Monday, December 5, 2011

‘पंचदेवताओं' ने मचाई लूट


akhilesh akhil

पूर्वोत्तर के पांचों राज्यों में 50 से ज्यादा घोटालों को अंजाम दिया गया है। जांच एक की भी नहीं हुई। इससे घोटालेबाजों के चेहरों पर भय कहीं नजर नहीं आता। पूर्वोत्तर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, तो सिर्फ इसीलिए कि वहां की सरकारों में बैठे लोग खुद का घर भर रहे हैं?

केंद्र सरकार की योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार को लेकर संसद में पक्ष-विपक्ष की राजनीति भले ही गर्म हो, लेकिन पूर्वोत्तर राज्य असम में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर हर कोई मौन है। पूर्वोत्तर के पांच मुख्यमंत्रियों तरुण गोगोई, पवन कुमार चामलिंग, इकराम इबोबी, दोरजी खांडू और नीपुरियो ने अपने-अपने प्रदेश में जिस तरह से लूट का खेल खेला है, इससे पहले कभी नहीं खेला गया।

भ्रष्टाचार में लिप्त सत्ता पक्ष कांग्रेस के सामने असम की विभिन्न योजनाओं में घोटालों की सूची के आंकड़े हैं, लेकिन लूटने वाले भला लूट की जांच क्यों कराएं? लेकिन भाजपा समेत राज्य की तमाम विपक्षी पार्टियां अगर इस मसले पर चुप हैं, तो आश्चर्य ही कहा जा सकता है। पूर्वोत्तर के राज्यों में पिछले 4 सालों के भीतर पावर क्षेत्र से लेकर विकास की तमाम योजनाओं में कोई चार लाख 63 हजार करोड़ रुपये के घोटालोें को अंजाम दिया गया था। फिर भाजपा ने अपने स्तर से भी इसकी जांच कराई। कैग ने जांच की और कई घपलों को पाया। केंद्र सरकार की भी भृकुटी तनी। केंद्रीय जांच एजेंसी से सारे मामलों की जांच कराने की बात आई। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

अब गोगोई सरकार के खिलाफ आक्रोश की चिंगारी भड़कने लगी है। एनसी हिल आटोनोमस कांैसिल के आम लोग अब कहने लगे हैं कि अगर तरुण गोगोई की सरकार हमारी हिफाजत के लिए चल रही योजनाओं को ठीक से नहीं चला सकती, तो उसे बने रहने का क्या मतलब है? दरअसल, इस पूरे इलाके में आदिवासियों की बहुतायत है और उनका आर्थिक, सामाजिक जीवन विकास के सबसे निचले पायदान पर है। पिछले साल इस इलाके के विकास के लिए एक हजार करोड़ की राशि केंद्र से भेजी गई थी। मकसद साफ था कि इलाके के लोगों का कल्याण हो। लोगों को काम मिले, भोजन मिले और सड़क, बिजली और पानी का मुकम्मल इंतजाम हो सके। इन्हीं मांगों को लेकर असम कई बार उबलने लगता है।

सरकार से आश्वासन मिलता है और लोग चुप्पी साध लेते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने लोगों को ठगने के लिए फिर एनसी हिल आटोनोमस कौंसिल को विकसित करने के नाम पर एक हजार करोड़ रुपये दिए, लेकिन वे घपले की भेंट चढ़ गए। भाजपा ने इस मसले को गंभीरता से लिया और अपनी टीम भेजकर असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में हुए घपलों की सूची बनाई और लोगों के सामने रखा। दिखाने के लिए कुछ दिनों तक आंदोलन भी हुए, लेकिन हुआ कुछ नहीं, लेकिन अब एनसी हिल कौंसिल मानने को तैयार नहीं है।

सोमन बोरा कहते हैं कि ‘हम सबसे ज्यादा परेशान हैं भ्रष्टाचार से। सरकार कहने के लिए स्कीम चलाती है और फिर घूम फिर कर ‘लूट’ भी लेती है। सरकार कहती है कि यहां कोई परेशानी नहीं है, लेकिन यहां तो परेशानी ही परेशानी है। न तो मनरेगा में काम है और नहीं दूसरी जगह। आप ही बताइए, जब पेट ही नहीं भरेगा, तो लोग गलत काम करेंगे ही।’ सुमन बोरा अपने 8 साथियों के साथ पिछले सप्ताह दिल्ली में काम की तलाश में आए हैं। उनके साथ सुमित्रा भी है और राजकुमार भी। सुमित्रा कहने लगी ‘हमें आज तक सरकार ने घर नहीं दिया।

सरकारी लोग आते हैं और हर बार इंदिरा आवास देने की बात करते हैं, देता कोई नहीं। गोगोई बड़ा खिलाड़ी है। इसके सारे लोग झूठ बोलते हैं। राजकुमार स्रातक है। गांव में रहकर चाय-पान बेचता था। चार बच्चे और घर का खर्च निकालना मुश्किल है। वह कहता है, ‘सरकार कहती है कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय 27,196 रुपये है। अखबारों में ये आंकड़े आए हैं। जिस प्रदेश की आधी से ज्यादा आबादी को पेट पालने में भी आफत है, उसकी सालाना आय इतनी कैसे हो सकती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि अमीरों और उद्योगपतियों की आय जोड़कर राज्य की प्रति व्यक्ति आय तैयार कर ली जाती है?’ असम में पिछले साल एनसी हिल विकास की धनराशि में घपला तो किया ही गया, साथ ही कई योजनाओं में जमकर मलाई खाई गई। विकास के ये पैसे नॉर्थ कछार हिल जिले के लिए भेजे गए थे। इसके साथ ही कारबी आंगलांग स्वायत कौंसिल के लिए जो 3000 करोड़ रुपये भेजे गए, उस राशि की नेताओं, ठेकेदारों और नौकरशाहों ने बंदरबांट कर ली। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह अपनी तरह की अनोखी ‘लूट’ है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सहचर हैं अखिल गोगोई। कृषक मुक्ति संग्राम समिति नाम से एनजीओ चलाते हैं। जरा इनका ‘कारनामा’ देखें। इस आदमी को पहले 35 लाख और फिर 25 लाख का इंदिरा आवास बनाने का काम दिया गया। 35 लाख में 140 इंदिरा आवासों का निर्माण होना था, बना एक भी नहीं। गरीबों के ये मकान 12 पंचायतों में बनाए जाने थे। 25 लाख में जितने मकान बनने थे, उनमें से मात्र 28 ही बनाए गए, वह भी अधूरे। कैग ने जब इसका खुलासा किया, तो अखिल गोगोई भागते फिरे। मजे की बात यह कि जांच आज तक नहीं हुई। सच तो यह है कि आज भी अखिल गोगोई को लाखों का काम सरकार ने दिया हुआ है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव कीरीट सोमैया कहते हैं कि ‘जितने घोटाले असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में सामने आए हैं, उसकी जांच हो जाए तो सारे लोग जेल के पीछे नजर आएंगे। लेकिन कांग्रेस सरकार कुछ करने का नाम ही नहीं ले रही है। हमने इस सभी मामले की सीबीआई से जांच करने की बात कही है, लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है।’ उल्लेखनीय कि एनसी हिल कौंसिल के लिए राज्य वित्त विभाग ने 151 करोड़, 40 लाख 11 हजार रुपये मंजूर किए थे। यह राशि 26 महीनों में दी गई। लेकिन आॅडिट में पाया गया कि गोगोई ने इस पर 424 करोड़, 64 लाख 23 हजार रुपये की निकासी की। चूंकि वित्त विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही था, इसलिए गोगोई ने इस पर जमकर ‘खेल’ किया। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्रालय की जब जांच हुई, तो इस लूट में शामिल 14 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए। जिन लोगों को आरोपित किया गया, उनमें आतंकी गुट ‘डीएचडी’ (जे) के प्रमुख जेवल गरिओसा, इसी गुट के कमांडर इन चीफ निरंजन होजई, एनसी हिल के पूर्व सदस्य मोहित होजई और समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक एएच खान शामिल हैं। लेकिन आज तक इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस घपले में गोगोई सरकार के सात मंत्री भी दोषी बताए जाते हैं।

भाजपा असम संगठन मंत्री हरेकृष्ण भराली कहते हैं कि ‘जब तक राज्य सरकार केंद्रीय जांच के लिए नहीं कहेगी, जांच नहीं होने वाली। यहां जनता के सारे पैसे लूटे जा रहे हैं और और सरकारी लोग खुशियां मना रहे हैं।’ मामला केवल असम में हुए भ्रष्टाचार तक ही सीमित नहीं है। पिछले तीन सालों में मणिपुर में 5 हजार करोड़ रुपयों से ज्यादा के घपले हुए हैं। मणिपुर में यह लूट लोकटक झील सफाई के नाम पर हुई। इसके अलावा शिक्षक नियुक्ति, सड़क निर्माण, विश्वविद्यालय, मछुआरों के विस्थापन, पीडीएस, यातायात, सब्सिडी, बिजली और अर्बन क्षेत्रों में जमकर सरकारी पैसों की बंदरबांट की गई। ये सारे घोटाले लगभग 5 हजार करोड़ के हैं। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड और मिजोरम में जनता के पैसों को जमकर लूटा गया। पिछले तीन सालों में अरुणाचल प्रदेश में दोरजी खांडू सरकार ने 10 हजार करोड़ की ‘लूट’ की। ये लूट सब्सिडी ट्रांसपोर्ट स्कैम, हाइड्रो पावर स्कैम, एसजीआरवाई स्कैम, पीडीएस स्कैम, माइंस स्कैम, ड्रिंकिंग वाटर मिशन स्कैम, अर्बन डेवलपमेंट स्कैम, ग्राम सड़क योजना स्कैम, पीपीपी स्कैम, एमएलए हॉस्टल स्कैम और जमीन घोटाले के नाम दर्ज हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए खांडू ने प्रदेश में मंत्रियों, ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों को जमकर ‘लूट की छूट’ दे दी थी। हालांकि खांडू अब नहीं रहे, लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री को भी इस मसले से कोई मतलब नहीं है।

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