी की थी। इस पूरे खेल को बाबूलाल मरांडी भी देख रहे हैं। अपने 14 विधायकों को लेकर बाबूलाल मरांडी कांग्रेस पर दबाव बनाए हुए है कि अगर सरकार बनाने के कोई प्रयास हुए, तो उनके नेतृत्व में ही सरकार बननी चाहिए। अब यह कांगे्रस को तय करना है कि अगर राज्य में कोई भी राजनीतिक खेल होता है, तो बाबूलाल मरांडी सरकार में शामिल होंगे या फिर बाहर से समर्थन देंगे। राज्य के 81 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 18, जेवीएम के 14, कांग्रेस के 11, झामुमो के 18, राजद के पांच, आजसू के पांच और अन्य नौ विधायक हैं। जाहिर है, कांगे्रस कोई खेल करती है, तो भाजपा और जेवीएम से हटकर भी कांग्रेस, झामुमो, आजसू, राजद और अन्य विधायकों को मिलाकर सरकार बना सकती है। उधर, राज्य में भाजपा भी सरकार को बचाने में लगी हुई है। इस खेल में भी संघ की ओर से कुछ लोगों ने साइमन मरांडी से मुलाकात की है और साइमन को कहा है कि पार्टी अर्जुन मुंडा को बदल सकती है, बशर्ते सरकार चलती रहे। आगे क्या कुछ होगा, अभी कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि झारखंड में राजनीतिक अस्थिरता के बादल मंडरा रहे हैं।

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