Friday, January 17, 2014

बदलेगी नक्सलवाद की रणनीति?

गुड्सा उसेंडी के आत्मसमर्पण करने और चुनाव लड़ने तक की बात से यह सवाल उठने लगा है कि क्या नक्सलवाद की राजनीति बदलने लगी है? क्या अब नक्सली मुख्यधारा में वापस लौटेंगे? दंडकारण्य में हिंसा का दौर थमेगा?
-अखिलेश अखिल
‘दुनिया के इतिहास में हिटलर और मुसोलिनी भी इसी घमंड में थे कि उनको कोई हरा नहीं सकता। हमारे देश के समकालीन इतिहास में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी भी  इसी गलतफहमी के शिकार थे। लेकिन जनता अपराजेय है, जनता ही इतिहास की निर्माता है। मुट्ठी भर लुटेरे और उनके चंद पालतू कुत्ते आखिरकार इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिए जाएंगे।’ ये शब्द थे माओवादी नेता गुड्सा उसेंडी के। गुड्सा उसेंडी ने यह लिखित बयान पिछले साल 2013 की 26 मई को मीडिया के सामने दिया था। 25 मई को छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में नक्सलियों ने हमले कर प्रदेश के कई कांग्रेस नेताओं समेत करीब 27 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। मरने वाले नेताओं में प्रमुख थे नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और विद्याचरण शुक्ल। 26 मई कोे उसेंडी ने एक प्रेस रिलीज जारी किया था, जिसमें उसने न सिर्फ हमले की जिम्मेदारी ली थी, बल्कि हमले को पूरी तरह जायज भी बताया था। अपने प्रेस नोट में गुड्सा ने महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और विद्याचरण शुक्ल को छत्तीसगढ़ की आदिवासी जनता का जानी दुश्मन बताया था। साथ ही मुठभेड़ में मारे गए छोटे कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत के लिए उसने संवेदना भी व्यक्त की थी। चार पेज के प्रेस नोट में गुड्सा ने महेंद्र कर्मा के खिलाफ बहुत सी बातें लिखी थीं। यह भी लिखा था कि उनकी मौत के बाद दंडकारण्य में जश्न का माहौल है। साथ ही मुख्यमंत्री रमन सिंह, राज्यपाल शेखर दत्त और अन्य नेताओं और अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी कि वे इस गफलत में न रहें कि कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता।
       लेकिन यही गुड्सा उसेंडी ने जिसे छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य जोन का फैंटम भी कहा जाता था, पिछले दिनों अपनी पत्नी के साथ आंध्र पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद आंध्र प्रदेश के डीजीपी प्रसाद राव के साथ हैदराबाद में नक्सलियों के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी ने कहा कि वह राजनीति में आना चाहता है। वह पृथक तेलंगाना राज्य के लिए संघर्ष करना चाहता है। वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेगा और कब लड़ेगा, इस इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उसने खराब सेहत के चलते हथियार डाला है। इससे पहले उसने नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के समक्ष अपनी मंशा जाहिर कर दी थी, लेकिन कमेटी की ओर से उसे कोई जवाब नहीं मिला।’ कहने के लिए गुड्सा कुछ भी कह रहें हों, लेकिन यह साफ है कि वह लोकतंत्र की हवा का बहार लेने के लिए जंगल से बाहर निकले हैं। माओवादी को लोकतंत्र से घृणा है और संसदीय लोकतंत्र में तो उनकी तनिक भी आस्था नहीं है। माओवादी संसदीय लोकतंत्र को पंूजीवाद और शोषण का प्रतीक मानते हैं। लेकिन उसेंडी के उस बयान को जिसमें उसने कहा कि वह तेलंगाना के लिए राजनीति करना चाहते हैं और जनता की सेवा करना चाहते है, देखें तो साफ हो जाता है कि देर से ही सही उसेंडी को लोकतंत्र में यकीन हो गया है। संभव है कि आने वाले दिनों में जंगल से बाहर और भी नक्सली निकलें।
         गुड्सा उसेंडी जब मीडिया के सामने लाए गए तो उनकी मासूमियत को देख कर पत्रकार भी दंग रह गए। किसी को लग नहीं रहा था कि यही वह आदमी है, जिसके इशारे पर दंडकारण्य कांप रहा था। किसी को अहसास नहीं हो रहा था कि  इस मासूम चेहरे के पीछे कितनी हिंसा की कहानी है। उसेंडी के गुनाहों की कहानी छोटी नहीं है। बंदूक के दम पर क्रांति की बात करने वाले माओवादी आंदोलन का यह अहम शख्स छत्तीसगढ़ में तीस जवानों की हत्याओं में शामिल रहा है। इसे दर्भा घाटी नक्सली हमले का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है। वही दर्भा घाटी हमला जिसने प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ही साफ कर दिया।
 खुद को आंध्र पुलिस के हवाले करने वाला गुड्सा उसेंडी उर्फ जीवीके प्रसाद दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के मानपुर डिवीजन का सेक्रेटरी रह चुका है। सरेंडर के बाद यह भी पता चला है कि यह शख्स एसपी विनोद कुमार चौबे समेत 30 जवानों की हत्या सहित आधा दर्जन वारदात में शामिल रहा था। पिछले साल इसी डिवीजन में सक्रिय रहे शीर्ष नेता जंगू ने भी सरेंडर किया था।
 पुलिस अफसरों ने बताया कि आंध्र प्रदेश वारंगल जिले के देवरुपल्ली ब्लॉक में रहने वाले जीवीके प्रसाद की सक्रियता मानपुर डिवीजन में रही। उसने 2009 में यहां के सेक्रेटरी का पद संभाला और संगठन में युवाओं को शामिल किया। उसके साथ जंगू भी शामिल था, जिसने पिछले साल आंध्र प्रदेश में ही आत्मसमर्पण किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं की वजह से क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं ने नक्सलवाद की राह पकड़ी थी। जंगू के समर्पण बाद मानपुर डिवीजन थोड़ा कमजोर हुआ। अब गुड्सा उसेंडी के सरेंडर करने को पुलिस शुभ संकेत मान रही है। आंध्र प्रदेश के डीजीपी ने कहा है कि शीर्ष नेताओं के सरेंडर से हाल ही में नक्सली संगठन ज्वॉइन करने वाले युवाओं पर असर पड़ेगा। नक्सली नेता के सरेंडर के बाद जंगल में पुलिस की सक्रियता बढ़ेगी। आईटीबीपी ने ग्रामीणों के बीच अपनी पकड़ बना रखी है। अब पुलिस भी   गांवों में पहुंचकर वहां सक्रिय भूमिका निभाएगी, ताकि युवाओं में पुलिस की अच्छी छवि बने।’
      गुड्सा उसेंडी पिछले 28 साल से छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय था। उधर, छत्तीसगढ़ पुलिस गुड्सा उसेंडी से पूछताछ के लिए हैदराबाद रवाना हो चुकी है। वहां उसेंडी से दर्भा घाटी हमले सहित अन्य घटनाओं पर पुलिस पूछताछ करेगी। आंध्र प्रदेश पुलिस ने गुड्सा पर 20 लाख रुपये का ईनाम भी रखा था। बताते चलें कि नक्सलियों की तरफ से आने वाले सभी प्रेस नोट गुड्सा उसेंडी के नाम से ही आते थे। गुड्सा कई बड़ी वारदात का मास्टरमाइंड था, यह वह कड़ी था, जो शहरी नेटवर्क से जानकारी निकाल के नक्सलियों को देता था और प्लानिंग करता था। यही नहीं, अपने भाषणों के जरिये यह नक्सलियों में जोश भरने का काम भी करता था। गुड्सा की पत्नी रज्जी उर्फ संतोषी मरकाम छत्तीसगढ़ में कमांडर रैंक पर काम करती थी। बताया जा रहा है कि गुड्सा उसेंडी को गुरिल्ला युद्घ और अत्याधुनिक हथियार चलाने में महारथ हासिल है।
       उसेंडी के बाहर आने के बाद नक्सली आंदोलन की बहुत सारी जानकारी देश और जनता के हाथ लग सकेगी। उसेंडी चाहेंगे, तो बहुत सारी जानकारी सरकार को देंगे और इस नक्सली आंदोलन को कैसे खत्म किया जाए, इस पर भी सरकार को सहयोग दे सकते हैं। देश के किन इलाकों में किस तरह से नक्सलवाद पसर रहा है और किस तरह के लोग इसमें शामिल हो रहे हैं, इस पर भी उसेंडी जानकारी दे सकते हैं। देश भर में नक्सलियों के पांच सबसे बड़े उन नेताओं की जानकारी भी उसेंडी दे सकते हैं जिस पर लाखों का ईनाम अलग-अलग राज्य सरकारों ने रखा है। नक्सलियों को हथियार कहां से आते हैं और इनके आंदोलन में राजनीति कैसे मददगार होती है, इस पर भी जानकारी उसेंडी दे सकते हैं। बच्चे और महिलाओं का नक्सली किस तरह उपयोग करते हैं और महिलाओं की हालत वहां कैसी होती है, इस पर भी उसेंडी जबाव दे सकते हैं। इन सबसे अलग यह बात है कि आखिर नक्सली क्या चाहते हैं और उनकी चाहत कैसे पूरी हो सकती है? इसकी जानकारी भी उसेंडी दे सकते हैं और सरकार इस जानकारी के आधार पर आगे की योजनाएं बना सकती है।

No comments:

Post a Comment