Thursday, December 19, 2013

11 सांसद बेनकाब

कभी सवाल पूछने के लिए पैसा, तो कभी लॉबिंग के लिए पैसा, हमारे सांसदों को हर काम के लिए पैसा चाहिए। आप पैसे के बल पर इनसे कोई भी अनैतिक कार्य करवा सकते हैं। 11 सांसदों के इसी चेहरे को बेनकाब किया है कोबरापोस्ट ने... 

भ्रष्टाचार को लेकर देश में राजनीति तो खूब हो रही है, लेकिन भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। भ्रष्टाचार के मसले पर ही अभी हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई है, लेकिन इस भ्रष्टाचार से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। देश में राजनीति और राजनेता का स्तर किस हद तक गिर रहा है, इसका एक बड़ा उदाहरण खोजी पत्रकारिता के लिए जानी जाने वाली वेबसाइट कोबरापोस्ट ने पेश किया है। पैसों के लिए देश के नेता और सांसद किस तरह लालायित रहते हंै और कुछ भी करने के लिए अपने को कैसे दांव पर लगा सकते हैं, इसका नमूना कोबरापोस्ट ने देश के सामने रखा है। कोबरापोस्ट ने खुलासा किया है कि एक फर्जी विदेशी तेल कंपनी के लिए 11 सांसद पैसा लेकर किस तरह चिट्ठी लिखने को तैयार थे।
     अपने एक साल के अभियान के बाद कोबरापोस्ट ने 11 सांसदों को अपने खुफिया कैमरे में कैद कर लिया है। ये सांसद लगभग सभी प्रमुख दलों से जुड़े हैं। इसमें भाजपा, कांग्रेस, बसपा, जदयू और एआईएडीएमके के सांसद शामिल हैं। इन्होंने एक फर्जी आॅस्ट्रेलियाई आॅयल कंपनी के हित में सिफारिशी चिट्ठी लिखने के बदले 50 हजार रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक मांगे। खुफिया कैमरे में कैद 11 सांसदों में से 6 ने तो बाकायदा पैसे लेकर सिफारिशी चिट्ठियां भी लिख दीं।
      कोबरापोस्ट ने इस अभियान का नाम ‘आॅपरेशन फल्कन’ रखा है। इसमें के़ सुगुमार और सी़ राजेंद्रन एआईडीएमके के सांसद हैं। लाल भाई पटेल, रविंद्र कुमार पांडेय और हरी मांझी भाजपा के सांसद हैं। विश्वमोहन कुमार, महेश्वर हजारी, भूदेव चौधरी जेडीयू के सांसद हैं। खिलाड़ी लाल बैरवा और विक्रमभाई अर्जनभाई कांग्रेसी सांसद हैं। वहीं कैसर बसपा से जुड़ी हुई हैं।
    कोबरापोस्ट ने दावा किया है कि किसी भी सांसद ने फर्जी आॅस्ट्रेलियाई कंपनी की सच्चाई जानने के बारे में कोशिश तक नहीं की। वे पैसे के बदले आसानी से पेट्रोलियम मंत्रालय को इस फर्जी कंपनी के पक्ष में चिट्ठी लिखने के लिए तैयार हो गए। कुछ ने तो कोबरापोस्ट के पत्रकारों को पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से मिलवाने तक का वादा कर दिया। जेडीयू सांसद महेश्वर हजारी ने तो यहां तक कहा, जब तक हैं तब तक आपकी कंपनी की मदद करेंगे। यहां से लेकर मंत्रालय तक, जहां तक कहिएगा। महेश्वर हजारी बिहार के समस्तीपुर से जेडीयू के सांसद हैं।
   आपको बता दें कि इस अंडर कवर इंवेस्टिगेशन में कोबरा पोस्ट के पत्रकार ने एक फर्जी कंपनी का एजेंट बनकर इन तमाम सांसदों से मिले और उन्हें बताया कि आस्ट्रेलिया स्थित एक विदेशी कंपनी के वे एजेंट हैं और इस कंपनी ने भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय में पूर्वोत्तर राज्य से तेल खोजने के लिए आवेदन किया है। इस कंपनी को अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए सिफारिशी पत्र और लॉबिंग की जरूरत है। भाजपा के दमन दीव के सांसद लालू भाई पटेल से पत्रकार की मुलाकात दलाल स्वामिनाथन जायसवाल ने कराई। सांसद को रिपोर्टर ने बताया कि वह एक विदेशी कंपनी के लिए भारत में कंसल्टेंट का काम करता है और इस कंपनी को भारत में लाइसेंस के लिए एक सिफारिशी पत्र चाहिए। लालू भाई पटेल 50 हजार रुपये लेकर यह काम करने को राजी हो गए। और यह भी कहा कि वह मंत्रालय में चलकर भी उसकी मदद करेंगे। भाजपा के ही बिहार से गया के सांसद हैं हरि मांझी। मांझी ने तो और ही दरिद्रता दिखाई और इस कंपनी के लिए सिफारिशी पत्र मात्र 35 हजार में सौंप दी और आगे भी हर तरह की मदद करने की बात खुफिया कैमरे के सामने कह दी। कोबरा के निशाने पर भाजपा के ही तीसरे सांसद रविंद्र कुमार पांडे चढ़ गए। पांडे जी झारखंड के गिरिडीह से लोकसभा चुनाव जीते हैं। इस सांसद के पास कोबरा के पत्रकारों को उनके पीए धर्मेंद्र ले गए। पांडे जी लालची ज्यादा निकले और सिफारिशी पत्र देने के एवज में दो लाख रुपये की मांग की। चूंकि यह रकम ज्यादा थी, इसलिए कोबरा ने इस महोदय से पत्र नहीं लिया, लेकिन उनके पैसे मांगने की बात कैमरे में कैद हो गई।
       राजस्थान के करौली धौलपुर से कांग्रेस सांसद हैं खिलाड़ी लाल बैरवा। बैरवा से इन पत्रकारों की मुलाकात उनके सरकारी आवास पर ही हुई। इस सांसद ने विदेशी कंपनी के लिए पत्र लिखने के लिए 50 लाख रुपये की मांग की और कहा कि वह पांच अन्य सांसदों से भी ऐसा पत्र लिखवा देंगे। इस सांसद ने सौदे की रकम जयपुर के मानसरोवर में पहुंचाने की भी बात की। पैसे की मांग ज्यादा थी, इसलिए कोबरा पोस्ट के पत्रकारों ने इस सांसद से पत्र नहीं लिया, केवल सांसद की लालच भरी बातों को कैमरे में कैद कर लिया। कांग्रेस के ही दूसरे सांसद विक्रम भाई अर्जन भाई से इन पत्रकारों की मुलाकात उनके संसदीय क्षेत्र जामनगर में हुई। इनके पीए रामसी मारू के जरिये मुलाकात हुई थी। इस सांसद ने पत्र के एवज में छह लाख रुपये की मांग की। कोबरा पोस्ट के पत्रकार ने जब सांसद से अभी कुछ पैसे और बाकी पैसे बाद में देने की जब बात कही, तो सांसद महोदय ने कैमरे के सामने कहा कि हम उधार में काम नहीं करेंगे, जो भी करना है नकदी करवा लो। कोबरा ने सांसद के पीए को 75 हजार रुपये नकद दे दिए और चलते बने। इस सांसद का पत्र पत्रकारों ने नहीं लिया।
     बात बात पर ईमानदारी की बात करने वाले नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के तीन सांसद ने भी आॅस्ट्रेलिया की इस फर्जी कंपनी के लिए पत्र लिखने से लेकर लांबिंग के लिए तैयार दिखे। जदयू के समस्तीपुर से सांसद महेश्वर हजारी ने पत्रकार से पत्र के लिए 5 लाख रुपये की मांग की। हजारी ने पांच लाख रुपये के बदले अन्य पांच सांसदों से भी पत्र लिखवाने की गारंटी दी। पैसे की मांग अधिक होने की वजह से इस सांसद से पत्र नहीं लिया गया। केवल इनकी मांग को रिकॉर्ड किया गया। जदयू के दूसरे सांसद भूदेव चौधरी बिहार के जमुई से चुनकर आते हैं। इस सांसद से भी पत्रकारों की मुलाकात पीए धर्मेंद्र ने ही कराई। ये सांसद भी एक फर्जी कंपनी के लिए बिना किसी जांच पड़ताल के ही पत्र लिखने को तैयार हो गए 50 हजार रुपये में। चौधरी ने इस काम के लिए मंत्रालय तक चलने की बात कही। पत्रकारों पर सांसद के पीए धर्मेंद्र को अग्रिम राशि के रूप में 25 हजार रुपये दिए और सिफारिशी पत्र ले लिया। जदयू के ही सुपौल के सांसद हैं विश्वमोहन कुमार। इस सांसद से पत्रकारों की मुलाकात दलाल नायर ने कराई। नायर ने पत्रकारों को बताया कि पैसे के लेन-देन का काम सांसद के पीए के साथ करना है। इस सांसद ने कोबरापोस्ट के पत्रकारों के साथ खुलकर लेन-देन किया। सांसद से पत्र के लिए 30 हजार में सौदा हुआ और 20 हजार रुपये उनके पीए के लिए अलग से देने की बात हुई। बाद में सांसद ने उस रिपोर्टर से पैसे मिलने की बात भी कह दी।
      दक्षिण भारत में राजनीति कर रही जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके के भी दो सांसदों ने 50 हजार रुपये में फर्जी पत्र लिखा। इन दोनों सांसदों से भी कोबरापोस्ट की मुलाकात दलाल अवनीश ने कराई। ये दोनों सांसद हैं के सुगुमर, पोलच्ची से। सुगुमर ने पत्रकार से 50 हजार का पैकेट अपने हाथ से ही ले लिया। दूसरे सांसद थे सी राजेंद्रन। ये दक्षिण चेन्नई से सांसद हैं। इसने भी 50 हजार रुपये लेकर पत्र दे दिया।
      बसपा से सीतापुर की सांसद हैं कैसर। महिला हैं। कैसर के पति ने पैसे के बदले पत्र देने का सौदा किया। सांसद के पति जसमीर अंसारी ने पत्रकारों से कहा कि जब तक हैं, तब तक आपकी सेवा करेंगे। यहां से लेकर मंत्रालय तक, जहां तक कहिएगा। जसमीर ने मंत्रालय में लांबिंग के लिए चार-पांच और सांसदों से मिलवाने की भी बातें कही। जसमीर ने तीन पत्र लिखवाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। चूंकि सौदे की रकम ज्यादा थी, इसलिए इनसे पत्र नहीं लिया गया।
       ऐसा नहीं है कि सांसद सिफारिशी पत्र नहीं लिखते हैं। लोकतंत्र में सांसदों की सिफारिश को जायज माना जाता है, लेकिन वह सिफारिश जनसेवा के लिए हो। यह उनका अधिकार भी है, लेकिन पैसे लेकर और बिना किसी जांच के ऐसे लोगों और कंपनियों के लिए सिफारिशी पत्र लिखना या लॉबिंग करने की बात कहना, न सिर्फ संसद का अपमान है, बल्कि कानूनी रूप से अपराध भी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन सांसदों के बारे में उनकी पार्टी के लोग क्या सोचते हैं। जदयू ने अभी तक अपने तीनों सांसदों से इस मामले में सफाई देने को कहा है, लेकिन किसी अन्य पार्टी ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई करने की बात नहीं की है।

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