Tuesday, November 5, 2013

राजनीति के चाणक्य

महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का सारथी बनकर लोगों को बता दिया था कि जंग के मैदान में सिर्फ योद्धा ही महत्वपूर्ण नहीं होते हैं। मौजूदा राजनीति में राहुल गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी, शीला दीक्षित से लेकर रमन सिंह  या फिर हेमंत सोरेन जैसे नए-नवेले मुख्यमंत्री के सारथी कौन हैं? 
  अब पहले वाली राजनीति नहीं रही। पहले नेताओं के इशारे पर जनता नर्तन करती थी। नेता का फरमान जनता के लिए आदेश होता था। असली नेता हो या नकली, मूर्ख नेता हों या तिकड़मबाज, जनता इनके इशारे पर नाचती थी। नेता के मुंह से निकले शब्दों को जनता भगवान का शब्द मानती थी। चाहे डर से या फिर इज्जत से। सम्मान से या लोभ लालच से। आजादी के बाद की राजनीति जनता के लिए हो रही थी। फिर 60 के दशक से शुरू हुई राजनीति जनता के सरोकार से विमुख हो गई और राजनीति में बहुत सारे ऐसे लोगों का पदार्पण हुआ, जो अपराध की दुनिया से जुड़े हुए थे। बड़े स्तर पर असामाजिक तत्व राजनीति करने लगे। जो लोग पहले सम्मान से नेता का समर्थन कर रहे थे, वही लोग अब भय से नेता के सामने गिड़गिड़ाने लगे। 90 के बाद हालात बदले। देश की नीति बदली, तो राजनीति भी बदली। आपराधिक राजनीति पर लगाम लगाने की बात उठने लगी। नई आर्थिक नीति की वजह से कॉरपोरेट कल्चर देश में उभरा। पहले के किसान टाइप के नेता झक्कास कपड़ों में सामने आने लगे। पार्टी दफ्तरों की काया बदली। राजनीतिक दफ्तर कॉरपोरेट आॅफिस के माफिक दिखने लगे। यकीन न हो तो गरीब, गुरुबा और आम आदमी की बात करने वाली तमाम पार्टियों के दफ्तर घूम आइए, सब पता चल जाएगा। भ्रम टूट जाएगा। कहने का आशय यह है कि न तो अब पहले वाली राजनीति रही और न ही पहले वाले नेता और जनता। 70 और 80 के दशक में पीएन हक्सर, शारदा प्रसाद, आरके धवन और एमएल फोतेदार जैसे नेताओं की तूती बोलती थी। ये नेता आपने बॉस के आंख और कान होते थे। इन्हें मालूम था कि उनके बॉस क्या चाहते हैं और क्या पसंद करते हैं। अपने बॉस को खुश करने के लिए ये लोग कोई भी रणनीति बना देते थे। 
        वह जमाना अब लद गया है। पहले के नेता जनता के सामने जो बोलते थे, वह उनकी वाणी होती थी और उनके ही शब्द। कपड़े भी उनके अपने ही थे। बोलने चालने और चलने का उनका अपना देशी या शहरी अंदाज था। प्रचार के माध्यम झंडे, बैनर और पोस्टर तक ही सीमित थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सब बदल गए हैं। अब नेता जो शब्द बोल रहे हैं, वे उनके अपने नहीं हैं। नेताओं को क्या पहनना है, कैसे चलना है और किस तकनीक के साथ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना है? यह सब पर्दे के पीछे के लोग कर रहे हैं। पर्दे के पीछे बैठे ये लोग बहुत कम ही जनता के सामने प्रकट होते हैं। वे अपने दिमागी ताकत और तकनीक के जरिये नेता के साथ ही सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में माहिर हैं। कहने के लिए ये पर्दे के पीछे के लोग भले ही देशी हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर विदेशी शिक्षा से लैश हैं। इनका दिमाग नेताओं से ज्यादा तेज चलता है और इनकी हर रणनीति विरोधियों को मात देने की होती है। ये देश का मिजाज समझ रहे हैं और आज की फैशन परस्त जनता की अच्छाइयों और बुराइयों की नब्ज को समझ रहे हैं। वार पर वार करने की कला में ये माहिर हैं और सामने वाले के तर्कों को काटने बेदम करने का हर इंतजाम भी इनके पास हैं। आप कह सकते हैं कि पर्दे के पीछे की असली राजनीति यही कर रहे हैं। आप इन्हें आधुनिक चाणक्य भी कह सकते हैं। आइए पर्दे के पीछे के कुछ लोगों से आपको परिचय कराएं, जो कई नेताओं से लेकर पार्टियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
         ये हैं हिमांशु शेखर चौधरी। झारखंड के युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राजनीतिक सलाहकार। मुख्यमंत्री भी युवा और सलाहकार भी युवा। दोनों की केमिस्ट्री में बेहतर तालमेल। पिछले एक दशक से हिमांशु झामुमो की राजनीति को देख और समझ रहे हैं। झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले हिमांशु दिल्ली विश्वविद्यालय की उपज हैं। दिल्ली आए थे, आईएएस बनने। बन गए पत्रकार। दिल्ली में दो दशक तक विभिन्न अखबारों और टीवी चैनलों में गंभीर पत्रकारिता की। देश व समाज के साथ राजनीति को नजदीक से देखा और समझा। हिमांशु देखने में सीधे-सादे लगते हैं, लेकिन विचारों से  आधुनिक हैं और आधुनिक तकनीक के माहिर भी। उत्तर से दक्षिण तक की राजनीति की बेहतर समझ रखते हैं और बिहार व झारखंड की राजनीति, वहां के लोग, वहां की भाषा, वहां की समस्याओं के साथ ही वहां के गुणा-भाग को अपनी उंगलियों पर तय करते रहे हंै। 
         हिमांशु आज हेमंत सोरेन के राजनीतिक सलाहकार हैं। पार्टी की भविष्य की राजनीति क्या हो और सरकार आमजनों तक कैसे पहुंचे? इस पर चौधरी साहब काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का भाषण कैसा हो और उस भाषण में प्रदेश की जनता कहां है, इसकी बारीकी चौधरी साहब देखते हैं। प्रदेश में योजनाएं जनता तक कैसे पहुंचे और उन योजनाओं से लोग कैसे रूबरू हों, इसकी पूरी प्लानिंग हिमांशु करते हैं। हिमांशु चौधरी कहते हैं कि वर्तमान समय में लोगों का मिजाज बदल गया है। राजनीति पहले से ज्यादा गंभीर और कठिन है। हमें राजनीति से मतलब नहीं है। 
  हमारा सरोकार सिर्फ मुख्यमंत्री को राजनीतिक मसलों पर राय देने तक है। उस राय में झामुमो की राजनीति के साथ ही बेहतर प्रशासन और बेहतर सरकार की बातें होती हैं। हम आगे की कई योजनाओं पर भी काम कर रहे हैं, ताकि आगामी चुनाव में पार्टी और सरकार को जनता तक पहुंचा सके। हमारा अगला काम झामुमो को आधुनिक पार्टी बनाने से लेकर जनता की उम्मीदों पर सरकार कैसे उतरे, इस पर चल रहा है। आप कह सकते हैं कि हिमांशु अकेले वॉररूम की तरह काम कर रहे हैं।
  पवन खेड़ा को भला दिल्ली की राजनीति में कौन नहीं जानता। दिल्ली प्रदेश की राजनीति पवन खेड़ा के इशारों पर नाचती है। पवन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव हैं। दिल्ली के कांग्रेसी खेड़ा को छोटा अहमद पटेल कहने से बाज नहीं आते। शीला दीक्षित की पूरी राजनीति, रणनीति और लोगों की भावनीति का पूरा लेखा-जोखा पवन के पास ही होता है। मुंबई में जन्मे और दिल्ली में पढेÞ पवन के शुरुआती दिन राजस्थान में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बीते हैं। 1998 में पवन की मुलाकात संदीप दीक्षित से हुई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। पवन खेड़ा शीला दीक्षित की राजनीति को तो आगे बढ़ाते ही हैं, प्रदेश के तमाम कांग्रेसी नेताओं की हरकत पर भी नजर रखते हैं। प्रदेश की एक-एक राजनीति की जितनी खबर पवन रखते हैं, उतनी जानकारी अन्य नेताओं के पास नहीं होती। सरकार की किन योजनाओं के बारे में जनता को कब जानकारी देनी है और सोशल साइट पर कब क्या भेजना है? इसकी पूरी जानकारी पवन रखते हैं। राजनीतिक, सामाजिक परिस्थितियों और लोगों के मनोभाव को बेहतर तरीके से समझने वाले पवन किताबों के शौकीन हैं और दफ्तर में अपना अधिक समय पढ़ने में ही लगाते हैं। मौजूदा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत क्या होगी और शीला दीक्षित की जमीनी हालत क्या है? इस पर उनकी पैनी नजर है।
     राजनीति के बदलते मिजाज को देखते हुए आजकल आधुनिक तकनीक के जरिये जनता तक पहुंचने में नरेंद्र मोदी सबसे आगे हैं। नरेंद्र मोदी जो बोल रहे हैं, जो पहन रहे हैं और जिस अंदाज का सहारा ले रहे हैं, उसमें मोदी का अपना कुछ भी नहीं है। मोदी को इस तरह बदलने वाली पूरी टीम खड़ी है। इस टीम में दर्जन भर युवा लोग हैं, जिन्हें राजनीति की समझ भले न हो, लेकिन बाजार को वे बेहतर समझते हैं और आज युवा पीढ़ी क्या चाहती हैं और क्या पसंद करती है? इसकी बेहतर समझ है इस टीम को। इसी टीम के एक सदस्य हैं यश गांधी। दून स्कूल, सेंट स्टीफन और आॅक्सफोर्ड से पढेÞ यश गांधी मोदी के मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठते हैं। यश के जिम्मे मोदी को प्रमोट करने की जिम्मेदारी है। इसके लिए यश सबसे ज्यादा देश में घट रही तमाम राजनीतिक घटनाओं पर पैनी नजर रखते हैं और मोदी को अपडेट करते हैं। यश कहते हैं किउनकी नजर खास घटनाओं के अलावा कुछ खास मेल पर होती है और उन घटनाओं को कैसे विश्लेषण किया जाए, इस पर काम करना होता है। यश ब्रांड मोदी के सबसे बडेÞ कलाकार हैं। यश की टीम में दर्जन भर से ज्यादा प्रोफेशनल्स, विद्वान और आईटी के जानकार हैं। यश, मोदी और पार्टी को कैसे प्रमोट करें, इस पर ज्यादा समय देते हैं। सोशल मीडिया में क्या कहना है? इसकी जिम्मेदारी इन्हीं के ऊपर होती है।
         छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह की पूरी ब्रांडिंग की जिम्मेदारी अमन कुमार सिंह पर हैं। अमन सिंह वैसे तो आईआरएस अधिकारी हैं, लेकिन उनकी समझ राजनीति में ज्यादा है। अपने को अब प्रोफेशनल्स मानते हुए अमन सिंह कहते हैं कि एक क्रिकेट टीम और राजनीति में कोई खास अंतर नहीं है। ये दोनों ऐसे फील्ड हैं, जहां टीम मैनेजमेंट और तकनीक की जरूरत पड़ती है। 2010 में अमन सिंह सरकारी नौकरी छोड़कर रमण सिंह के साथ है और मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश के नौकरशाह अमन को मुख्यमंत्री का आंख और कान कह कर संबोधित करते हैं।
       राहुल गांधी कनिष्क सिंह के बगैर रह नहीं सकते। राजनीति करने वाले कई लोगों की नजरों में कनिष्क के बारे में न जाने क्या-क्या कहा जाता है कि लेकिन सच्चाई यह है कि राहुल की पूरी राजनीति कनिष्क की तैयारी के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। 12 तुगलक लेन पर राहुल गांधी का कार्यालय है। कनिष्क सिंह यहीं बैठते हैं। डिप्लोमैटिक परिवार से आने वाले कनिष्क की दिनचर्या राहुल से मिलने वाले लोगों की जानकारी इकट्ठा करने से लेकर उसके बारे में राहुल को जानकारी देने से शुरू होती है। कनिष्क पर्दे के पीदे से काम करते हैं और कह सकते हैं कि देश पूरी राजनीति पर नजर भी रखते हैं। राहुल को तमाम तरह की खबरों से अपडेट रखना और आगे कहां जाना है और किसके साथ जाना है, इसकी पूरी तैयारी सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर करते हैं। कनिष्क की नजरें केवल राजनीति पर ही नहीं होती, पार्टी को कहां से फंड आना है, संसदीय क्षेत्र की राजनीति कैसी चल रही है और देश के किस कोने में कौन-सी घटना घट रही है और सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और चैनलों में क्या कुछ चल रहा है? सबकी जानकारी रखते हैं। कांग्रेस का थिंकटैंक 15 गुरुद्वारा रोड पर स्थित है। इसे कांग्रेस का वॉररूम भी कहा जाता है। इस वॉररूम से कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जुड़े हैं और पल-पल की जानकारी सोनिया से लेकर राहुल और प्रधानमंत्री तक दी जाती है। कनिष्क सिंह भी इस वॉररूम के एक सदस्य है, कनिष्क राहुल के सबसे विश्वासपात्र साथी हैं और राजनीतिक सारथी भी।
       आप ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के कृषि भवन स्थित कार्यालय में जाएंगे, तो दो युवा अक्सर दौड़ते हुए आपको मिल जाएंगे। ये दोनों युवा जयराम को मंत्रालय से संबंधित तमाम इनपुट मुहैया कराते हैं। जयराम इन्हीं के दम पर आगे की रणनीति बनाते हैं और राजनीति भी करते हैं। ये दो युवा हैं वरद पांडे और मोहम्मद अली खान। दोनों मंत्रीजी के ओएसडी हैं। देश के गांवों में क्या होना चाहिए और गांव कैसे आगे बढेÞे, इस पर ये दोनों युवा काम करते हैं। ड्राफ्ट बिल बनाने से लेकर मंत्री महोदय को संसद में क्या जवाब देने हैं? इसका पूरा शोध यही तैयार करते हैं। पत्रकारों के बीच क्या कहना है और आगे किस इलाके की यात्रा करनी है? इसकी पूरी जानकारी इन्हीं दो लोगों पर होती है। हार्वार्ड में पढेÞ पांडे और कोलकाता के नेशनल यूनिवर्सिटी से निकले खान जयराम रमेश के आंख कान तो हैं ही, ग्रामीण विकास के एक पैरोकार भी हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सेवा ले रहे हैं। एक जानकरी यह भी आ रही है कि आगामी चुनाव को देखते हुए रामबिलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान और लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी भी पार्टी को हाईटेक करने की तैयारी में जुटे हैं।

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