Friday, February 17, 2012

पार्टियों में लोकतंत्र नहीं : रामसुंदर दास

बिहार आगे बढ़ रहा है। नीतीश जी बहुत कुछ कर रहे हैं। बिहार विकास के रास्ते पर चल चुका है। इसमें सच्चाई भी है। लेकिन बिहार का ही एक बड़ा इलाका उत्तर बिहार आज भी अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है। लोकसभा में जदयू के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास से बिहार की हालत पर राजनीतिक संपादक ने बात की। पेश हैं प्रमुख अंश-

प्बिहार क्या कर रहा है?

बिहार विकास कर रहा है। आगे बढ़ रहा है। सरकार में शामिल पार्टियां बिहार को विकसित राज्य बनाने में लगी हैं। आपको दिखाई भी पड़ रहा होगा।

...और नीतीश जी क्या कर रहे हैं?

वे सरकार के मुखिया हैं। प्रदेश को विकास की राह पर लाने में लगे हैं। बिहार सरकार राज्य का सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास करने में लगी है। यह सरकार सामाजिक संरचना की तमाम सीढ़ियों को जोड़ने का काम कर रही है, बिना किसी को चोट पहुंचाए। सभी लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में लगे हैं नीतीश जी। सभी को जोड़कर बिहार को आगे ले जाना है।

सड़क के अलावा विकास के कौन से काम हुए हैं?

आपको दिखाई नहीं पड़ता क्या? हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। झारखंड बंटवारे के बाद बिहार को सिर्फ बालू और पानी मिला था। अब विकास से सब दंग हैं। शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में और रोजगार के क्षेत्र में भी काम हो रहे हैं।

लेकिन बिहार में कोई भी चीनी मिल अभी तक चालू नहीं हुई?

चीनी मिलें पहले ही मर गई थीं। अब चालू करने की बात हो रही है। काम चल रहा है। कई कठिनाइयां भी आती हैं।

लेकिन इसे चालू करने का प्रचार तो खूब हुआ?

कोई जादू की छड़ी तो है नहीं कि एक दिन में ही सब हो जाए? वक्त लगता है। सब होगा। इंतजार कीजिए।

रोजगार के और साधन क्या पनपे?

देखिए विकास के लिए शांति बहुत जरूरी है। बिहार में अब शांति है। आगे योजनाओं पर काम चल रहा है। बंद कारखाने को खोलना इतना आसान नहीं है। फिर भी सरकार लगी हुई है।

क्या उत्तर बिहार में कोई काम हुआ है?

सड़के बनी हैं। और काम भी हो रहे हैं। बिजली की कमी है, उसके लिए काम हो रहा है। केंद्र सरकार को भी मदद करने की जरूरत है। आप सीमांचल और मिथिलांचल में जाइए, उसको जिंदा रखने का काम चल रहा है। यह बात और है कि अभी कुछ ज्यादा काम मध्य बिहार में ही हुए हैं। उत्तर बिहार पर नजर रखने की जरूरत है और सरकार पूरे सूबे को एक नजर से देख रही है।

उत्तर बिहार के नेता क्षेत्रिय असमानता की बात कर रहे हैं?

कौन क्या कह रहा है, मैं नहीं जानता। लेकिन काम हुआ और हो भी रहा है। कई सालों का पिछड़ापन कुछ साल में कैसा दूर होगा? उत्तर बिहार में बाढ़ बड़ी समस्या है। नेपाल से बात करने की जरूरत है। लोग लगे हुए हैं। बाढ़ पर नियंत्रण हो गया, तो उत्तर बिहार चमक जाएगा।

बिहार में कोई नया मेडिकल, इंजीनियरिंग या अन्य कॉलेज नहीं खुले?

सरकार लगी हुई है। सब होगा। कई समस्याएं आती हैं। कहीं जमीन की बात है, तो कहीं कुछ और।

बिहार के अफसर बेलगाम हैं?

ऐसा नहीं है। उनको भी कानून के दायरे में ही काम करना होता है। पहले से माहौल बदला है, इसलिए लोग ऐसी बात कर रहे हैं।

आपकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भी चुनाव लड़ रही है?

हां। देखिए क्या होता है? हमें वहां कुछ लाभ होगा। कुछ लोग जीत सकते हैं। नीतीश जी और शरद जी काफी मेहनत भी कर रहे हैं। लड़ने वाला जीतने की बात करता ही है।

प्वर्तमान राजनीति पर आपकी राय?

सब बदल गया है। पहले राजनीति उसूलों पर चलती थी। अब ऐसा नहीं है। पहले विचार पर राजनीति चलती थी, अब पॉवर आधारित राजनीति हो गई है। जब उम्मीदवार ही ठीक नहीं होंगे, तो राजनीति कैसी होगी?

पार्टियों के भीतर लोकतंत्र है?

ऐसा अब नहीं है। किसी भी पार्टी के भीतर डेमोक्रेसी नहीं है। क्षेत्रीय पार्टियां नेशनल हो गई हैं। राजनीति मानव विकास के लिए और समाज को सुधारने के लिए हो, तब बात बने। जब पार्टी में ही लोकतंत्र नहीं है, तो राजनीति का रंग तो बदलेगा ही

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