Sunday, January 12, 2014

‘आप’ का पांचवां मोर्चा

धीरे-धीरे दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल और उनके साथी भाजपा और कांग्रेस पार्टी की राह पर चलने की कोशिश में लग गए हैं। यूपीए, एनडीए, लेफ्ट फ्रंट और ममता के संघीय मोर्चे के साथ ही साथ केजरीवाल अब पांचवां मोर्चा बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। क्या होगी पांचवें मोर्चे की दशा-दिशा? 

किसी पार्टी के साथ न जाने, किसी के साथ गठबंधन न करने, किसी भी दल के नेताओं को अपने में शामिल न करने और सादा जीवन, उच्च विचार रखने का नारा देने वाले केजरीवाल का पहला नारा तो उसी दिन झूठा साबित हो गया, जब वह कांग्रेस के सहयोग से दिल्ली की सत्ता पर विराजमान हुए। केजरीवाल का दूसरा नारा भी ध्वस्त हो गया, जब उनकी सरकार के लोग तमाम सरकारी सहूलियतें पाने के लिए दौड़ते दिखे। अब केजरीवाल का तीसरा नारा भी ध्वस्त होने जा रहा है। खबर यह है कि केजरीवाल देश की राजनीति को जानते हुए एक अलग से चुनावी मोर्चा बनाने की तैयारी कर रहे हैं। केजरीवाल का यह मोर्चा देश का संभवत: पांचवां मोर्चा होगा। केजरीवाल के इस मोर्चे के बारे में हम चर्चा करेंगे, लेकिन उससे पहले कुछ अन्य बातों पर एक नजर डालते हैं।
 दिल्ली की राजनीति अब शांत हो गई है। केजरीवाल की सरकार को कम से कम 6 माह के लिए जीवनदान मिल गया है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल की सरकार का हिसाब लेगी। अगर कांग्रेस के पक्ष में चुनाव परिणाम के गणित बनेंगे और केजरीवाल उस गणित का हिस्सा बनते हैं, तो संभव है कि केजरीवाल को आगे के लिए भी अभयदान मिल जाए। अगर केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव के बाद राजनीति करने की कोशिश की, तो केजरीवाल सरकार गिरने में देर नहीं लगेगी। इस बीच में केजरीवाल भी राजनीति के गुर सीखेंगे।
 दिल्ली में चुनाव से पहले केजरीवाल को कोई महत्व नहीं दे रहा था। न राजनीतिक पार्टियां और न ही मीडिया। लेकिन केजरीवाल की राजनीति चल गई और केजरीवाल की पार्टी ‘आप’ चर्चित हो गई। देश के कोने-कोने से केजरीवाल और उनकी पार्टी में शामिल होने के लिए लोग बेचैन हैं। इस बेचैनी को केजरीवाल भांप रहे हैं। भ्रष्टाचार के लिए अभिशप्त इस देश की जनता और सरकार में अचानक ईमानदारों की सूची लंबी होने लगी है। आश्चर्य हो रहा है कि अगर इस देश में इतने ईमानदार हैं, तो अब तक बेइमानों की राजनीति क्यों चल रही थी? केजरीवाल और उनकी मंडली अब लोकसभा चुनाव में अपनी भीड़ को आजमाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि यह ईमानदार मंडली पूरे देश में चुनाव लड़ेगी। कोई मोदी के खिलाफ अपना परचम लहरा रहा है, तो कोई राहुल के खिलाफ अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर रहा है। कुछ महिलाओं ने सोनिया और राजनाथ सिंह के खिलाफ भी अपनी उम्मीदवारी तय कर ली है। बिहार, बंगाल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और न जाने कहां-कहां आप उम्मीदारों की फौज खड़ी होती जा रही है। जो कल तक दूसरी पार्टियों की दलाली कर रहे थे, आज केजरीवाल के साथ खड़े होने का स्वांग रच रहे हैं। जिसे कल तक पार्टी की सेवा करते-करते टिकट नहीं मिला, वह अब केजरीवाल का भक्त बनता दिख रहा है। जो कल तक सरकारी और सामाजिक पैसों को लूट रहा था, अब केजरीवाल गाथा गा रहा है। कल तक जो सरकारी अधिकारी जनता का शोषण कर रहे थे, अब केजरीवाल के साथ जाने की कतार में खड़े हैं। सबने अपनी उम्मीदवारी स्वयं ही तय कर ली है।
 लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी एक मोर्चा बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। कांग्रेस और भाजपा के मुकाबले लेफ्ट पार्टियां एक तीसरे मोर्चे की पहल कर रही हैं। ममता बनर्जी चौथा या संघीय मोर्चा बना रही हैं। इस मार्चे के लिए ममता गंभीरता से लगी हुई हंै। संभव है, यह मोर्चा भावी राजनीति में कुछ अलग कर भी जाए। इसी तर्ज पर केजरीवाल, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव एक पांचवां मोर्चा बनाने की तैयारी में हैं, जिसकी थीम भ्रष्टाचार के विरोध की होगी। आप के एक नेता कहते हैं, ‘इस देश में जिस तरह की राजनीति चल रही है, उसे एकाएक नहीं बदला जा सकता। पिछले कई सालों से जब गठबंधन की सरकार ही चल रही है, तो आप को भी किसी गठबंधन में जाना होगा। नहीं तो खुद एक मोर्चा खोलना होगा। इसमें हमें देखना होगा कि जनता के मुद्दों पर और भ्रष्टाचार को लेकर कौन-कौन सी पार्टियां काम कर रही हंै। संभव है, हम लोग उन पार्टियों के साथ बातचीत करें और एक नया मोर्चा बना सकें।’
‘आप’ नेताओं ने इस मोर्चे के लिए पार्टियों से बात शुरू कर दी है। महाराष्ट्र में राजू शेट्टी की पार्टी स्वाभिमान शेतकरी संगठन को लग रहा है कि भाजपा की बजाय आप का मोर्चा बेहतर होगा, इसलिए राजू आप नेताओं से बात कर रहे हैं। इसी तरह पंजाब में जब कांग्रेस ने मनप्रीत बादल को एक से ज्यादा लोकसभा सीट देने से इन्कार किया, तो उनको भी लगा कि पंजाब पीपुल्स पार्टी का बेहतर तालमेल आप से हो सकता है। इस पार्टी के कई नेता आप नेताओं से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और माना जा रहा है कि इस संदर्भ में कुछ खास चर्चा भी हो चुकी है। मनप्रीत बादल की पंजाब पीपुल्स पार्टी प्रदेश के कई इलाकों में बेहतर पकड़ भी रखती है। जनता के बीच इस पार्टी से जुड़े नेताओं की साख भी है। यह बात और है कि पिछले विधानसभा चुनावों में पंजाब पीपुल्स पार्टी का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा, लेकिन यह भी तय है कि आगामी लोकसभा चुनाव में पीपीपी कुछ बेहतर करने में लगी हुई है।
उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन काफी दिन से केजरीवाल के साथ है। केजरीवाल ने जब सलमान खुर्शीद को चुनौती देकर फर्रुखाबाद में सभा में थी, तब भारतीय किसान यूनियन के लोग उनकी सुरक्षा के लिए वहां गए थे, इसलिए उनके साथ चुनावी तालमेल हो सकता है। इस चुनावी तालमेल को योगेंद्र यादव आगे बढ़ाने में लगे हंै। योगेंद्र यादव कुछ ऐसे बड़े जनसंगठनों को भी पार्टी से जोड़ने में लगे हुए हैं जिनकी जनता में ज्यादा पकड़ है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और उड़ीसा के कई जन संगठनों को भी मोर्चे में लाने की कोशिश की जा रही है। गुजरात में कानू कलसारिया ‘आप’ में शामिल हुए हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा के विरोध में जो लोग केशुभाई पटेल के साथ गए थे, वे सभी लोग आप के साथ जुड़ सकते हैं।  ‘आप’ का यह संभावित मोर्चा किस रूप में प्रकट होता है, इसे अभी देखना होगा। लेकिन यह साफ हो गया है कि आप के नेता लोगों की भावुक राजनीति को उभारकर अपनी राजनीति को अंजाम देने में ही लगे हैं।

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