Monday, October 21, 2013

प्रधानमंत्री के नाम जनता की पाती

   अखिलेश अखिल 


आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
           सादर प्रणाम ।
कई साल से हम आपको पाती लिखने की सोंच पहे थे लेकिन जिंदगी की भागदौर में कभी फुर्सत ही नहीं मिल रही थी। पिछले दिन हम अपने को रोक न सके। सोंचा अगर अब भी आप को पाती नहीं लिखा तो फिर आप आगामी चुनाव को देखते हुए हमारे लिए कुछ और बोल देंगे। आप कुछ नहीं बोले इसलिए हम यह पाती आपको लिख रहे हैं। हमें पता है कि आगामी महीनों में कई राज्यों में चुनाव होने हैं और फिर लोक सभा चुनाव हैं। जाहिर है आप फिर हमें ललचाने के लिए  हमारे सामने कुछ चारा जरूर फेंकेंगे। लेकिन अब हमें चारा की बरसात नहीं चाहिए। हमें अपना हक चाहिए जो अभी तक नहीं मिला है।  अगर आपके लोगों ने यह कह दिया है कि हम सब लोग खुश है तो यह आपकी नाकामी है। सरकार को अपना जासूस इमानदार रखना चाहिए ताकि जनता कि सही तस्वीर आपके सामने रख सके। लेकिन आपके तमाम जासूस और अमले महा मक्कार और झूठे हैं। आपकी कोई भी योजना सही तरीके से हमारे पास नहीं पहुंची है। इसलिए गुजारिश है  कि इस बार हमारे लिए कोई नया चारा नहीं फेंके।
      हे प्रधानमंत्री जी !  सुना था कि आप बड़े अर्थशस्त्री हैं।  अखवारों में भी पढा था। देश को सुधारने और हम गरीबों की हालत ठीक करने का आपने ऐलान किया था। लेकिन हुआ कुछ नहीं। आप गलत है या फिर आपका अर्थशास्त्र गलत है इसके बारे में हम मूर्ख लोग क्या जाने।  जो लोग अपने वादे पर खड़ा नहीं उतरते उसके बारे में हमारे गांव देहात में झूठा और लुच्चा कहा जाता है। लेकिन यह हम आपको कैसे कह सकते है।  हम आप ही के देश के वह साधरण नागरिक हैं जिसके कल्याण के लिए आपकी सरकार पिछले 9 साल से तरह तरह की योजनाएं बनाती फिर रही है। संभव है कि सारी योजनाओं की सूची आपके पास भी नहीं होगी। हम गरीब गुरबा लोग पिछले 9 साल से आपको लाल कीला के प्राचीर से भाषण देते भी देख सुन रहे है। हर बार आप कुछ न कुछ हम गरीबों के कल्याण के लिए  घोषणा भी करते रहे हैं। बड़ा अच्छा लगता है जब आप लाल कीला के प्राचीर से हमलोगों के लिए कुछ बोलते है। आपकी आवाज सुनकर और दूसरे दिन आपकी घोषणा को अखवारों में पढकर हमारी जनानी और बाल बच्चा सब फूले नहीं समाते। कहते हैं कि अब फिर कुछ मिलेगा। हमारी दिन दुनिया बदल जाएगी। आप जितनी रकम की घोषणा करते हैं उस रकम को उंगली  और कागजों पर  गिनने में ही हमारे कई रोज बित जाते हैं। लेकिन सच्चाई क्या है कभी आपने जाना तक नहीं। आप कभी हमारे गांव आते तो भर मन आपसे बात करते और आपकी योजना की सच्चाई आपके सामने रख देते।
          हे प्रधानमंत्री जी, हमें आपसे बहुत शिकायत है। सारी शिकायतें आपके पास रख दूं तो आपकी नींद भी हराम हो जाएगी। जो हम नहीं चाहते। आप जी भर कर सोए ताकि अगले दिन बिना थके  चर्चा भाषण में भाग ले सके। कहते हैं कि जब किसी देश का राजा जनता को खुश नहीं रख सकता तो उसकी सारी नीति बेकार हाती है। और वह नरक का बासी बनता हैं। लेकिन आप नरक में जाए ऐसा हम सोंच भी नहीं सकते। लेकिन एक सवाल मन में खटक रहा है कि  जब हम लोग खुश ही नहीं है तो आप दिन भर क्या करते है। और जो आप करते हैं उसमें हमलोग कहां हैं?  हमारी अपनी बेवसी तो है ही  , सुनते हैं कि अब आपने अपने सरहदों को भी कमजोर कर दिया है। सुना है कि हमारा पड़ोसी देश आए दिन हमारी जमीन पर आ धमकते हैं और हमारे जवानों को मार गिराते है। आप कैसे प्रधानमंत्री है जो चुप्पी मारे सब सह रहे है। क्या महात्मा गांधी के राह पर आप चल रहे हैं? लेकिन गांधी जी जो बोलते थे वही करते थे। आज की राजनीति तो झूठ पर ही आधारित है। फिर सीमा की रक्षा करना तो हर देश का कर्तब्य है। जो राजा अपने सीमा को बांध कर नहीं रखता इतिहास उसको गाली देता है। जो अपने भूमि और अपनी संतान का रक्षा नहीं कर पाता उसे नरक में भी जगह नहीं मिलती । ऐसा ही अपने धर्म शास्त्र में कहा गया है। हम गरीब लोग चाहते हैं कि भले ही हमारे लिए योजना न चलाए लेकिन अपनी भारत माता की आन तो आप कम नहीं होने दे । हम गरीब लोग बड़े संतोषी होते है। थोड़े में ही हम खुश हो जाते हैं  और थोड़े में ही अपना सब कुछ हम दूसरे को दे देते है।  अभी तक तो हम थोड़ा पाकर ही आपको राजा की कुर्सी पर बैठाते रहे है। लेकिन आपने कुछ ठीक नहीं किया।  न हमारी दशा बदली और न ही देश सुरक्षित हुआ।अगर आपने देश की सीमा को सुरक्षित नहीं किया तो हम इस बार आपको वोट नहीं देंगे। इसे आप याद कीजिएगा।
     प्रधानमंत्री जी, एक बार आप हमारे गांव आइए। आपको बड़ा मजा आएगा। पुराने जमाने में जब राजा महराजाओं का जमाना था तो राजा भेष बदलकर जनता का हाल जानने गांव जवार और प्रजा का हाल जानते थे । अपने सेनाओं और मंत्रियों की करतूत जानते थे। अपने हुक्म की तामील का सही जाएजा लेते थे। लेकिन आप तो गांव जाते ही नहीं है। आपकी तमाम योजनाएं गांव के लिए बनती है लेकिन जनता का सही हाल आप जानते ही नहीं है। क्या आपको हमारी सही हालत की कोई जानकारी है? आपके अमले जो आपको बता देते हैं उसे ही आप मान लेते है। सुना है कि आपने गरीबी की एक नई परिभाषा गढी है। एक बार आप गांव आए तो तो गरीबी की सही परिभाषा हम आपको बता देंगे। अपने अमले के लिए आपने शहरों में हर तरह की सुविधा दे रखी है लेकिन वह सुविधा आप हमें नहीं देते। आपको वोट हम देते हैं और सुविधा अमले को देते है। आपके अमले बाढ सुखार के दिनों में आपके द्वारा भेजी गई सारी रकम खा जाते हैं और जब हम इसकी मांग करते हैं तो हमें भीखमंगे की तरह भगाा दिया जाते है। हम पर लाठी गोली चलवा दी जाती है और केस मुकदमा में फंसा कर नक्सली कह दिया जाता है।
       सुना है कि आपने सभी गांवों को विजली पहुंचाने का ऐलान कर रखा हैं । सब गांवों को सड़क से जोड़ने की योजना बना रखी है। लेकिन आपकी योजना तो कही दिखती ही नहीं। अभी भी हमारे हजारों गांव विजली का दर्शन नहीं किया है। रात के अंधेरे में हमारे गांव में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत सांप काटने से हो जाती है। बाढ के दिनों में पेड़ की टहनियों पर चढकर जब हम शौच करते हैं तो पेड़ पर बैठा सांप हमारे बाल बच्चों को काट लेता है। हमारे कई गांव जहरीला पानी पीने को अभिशप्त हैं । आप कहते हैं कि हर गांव को पीने का पानी दिया जा रहा है लेकिन आपका पानी अभी तक हमारे गांव में नहीं पहुंचा है। भले ही आप बिसलेरी पानी पीते हों लेकिन हमें धरती के नीचे का साफ पानी ही देते तो हमारी आत्मा आपको बहुत दुआ देती।
प्रधानमंत्री जी, हम अपनी परेशानी आपको कितना कहें। आपके शासन के जिने मुखिया सरपंच है सब लूटेरे है। एक तो खुद चोरी करते हैं जब कोई सवाल करो तो मुकदमे में फंसा देते है। गांव के अधिकतर लोग आज कल मुकदमें में फंसे हैं और परेशान है। कोई ऐसा उपाय क्यों नहीं करते कि मुकदमें की सुनवाई तुरंत हो जाए। अपनी मेहनत से जो हम कमाते हैं उसका बड़ा हिस्सा कचहरी की भेंट चढ जाती है। पहले सुनते थे की आपके दिल्ली में ही दलालों की भीड़ है। दलाली के कई किस्से हमलोग पिछले कई साल से पढते सुनते रहे है। यह भी सुना कि सभी नेता दलाल पालते हैं और उन्हीं के जरिए माल कमाते है। यह भी सुना था कि सरकार अब दलालों को भी दलाली करने के लाइसेंस देगी। आपने लाइसेंस दिया की नहीं इसकी जानकारी हमें नहीं मिली है।  लेकिन अब हमारे गांव में भी दलाल पहुंच गए है। जो लोग पहले दिल्ली और अन्य शहरों में बेटा मोटा काम करते थे अब गांव में सरकारी अमले और मुखिया सरपंच से मिलकर दलाली करते है। हमें लूटते हैं।  दलाली की कुछ जानकारी गांव के लोग भी समझ रहे है। अगर आप लाइसेंस दे तो हम लोगन भी मजूरी छोड़कर इसमें भागय आजमाऐं।
       प्रधानमंत्री जी, हमारी कुछ बाते आपको अच्छा नहीं लगता होगा लेकिन हम क्या करें? देश की जनता को अब आप पर यकीन नही रहा । हमारी यकीन आप में तभी होगी जब आप एक बार हमारे गांव आए। आखिर आप गांव में जाने से कतराते क्यों है? जब आपने सभी गांवों को खुशहाल बना ही दिया है तो शहर से गांव आने में आपको परेशानी क्या है? हमारें गांव में खतरनाक बीमारी से किस तरह लोग जुझ रहे हैं और पैसे और सुविधा के अभाव में कैसे हमारी जान जा रही है एक बार जरूर देखने आए। यही आपका पयर्टन होगा और यही तीर्थाटन भी।
         आपका ही
         पूरा देशवासी

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