Monday, December 5, 2011

बिसेन को नाथने की तैयार

रिश्वतखोरी के एक मामले में मप्र के मंत्री जी ने बयान बदलकर आफत मोल ले ली है। उनके बदले बयान पर ‘बयानों का दौर शुरू’ हो गया है। कहा जा रहा है कि मोटी रकम लेकर अपना ही बयान मंत्री जी ने बदला है। अब उन्हें हटाने की मांग की जा रही है।

अखिलेश अखिल

मध्य प्रदेश भिंड के कार्यपालन यंत्री आरएन करैया पर घूस देने का आरोप लगाने वाले पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) मंत्री गौरी शंकर बिसेन अब अपने ही जाल में फंस गए हैं। थाने और अदालत में अपने अलग-अलग दिए बयान की वजह से न सिर्फ उन्हें अपने मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। पक्ष-विपक्ष की इस राजनीति के बीच न्याय किस करवट बैठता है, सूबे की जनता उसका इंतजार कर रही है। उल्लेखनीय है कि 26 मई 2009 को पीएचई मंत्री गौरी शंकर बिसेन के निजी सहायक बनराज महेश ने भोपाल टीटी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि भिंड के कार्यपालन यंत्री आरएन करैया ने अपना निलंबन समाप्त कराने के लिए पवन व्यास के साथ मिलकर बिसेन को पांच लाख रुपये घूस देने की पेशकश की थी। बिसेन ने तब पुलिस बयान में कहा था कि ‘26 मई 2009 को पवन व्यास ने करैया का निलंबन समाप्त करने के लिए 5 लाख रुपये देने की पेशकश की। यह बात सुनकर वे झल्लाए और कहा कि जानते नहीं हो, मैं भाजपा में हूं। इसके बाद करैया और पवन वहां से भाग गए।’

आपको बता दें कि इस मामले में बिसेन के बंगले पर मौजूद गवाह सागर बिसेन, रमेश भटेरे और बिसेन के निजी सहायक बनराज महेश के बयान भी पुलिस ने दर्ज किए थे। अब तक यह मामला शांत पड़ा हुआ था। लेकिन पिछले 24 नवंबर को जब विशेष सत्र न्यायाधीश लोकायुक्त की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, तो सब कुछ बदल गया। अदालत में सुनवाई के दौरान मंत्री गौरीशंकर बिसेन समेत सभी गवाह अपने पहले के बयान से मुकर गए। इन लोगों ने अदालत में मौजूद आरोपियों को भी पहचानने से मना कर दिया। अदालत में बिसेन ने कहा, ‘मैं 2009 में पीएचई और सहकारिता विभाग का कैबिनेट मंत्री था। दैनिक कार्य के दौरान कई लोग मिलने आते थे। बंगले पर भीड़ रहती थी, इसलिए इन आरोपियों को नहीं पहचानता हूं।’ अब जरा इनके पीए बनराज महेश के तब के बयान को देख लें। बनराज महेश ने तब पुलिस में बयान दिया था कि ‘भिंड के ईई करैया ने निलंबन खत्म करने के लिए सूटकेस में रखे हुए नोट के बंडल भी दिखाए। उस समय पवन व्यास भी वहां था।’ लेकिन अदालत में इनका बयान कुछ और ही आया। बनराज ने अदालत को बताया कि ‘आरोपियों को नहीं जानता। पुलिस ने मेरे सामने घटनास्थल का नक्शा बनाया था। और कोई कार्रवाई नहीं की।’ इस मसले पर विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों ने न सिर्फ जमकर हंगामा किया, बल्कि बिसेन के इस्तीफे की मांग भी कर दी।

विपक्ष के नेता अजय सिंह और कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राकेश सिंह चतुर्वेदी ने बिसेन के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, ‘संवैधानिक पद पर रहते हुए मंत्री द्वारा बयान बदलने का यह खेल न सिर्फ आपराधिक कृत्य है, बल्कि भ्रष्टाचार करने का एक नायाब नमूना भी है। जाहिर है कि मंत्री और उसके लोगों ने घूस लेकर बयान बदले हैं। ऐसी स्थिति में मंत्री को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं हैं।’ ‘हमवतन’ ने इस मामले में ईई करैया से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। लेकिन कांग्रेस समेत भाजपा के कई विधायकों और नेताओं ने इसे गंभीर बताया। पूर्व मंत्री और कटंगी से कांग्रेस के विधायक विश्वेश्वर भगत ने इस मामले को बहुत ही गंभीर माना है। भगत ने साफ-साफ कहा है कि ‘जब तक बिसेन से इस्तीफा नहीं लिया जाता, तब तक सदन नहीं चलने देंगे। यह पूरा भ्रष्टाचार का मामला है और इस खेल में बिसेन और मुख्यमंत्री की सहभागिता है। बिसेन और शिवराज सिंह का ससुराल गोंदिया में है और दोनों के साले योजनाओं की ‘लूट’ में शामिल रहे हैं। ऐसी हालत में मुख्यमंत्री बिसेन को बचाने के प्रयास में हैं।’ हमने मंत्री बिसेन से भी बातचीत करने की कोशिश की। मंत्री के फोन नं0 09425139726 पर जब फोन लगाया, तो मंत्री के पीए बनराज ने ही फोन उठाया। सवाल के जवाब में बनराज ने कहा कि पुलिस में हमने शिकायत की थी, लेकिन अब इस मामले में हम कुछ नहीं बोलेंगे। अदालत में भी हमने बयान दिया है। इस मामले में ज्यादा कुछ ‘साहब’ ही बता सकते हैं।’

जाहिर है, बनराज ने मंत्री जी के दबाव में यह बयान दिया है और खुद अपना बयान भी बदला है। आप इसे जो भी कहें, लेकिन बालाघाट के पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने इस संवाददाता को फोन पर बताया, ‘बिसेन पर तो पहले से ही कई आरोप हैं। इसे तो तुरंत पद से हटा देना चाहिए। यह शिवराज का आदमी है और हर काम में दोनों की मिलीभगत होती हैं। पैसे लेकर बिसेन ने बयान बदला है और उस पैसे में शिवराज को भी हिस्सा दिया गया है। बिसेन के इलाके के गांव पिपरिया, थाना लालबर्रा में जिन चार लोगों की हत्या हुई है और डाका डाला गया है, उसमें हत्यारे के रूप में किसन ठाकरे का नाम सामने आया है। यह किसन ठाकरे बिसेन का आदमी है और उसका बूथ पोलिंग एजेंट भी है। लगता तो ऐसा है कि बिसेन के इशारे पर यह सब हुआ है।’ बालाघाट लांजी के विधायक हैं रमेश भटेरे। थाने गवाही देते समय भटेरे ने भी अपनी बात पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कराई थी। भटेरे कहते हैं, ‘हमने पुलिस रिकॉर्ड में कहा था कि कोई पैसा लेकर आए हैं, जिस पर मंत्री जी चिल्ला रहे थे। इसके अलावा करैया को न जानने की भी बात मैंने कही थी। मैंने कोई बयान नहीं बदला है। न ही किसी से पैसे लेने की जरूरत है। हमें अब फंसाने की कोशिश चल रही है। हमने तो करैया से कोई पैसा नहीं लिया, मंत्री जी की बात मैं नहीं जानता।

हां, इतना जरूर है कि मंत्री जी के बयान पहले से बदले हुए हैं।’ लेकिन लांजी के ही पूर्व सपा विधायक किशोर समरीते कहते हैं, ‘जो आदमी बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करता, वह भला किसी के लिए मुफ्त में बयान क्यों बदलेगा? बिसेन ने पैसे लिए ही होंगे। अब तो सबसे पहले बिसेन को हटाने की जरूरत है और धारा 211 और 182 के तहत इस पर मुकदमा चलाने की जरूरत है। इसके अलावा सरकार को करैया को मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि उसे बदनाम किया गया था। इस मामले की सीबीआई से भी जांच कराई जानी चाहिए।’ लांजी के कांग्रेसी नेता शेषराम राहंगडाले इस ‘खेल’ से हतप्रभ हैं। शेषराम कहते हैं कि यह बड़ा मामला है। संवैधानिक पद पर बैठा आदमी इतना निम्न काम करेगा, कभी सोचा भी नहीं था। इसने कानून का मजाक उड़ाया है और मंत्री पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। इसे तुरंत हटा देना चाहिए और और इसकी जांच कराई जानी चाहिए।’ ज्ञात हो कि बिसेन पर इससे पहले भी कई आरोप लगते रहे हैं। इनके बारे में सूबे की राजनीति में चर्चा होती है कि अगर राज्य के 10 भ्रष्टाचारियों की सूची बनाई जाए, तो बिसेन दूसरे नंबर पर आते हैं। भाजपा के ही एक विधायक कहते हैं कि बिसेन ने गवाही बदलकर जो काम किया है, वह कहीं से भी संवैधानिक लोगों को शोभा नहीं देता। वैसे बिसेन की ये आदत रही है। पैसे कमाने का इतना ही शौक है, तो ठेकेदारी शुरू कर देनी चाहिए। बालाघाट बैहर के भाजपा विधायक हैं भगत नेताम। इस इलाके के चर्चित चेहरे हैं। लोगों में अच्छी पकड़ भी है।

विरोधियों को भी पटा लेते हैं। नेताम ने इस संवाददाता को बताया कि उस मामले में गवाही देने लांजी विधायक भटेरे भी गए थे। जो लोग गवाही देते हैं, उन्हें अपनी मर्यादा का खयाल रखना चाहिए। और जहां तक बिसेन जी का मसला है, उस संदर्भ में यही कहा जा सकता है कि यह कानूनी मसला है। हम जब सांसद विधायक या फिर मंत्री बनते हैं, तो संविधान के तहत ईमानदारी की शपथ लेते हैं और कसम खाकर भी हम गलत काम करें, तो इसे आप क्या कहेंगे? इस मामले की जांच हो और अगर कोई दोषी है, तो उसे दंडित भी किया जाए। बिसेन जी को सरकार हटाती है या नहीं, इसका फैसला तो मुख्यमंत्री को करना है। लेकिन जो भी हो जनता का विश्वास नहीं टूटे, इस पर गौर करना चाहिए।’ जाहिर है, भगत नेताम हालात को जान रहे हैं और उसकी सच्चाई को भी। तभी तो वे कह रहे हैं कि जनता का विश्वास न टूटे। लेकिन वारासिवनी के कांग्रेस विधायक प्रदीप जायसवाल की राय कुछ अलग ही है। प्रदीप कहते है, ‘इसी मंत्री ने इस मामले को इतना तूल दिया था कि लोग वाहवाही कर रहे थे। उस समय तो यह आदमी ईमानदार बनने चला था, लेकिन आज इसकी सच्चाई सामने आ गई। लगता है कि इसने इस मामले में काफी पैसे लिए हैं। कोई मंत्री अपना बयान बदले तो करोड़ों का मामला तो होगा ही।’ सूबे की राजनीति में विपक्ष को यह बड़ा मुद्दा बैठे-बिठाए मिल गया है। अगर इस मसले पर बिसेन को हटाया जाता है, तो भ्रष्टाचार के मामले में शिवराज सिंह पर भी उंगली उठेगी ही और अगर बिसेन को बचाने का खेल होता है, तो सरकार को यह सत्र चलाने में दिक्कत आएगी। कांग्रेस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। खबर ये भी है कि इस मामले में अजीत जोगी भी कमर कस चुके हैं। अब देखना यह है कि कौन क्या करता है?

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