Saturday, February 11, 2012

महापिछड़ों पर दांव

अखिलेश अखिल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का दूसरा और तीसरा चरण क्रमश: 11 और 15 फरवरी को होना तय है। पहले चरण के चुनाव में सभी दलों और उनके महाबलियों की प्रतिष्ठा जहां वोटिंग मशीनों में बंद हो चुकी है, वहीं अगले दोनों चरणों के चुनाव में पूर्वांचल की राजनीति करने वाले धुरंधर नेताओं की असली जमीन दिखाई पड़ने वाली है। दोनों चरणों के इस चुनाव में कुल 113 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं और इसमें बसपा, भाजपा, सपा के साथ ही कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। यह प्रतिष्ठा अखिलेश यादव की है, तो राहुल गांधी की भी।

मायावती के साथ-साथ सतीश मिश्रा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है, तो भाजपा के राजनाथ सिंह और कलराज मिश्रा की भी। इसके साथ ही पीस पार्टी से लेकर इत्तेहाद फ्रंट, कृष्णा और अनुप्रिया पटेल वाली ‘अपना दल’ से लेकर कल्याण सिंह की असली परीक्षा यहां होने जा रही है। पूर्वांचल की लड़Þाई लड़Þने वाले लोकमंच के नेता अमर सिंह की संभावित फसल पर भी लोगों की नजर है, क्योंकि चुनाव से पहले अमर सिंह भोजपुरी बोल बोलकर सभी दलों को जमींदोज करते रहे हैं। अमर सिंह को भी पता चल जाएगा कि उनकी बाल्टी का पानी कितने लोगों की प्यास बुझाने में सफल होता है। गाजीपुर के सत्येंद्र पांडेय कहते हैं कि ‘बाल्टी’ लेकर दौड़ते और हांफते अमर सिंह को इस चुनाव में अपनी औकात का पता चल जाएगा। सपा में जब तक थे, तब उन्हें लगता था कि उन्हीं की बदौलत सपा चल रही है, और वही पार्टी के कर्ताधर्ता हैं। अब बाल्टी लेकर दौड़ रहे हैं, लेकिन बाल्टी में कुछ हो तब न कोई उनके पीछे दौड़े? सबसे ज्यादा उन्हीं की इज्जत फंसी हुई है। लगता है चुनाव के बाद वे बीमार न पड़ जाएं।’

आपको बता दें कि लोकमंच का चुनाव चिन्ह बाल्टी है। इज्जत तो लोजपा चलाने वाले रामविलास पासवान, जदयू को हांकने वाले नीतीश और शरद यादव और तृणमूल व एनसीपी के दर्जनों अनाम नेताओं की भी फंसी हुई है, जो जातपात की लड़ाई वाली बहती गंगा में हाथ धोने निकले हुए हैं।

लेकिन इस चुनाव में जितने छोटे-बड़े, नए-पुराने और किस्म-किस्म की पार्टियां दंगल के लिए तैयार हैं, सभी ने महापिछड़ों पर दांव लगा दिया है। दूसरे और तीसरे चरण में होने जा रहे चुनाव में पिछड़ा बहुल इलाकों की संख्या सबसे ज्यादा है और यही वजह है कि इन दोनों चरणों के चुनाव में पिछड़ों को अपनी तरफ खींचने के लिए सभी दल हर तरह के तिल तिकड़म कर चुके हैं। जदयू के नेता शरद यादव पूर्वांचल के इन इलाकों में कहते फिर रहे हैं कि जदयू को जिताओ। बिहार की तरह यूपी को भी चमका दिया जाएगा। यूपी की सूरत बदल जाएगी और किसानों और बेकारों की हालत सुधर जाएगी।’ यह बात और है कि बिहार में नीतीश कुमार ने भरसक कई चीजें ठीक करने की कोशिश की है, लेकिन बेरोजगार और किसानों के लिए अभी कुछ भी नहीं हो पाया है। दरअसल, शरद यादव और नीतीश कुमार पूर्वांचल के इलाकों में कुर्मी, केवट, गड़रिया और यादव के वोट बैंक पर डाका डालने की फिराक में हैं। जदयू नेता को लगता है कि जो लोग सोने लाल की पार्टी, अपना दल से निकल कर उनकी पार्टी में आ गए हैं, उससे अपना दल का कुर्मी वोट उसके पक्ष में आ सकता है।

उधर, सपा यादव, लोध, गड़रिया, केवट और जाट पर निशाना साधे हुए है। मुलायम सिंह पहले हालांकि यादव और जाट वोट बैंक तक ही सीमित थे, लेकिन इस बार वह अपना दायरा बढ़ाकर कई अन्य पिछड़ी जातियों तक करने के फेर में हैं। इसके अलावा सपा की नजर 47 फसदी वाले उन अन्य पिछड़ी जातियों पर भी टिकी हुई है, जो छोटे-छोटे कई कुनबों में बंटे हुए हैं। अखिलेश यादव का मानना है कि उनकी पार्टी समाज के हर वर्ग को लेकर चलने में विश्वास करती है और सभी वर्गों का उन्हें समर्थन भी मिल रहा है। परिणाम आने के बाद पता चल जाएगा कि सूबे में असली पहुंच किस पार्टी की है और कौन कितने पानी में है। सूबे में 79 जातियों में से 37 जातियां अति पिछड़ी जातियों में हैं। कुल आबादी में इनका योगदान करीब 35 फीसदी के बराबर है।

भाजपा की राजनीति तो शुरू से ही पिछड़ों पर केंद्रित रही है। भाजपा की जितनी सरकारें सूबे में बनी हों, उसके पीछे पिछड़े वोट बैंक ही रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के अन्य वोट बैंक में अगड़ी जाति के ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य शामिल रहे हैं। प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 11 फीसदी और ठाकुरों की आबादी 9 फीसदी रही है। इनमें ठाकुरों के वोट में कई दफा सेंध तो लगती रही हैं और वे कई दलों में बंटते भी रहे हैं, लेकिन 4 फीसदी वैश्य वोट बैंक हमेशा भाजपा के साथ रहे हैं। पिछले चुनाव में भाजपा से ब्राह्मण और ठाकुर वोट तो बिदके ही, पिछड़ी जातियों में भी कई उपजातियों के वोट बैंक भाजपा से बिदक गए थे। इस बार उमा भारती को आगे लाने के पीछे का कारण भी वही पिछड़ी जाति के वोट बैंक को अपने खेमे में करने के लिए है। लोध समाज से आने वाली उमा भारती लोध के लगभग 5 फीसदी वोट बैंक पर कब्जा करने की कोशिश तो कर रही हैं, लेकिन कल्याण सिंह उसके रास्ते में सबसे बड़े अवरोधक के रूप में खड़े हैं। भाजपा का मानना है कि इस बार भले ही मीडिया में भाजपा कमजोर दिख रही है, लेकिन इतना तय है कि अन्य पिछड़ी जातियों में सबसे ज्यादा पहुंच इसी पार्टी की है और चुनाव में भी यह दिख जाएगा। लालजी टंडन कहते हैं कि हम भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दे के साथ चुनाव मैदान में हैं और हमें इसका लाभ भी मिलने जा रहा है। जहां तक जातिगत वोट का सवाल है, इस पर बहस करना ठीक नहीं है, लेकिन इतना आप जान जाएं कि भाजपा के पक्ष में सभी वर्गों का समर्थन है और चुनाव में यह दिखेगा भी।

अन्य पिछड़ी जातियों में कांग्रेस भी घुसपैठ करने की तैयारी में है। बेनी प्रसाद वर्मा और श्रीप्रकाश जायसवाल के जरिए कांग्रेस कुर्मी, लोध, गड़रिया और तेली व मोमिन के बीच अच्छी पकड़ बनाने की कोशिश में है। आपको बता दें कि जिस तरह से कांग्रेस ब्राह्मणों के बजाय दलित, पिछड़ी जातियां और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने का स्लोगन दिया है, जाहिर है कि ओबीसी का एक बड़ा धड़ा कांग्रेस के पाले में जाता दिख रहा है। और अगर ऐसा होता है, तो इसकी सबसे ज्यादा हानि भाजपा और बसपा को होगी।

विधान सभा सीटें -56

मेंडवाल, खलीलाबाद, घनघटा, फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महाराजगंज, पनियारा, कैपियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर ग्रामीण, गोरखपुर शहरी, सहजनवां, खजरी, चौरी चौरा, बांसगांव, चिल्लूपार, खाटा, पडरौना, टमकुही राज, कुशीनगर, हाटा, रामकोला, रूद्रपुर, देवरिया, पठारदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपुर रानी, सलेमपुर, बरहज, अतरौलिया, गोपालपुर, सागरी, मुबारकपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, फूलपुर पवई, दीदारगंज, लालगंज, मेहनगर, मधुबन घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ, बेलथरा रोड, रसेरा, सिकंदरपुर, फेफना, बलियानगर, बांसडीह, बैरिया, सैदपुर, गाजीपुर, जांगीपुर, जहूराबाद, मुहम्मदाबाद, जमानिया।

विधान सभा सीटें -57

जगदीशपुर, गौरीगंज, अमेठी, इसरौली, सुल्तानपुर, सदर, लंमुहा, कादीपुर, सिराठु, मनझानपुर, चैल, फाफौमा, सोराव, फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा, करछना, इलाहाबाद वेस्ट, इलाहाबाद नॉर्थ, इलाहाबाद साउथ, बाड़ा, कोराव, बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हानी, मुंगरा, बादशाहपुर, मछलीशहर, मरियाहु, जाफराबाद, केराकाट, मुगलसराय, सकलडिहा, सैयद रजा, चकिया, पिंड, अजगोरा, शिवपुर, रोहजिया, वाराणसी नॉर्थ, वाराणसी साउथ, वाराणसी कैंट, सेवापुरी, भदोही, ज्ञानपुर, औराई, छानवे, मिर्जापुर, मझावन, चुनार, मरिहान, घोटावल, राबटर््सगंज, ओबरा, दुद्धी।

यूपी में अति पिछड़ों की आबादी फीसदी में

यादव 19.4

गड़रिया 4.43

केवट 4.33

मोमिन 4़15

गड़रिया 4.43

कुर्मी 7.46

लोध 4.9

गड़रिया 4.43

केवट 4.33

मोमिन 4़15

तेली 4.03

जाट 3.60

अन्य 47.7

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