Sunday, June 17, 2012

युवा शक्ति जय हो



अखिलेश अखिल
अगर आप आईएएस न बनने से निराश हैं, तो घबराएं नहीं। केंद्र सरकार आप जैसे टैलेंटेड युवाओं के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। अगर आपके पास बेहतर आइडियाज के साथ गांवों में रहकर ग्रामीण विकास में अपनी भूमिका निभाने का शौक है, तो आप अपने ग्रामीण विकास से संबंधित आइडियाज को लेकर तैयार रहें। आपको मान सम्मान तो मिलेगा ही, कलेक्टर के बराबर आप  बेहतर वित्तीय राशि भी पाएंगे। देश के युवाओं के लिए केंद्र सरकार और योजना आयोग ग्रामीण विकास में युवाओं की भूमिका पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। योजना आयोग की सोच क्या है, इसकी चर्चा हम आगे करेंगे। पहले उन 156 युवाओं की चर्चा कर लें, जो 75 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर अगले महीने से देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में गांव की तकदीर बदलने के लिए तैनात हो रहे हैं।
केंद्र सरकार सौंप रही जिम्मेदारी : अगले महीने से देश के नौ राज्यों के 78 नक्सल प्रभावित जिलों के गांव में आप 25 से 30 साल के  ऐसे स्मार्ट और ग्रामीण विकास के नए आइडियाज से लैस युवा, युवतियों को लैपटॉप के साथ घूमते देख सकते हैं, जिन पर नक्सल प्रभावित गांवों में विकास की गंगा बहाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा  योजना आयोग और कपार्ट के सहयोग से देशभर से चुने गए साढेÞ आठ हजार युवाओं में से 156 युवक-युवतियां हैदराबाद में टाटा इंस्टीच्यूट आॅफ सोशल साइंस से ग्राम सभाओं से लेकर पंचायती राज व्यवस्था, पेसा कानून से लेकर गांव की समस्याओं पर दो माह का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके अलावा इन युवाओं को भारतीय संविधान, लोकतंत्र, पॉलिटिकल सिस्टम, केंद्र सरकार की तमाम ग्रामीण योजनाओं, बजट विश्लेषण, ग्रामीण योजना, संचार व्यवस्था से लेकर लीडरशिप का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सरकार की सोच है कि देश के ये टैलेंटेड युवा स्थानीय स्तर पर कलेक्टर के साथ मिलकर नक्सली इलाकों में चल रहे इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान को मूर्त रूप दे सकें। साथ ही उन इलाकों के गरीबों, आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ सकें।
देश को मिलेगा आइडियाज का फायदा : केंद्र सरकार और खासकर ग्रामीण विकास मंत्रालय को उम्मीद है कि देश के ये 156 मेधा गांवों की तकदीर बदलेंगे और नक्सलियों के इलाके में रह कर स्थानीय लोगों के विकास की सही तस्वीर सरकार के सामने लाएंगे। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश कहते हैं कि प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फैलोशिप के तहत देशभर से चुने गए ये 156 युवा, प्रशिक्षण के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थानीय इकाई और महिला स्वयं सहायता गु्रप के साथ मिलकर काम करेंगे और सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे। ये प्रशिक्षित युवा सीधे जिला कलेक्टर और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से जुड़े होंगे। युवा केंद्र सरकार के एजेंट नहीं होंगे। यह दीगर है कि इनका काम आसान नहीं है, लेकिन इनकी क्षमता और आइडियाज का फायदा देश को मिलेगा। ये ऐसे युवा हैं, जिनके पास ग्रामीण विकास के नए-नए आइडियाज तो हैं ही, ग्रामीण इलाकों में चुनौतीपूर्ण स्थितियों में काम करने का भी माद्दा है।’
युवाओं को मिलेगा मोटा पैकेज : दरअसल, पिछले साल ग्रामीण विकास मंत्रालय ने योजना आयोग के साथ मिलकर नक्सली इलाकों को कैसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और विकास के दम पर कैसे नक्सलवाद पर काबू पाया जाए आदि सवालों को लेकर प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फैलोशिप की स्थापना की थी। इस योजना को ‘पीएमआरडीएफ’ भी कहते हैं। इस योजना के तहत उन तमाम युवा प्रोफेशनल्स से आवेदन मांगे गए थे, जिनके पास ग्रामीण विकास को लेकर नवीन आइडियाज हों। ग्रामीण इलाकों में काम करने की प्रबल इच्छा भी हो। इसके लिए सरकार की ओर से ऐसे युवाओं को 75,000 रुपये प्रतिमाह देने की बात कही गई है। इन युवाओं को ग्रामीण इलाकों में दो साल तक काम करने के बाद टीआईएसएस की तरफ से डिप्लोमा या डिग्री भी देने की बात है। केंद्र सरकार ने अब तक नौ राज्यों, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और झारखंड के 78 जिलों को नक्सल प्रभावित जिला घोषित किया है।
गांवों की तरफ होगा रूझान : ‘पीएमआरडीएफ’ योजना के तहत सरकार हर जिले में दो प्रशिक्षित युवाओं को उतारेगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी कहते हैं कि हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि देश के युवा बेहतर काम तो चाहते हैं, लेकिन वे गांवों में नहीं जाना चाहते। यही वजह है कि इस योजना के तहत सरकार प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर वित्तीय लाभ दे रही है। निश्चित तौर पर यह वित्तीय लाभ देश के युवाओं को ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। अभी हमें 156 युवाओं की ‘पीएमआरडीएफ’ के लिए तलाश थी। जब इसके लिए आवेदन मांगे गए, तो 8560 आवेदन आ गए। ये एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली युवाओं के आवेदन थे। इनमें से 816 आवेदनों को शार्ट लिस्ट किया गया। इसके बाद फिर इनमें से 156 युवाओं को चुना गया है। ये सभी युवा गांवों में काम करने को उत्सुक हैं।’
आंध्र ने तय की एक करोड़ की राशि : योजना शुरू करने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय की सोच है कि देश के बेहतर इनोवेटिव और   टैलेंटेड युवाओं को ग्रामीण योजनाओं से जोड़कर योजना की सफलता तो मिलेगी ही, साथ ही जो युवा प्रशासनिक सेवा में जाने से वंचित रह जाते हैं, उन्हें इन योजनाओं से जोड़कर उनकी बेरोजगारी भी कम की जा सकती है। सरकार की यह महती योजना कितनी कारगर साबित होती है, ये तो आने वाले कुछ माह में देखने को मिलेगा, लेकिन योजना आयोग इस ‘पीएमआरडीएफ’ योजना को ग्रामीण इलाकों में केंद्र सरकार की चल रही अन्य योजनाओं में भी लागू करने की तैयारी में है। इस योजना से उत्साहित होकर आंध्र प्रदेश सरकार ने बेहतर आइडिया वाले युवाओं के लिए एक करोड़ की राशि भी तय कर दी है। इस राशि का लाभ उन युवाओं को दिया जाएगा, जो ग्रामीण इलाकों में कुछ नया करने के लिए तैयार हैं।
नहीं रहेगी रोजगार की कमी : 12वीं पंचवर्षीय योजना में गांवों के विकास पर काफी ध्यान देने की बात कही गई है। इसके साथ ही रोजगार निर्माण को लेकर भी सरकार कई तरह की योजनाओं पर काम कर रही है। योजना आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि 12 वीं योजना हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। हम ग्रामीण इलाकों में टैलेंंटेड युवाओं का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? हमारा सारा फोकस इसी पर है। ग्रामीण इलाकों में काम के काफी अवसर भी हैं और समस्याएं भी। इन युवाओं के जरिए समस्याएं कैसे खत्म की जाएं, हम इस ओर ध्याान दे रहे हैं। गांवों में योजना बनाने की जानकारी लोगों के पास नहीं होती। ऐसे युवक वहां बेहतर काम कर सकते हैं। हमने कई अन्य मंत्रालयों के कार्यों में भी ग्रामीण स्तर पर युवाओं की सेवा लेने के लिए प्रधानमंत्री के पास पत्र भेजा है। अगर वे स्वीकार हो जाते हैं, तो देश के टैलेंटेड युवाओं के लिए रोजगार की कमी नहीं रहेगी।

156 युवाओं में 40 महिलाएं
अगले महीने से देश के तमाम नक्सली इलाकों में इन युवाओं की तैनाती होगी। सरकार को उम्मीद है कि तैनाती के तीन माह के भीतर इसके परिणाम भी सामने आने लगेंगे। जो 156 युवा अपने प्रशिक्षण को अंतिम रूप दे रहे हैं, उन्हीं में एक हैं लखनऊ की अन्नू सिंह। 25 वर्षीय अन्नू सोशल साइंस से एमए हैं। उनके पास ग्रामीण विकास की कई योजनाएं हैं। उनका कहना है कि वे अपनी बेहतर सोच, समाज को देना चाहती हैं, ताकि वे अपनी समस्या को समझ सकें। समस्या को लेकर आवाज उठा सकें। प्रशिक्षण पा रहे कुल 156 युवाओं में 40 महिलाएं हैं, जबकि शेष 114 पुरुष हैं। इन्हीं 40 महिलाओं में रायगढ़ की नीरजा कुदरीमोती भी हैं, जो गांवों में काम करने को लेकर खास तौर पर उत्सुक हैं। डॉक्टर की बेटी नीरजा कहती हैं कि यदि उसके प्रयास से गांव के लोगों का कुछ भला होता है, तो वह धन्य हो जाएंगी। औरंगाबाद, महाराष्ट्र के प्रेषित अंबाडे भी हेल्थ एडमीनिस्ट्रेशन से एमए हैं। इस योजना के बारे में उनका कहना है कि भारत के गांवों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ करने के लिए मेरे पास बहुत कुछ है। इस योजना से हमें गांवों में काम करने का जो अनुभव होगा, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हम अपने अनुभव का पूरा लाभ गांव को देने के लिए तैयार हैं। ग्रामीण इलाकों में तैनात होने जा रहे देश के इन बेहतर इनोवेटिव युवाओं को सीधे जिला कलेक्टर को अपनी मासिक और वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी। ये युवा जिला कलेक्टर के प्रति जिम्मेदार होंगे।

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