Friday, August 29, 2014

कम्युनल शूटआउट @ रांची

सांप्रदायिक ताकतों का मानना है कि लव जिहाद के नाम पर एक खास संप्रदाय की बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। एक समुदाय के लोग अपनी पहचान छुपाकर लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर शादी कर रहे हैं।  लेकिन यह सब एक राजनीतिक साजिश से ज्यादा कुछ भी नहीं। केवल वोट की सियासत है यह, जिससे मुख्य मुद्दे से लोगों का ध्यान बंटता है। ऐसे खेल से सियासतदारों को तो तो फायदा पहुंचता है पर समाज में विभाजन की खाई गहरी होती है, जो अब भी हो रही है।

तारा शाहदेव प्रकरण का सच

त माम तरह की पुलिसिया कार्रवाई के बाद आखिर में शूटर तारा शाहदेव के पति रंजीत सिंह उर्फ रकीबुल उर्फ बब्बा दिल्ली के महिपालपुर पालम इलाके से गिरफ्तार कर लिए गए हैं। रकीबुल और उसकी मां कौशल रानी उर्फ कौसर परवीन को लेकर रांची पुलिस लौट आई है। अब मां बेटे दोनों हिरासत में हैं। दिल्ली में हुई शुरूआती पूछताछ में रकीबुल ने कहा है कि वह सिख है और सभी धर्मों को मानता है और पत्नी के साथ उसका बस पैसे को लेकर झगड़ा है। रंजीत ने यह भी कहा है कि उसे किसी राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है।
रकीबुल कितना सच बोल रहा है, इसकी असली कलई तो पूरी पूछताछ के बाद सामने आएगी। लेकिन इतना तय है कि प्रदेश की राजनीति, पुलिस तंत्र और कई छोटे बड़े अधिकारी और पत्रकार इस पूरे खेल में भूमिका निभाते नजर आ रहे हंै।
तारा शाहदेव ने रकीबुल पर कई तरह के आरोप लगाए हैं लेकिन पुलिस की जांच केवल धर्मांतरण करने, निकाह करने और तारा के साथ मारपीट करने के इर्द गिर्द ही घूमती नजर आ रही है। जिस तरह का जीवन यह रंजीत पिछले 10 सालों से जी रहा था जिस तरह नेताओं, अफसरों, और पत्रकारों को उपकृत कर रहा था उससे लगता है कि या तो यह आदमी किसी विदेशी एजेंसी के साथ जुड़ा हो, या फिर नकली नोटों का धंधा करता हो। हो सकता है कि यह रंजीत प्रदेश की लड़कियों की भी खरीद फरोख्त करता हो और नेशनली रैकेट चलाता हो। संभावना यह भी  है कि रंजीत नाम का यह आदमी इस प्रदेश का दूसरा वामदेव साबित हो जिसने 10 हजार से ज्यादा प्रदेश की लड़कियों को बेचने का काम किया है और बिकने वाली हर लड़की के साथ पहले स्वयं बलात्कार करता था। इस खेल में भी प्रदेश के अभी तक दो वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए है।
रंजीत के साथ  भी प्रदेश के दो मंत्री के जुड़े रहने की बात अभी तक सामने आई है। एक हैं मंत्री हाजी हुसैन और दूसरे हैं सुरेश पासवान। पासवान राजद कोटे से मंत्री है और हुसैन झामुमो के मंत्री हैं। रंजीत सिंह उर्फ रकीबुल और तारा की शादी में  इंदर सिंह नामधारी भी शामिल हुए थे। इसके अलावा आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी, पुलिस अधिकारी और कोर्ट से जुड़े लोगों के साथ ही खेल की दुनिया के लोगों के भी रंजीत से गहरे संबंध रहे हंै। लेकिन ये सब सिक्के के एक ही पहलू हैं।
दूसरी ओर पूरे देश में तारा शाहदेव  प्रकरण  को अब पूरी तरह से कम्युनल टच देने की राजनीति अपने पूरे शबाब पर है। खैर कहिए इस धर्मनिरपेक्ष देश का कि अब तक इस प्रकरण को धार्मिक उन्माद से बचाया जा रहा है। इस प्रकरण के जरिए खेल तो यह भी खेलने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले को पिछले कुछ महीने से पश्चिम उत्तरप्रदेश में चल रहे सांप्रदायिक तनाव के स्तर तक पहुंचा दिया जाए।
जाहिर है प्रदेश में सिर पर चुनाव है और सांप्रदायिक रंग के जरिए वोट की राजनीति गर्म हो जाती है तो भला कुछ कर गुजरने में क्या जाता है? लेकिन राजनीति के बरक्स एक समाज भी है जो क्या ठीक है और क्या गलत सब समझ रहा है। तारा और उन जैसी हमारी  तमाम बहन बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की जालसाजी को हर्गिज बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम ही होगी और पैसे और राजनीतिक दम पर महिलाओं के साथ इस तरह का खेल करने वालों को कठोर दंड दिया जाए इसे भला कौन स्वीकार नहीं करेगा? लेकिन राजनीति यहां धर्म को लेकर है। कौन नहीं जानता कि हर रोज देश के कोने कोने में पति द्वारा पत्नियां  प्रताडि़त की जा रही हैं। उनकी हत्या की जा रही है।
महिला शोषण के अनगिनत दास्तान हो रहे हैं। लेकिन क्या हो रहा है? दोषियों को दंडित करने के सिवा या फिर ऐसे लंपट और हिंसक लोगों के बहिष्कार करने के अलावा और कोई चारा है? एक हिंदू अगर यही कांड करता तो? फिर आज के इस ग्लोबल समाज और दुनिया में शादी के जो अनेक रूप हमारे सामने आए हैं उस पर किसी गार्जियन का बस है क्या? और फिर क्या आज शादी अन्तर्जातीय नहीं होती? और होती भी है तो क्या उनमें झगड़े तकरार नहीं होते? निगाह को चारों तरफ दौड़ा कर देखिए तो कई हिंदू लड़कियां कई मुस्लिम नेताओं, एक्टरों और समाज के अन्य लोगों के साथ बेहतर वैवाहिक जीवन जी रही हैं। ठीक इसके उलट कई मुस्लिम या अन्य धर्म की लड़कियां भी अन्य धर्म के लोगों के साथ वैवाहिक जीवन में खुश हैं। तो फिर रंजीत कोहली बनाम रकीबुल को लेकर इतना बवाल क्यों?  देश का नाम रोशन करने वाली इस जांबाज महिला खिलाड़ी के  दांम्पत्य जीवन में आयी त्रासदी,  उसके साथ हुई ठगी और उसके पति रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन द्वारा तारा के साथ किए गए अमानवीय कुकृत्य की जितनी भी निंदा की जाए हो कम ही होगी इसे कोई भी सभ्य समाज बर्दाश्त नहीं कर सकता। 
जिस तरह से पिछले कुछ सालों में लव जेहाद की कहानी रची जा रही है, उसका सच क्या है इसकी जानकारी तो सरकारी तंत्र ही दे सकता है लेकिन तारा शाहदेव को इस शब्द से कोई सरोकार नहीं।
तारा ने जो बयान दर्ज कराया है, हम उसे भी आपके सामने पेश कर रहे हंै ताकि पता चल जाए कि तारा की क्या परेशानी रही है। इस पूरे मामले की सीबीआई से भी जांच कराने की बात हुई है। इसके साथ ही रांची हाई कोर्ट में भी इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका अखंड भारत संस्था के विजय कुमार जेठी ने दायर की है। इस याचिका में कई मंत्रियों, अधिकारियों समेत केंद्र सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो तारा शाहदेव खुद अपनी शादी 2016 में करना चाह रही थी अचानक एक माह पहले शादी करने को राजी कैसे हो गई? कहीं कोई लोभ, लालच या फिर कोई दबाव तो नहीं ? इस मसले पर भी जांच की जानी चाहिए। तारा की बातों पर यकीन करें तो रंजीत से उसकी मुलाकात खेल गांव में उस समय हुई थी,जब तारा वहां शूटर की ट्रेनिंग लेती थी और रकीबुल अपने कुछ न्यायिक और पुलिस अधिकारी साथियों के साथ वहां बैडमिंटन खेलने जाया करता था। कहा गया कि यहीं मुलाकात दोस्ती में बदली और दोस्ती फिर प्यार में।
 7 जुलाई को दोनों की शादी  हो गई, जिसमें बहुत सारे लोग इक_ा थे।  तारा कहती है कि रंजीत के कई दोस्त इस शादी में बिचौलिए की भूमिका में रहे है। तारा का यह भी बयान है कि शादी से पहले उसे काफी गिफ्ट दिए गए और उसके भाई को पटना जाने के लिए एयर टिकट भी रंजीत ने दिया। तारा यह भी कहती है कि रंजीत उर्फ रकीबुल ने उसे इंटरनेशनल खिलाड़ी बनाने की बात कही थी। और तारा का यह भी कहना है कि शादी के बाद जब वह रंजीत के साथ उसके घर गई तो दूसरे दिन ही उससे इस्लामिक रीतियों के तहत निकाह कराया गया। फिर धर्म बदलने की बात सामने आई। फिर उसे प्रताडि़त करने की बात कही। तारा ने अपने सास पर भी इल्जाम लगाए। रंजीत के यहां हर रोज बड़ी संख्या में नेता और अधिकारियों के साथ ही बड़ी संख्या में लड़कियों के आने की भी बात कही। उसने यह भी कहा है कि रंजीत हर रोज बैग में रूपए लाया करता था और उसके साथ फिर गाली गलौज से लेकर मारने की धमकी भी देता था। तारा के इन सभी आरोपों की जांच अब पुलिस को करनी है। पुलिस को केवल धर्मांतरण करने की बात तक ही जांच नहीं करनी है। जांच आगे तक होनी चाहिए। यह जांच एनजीओ की फंडिंग तक की होनी चाहिए। उसके रैकेट तक पहुंचना ही इस मामले की तह तक पहुंचना होगा।
लेकिन इन तमाम  आरोपों के बावजूद अभी तक पुलिस को यह पता नहीं चला है कि रंजीत उर्फ रकीबुल मुसलमान है। उसके घर से गीता भी मिले हैं, कुरान भी। कई अन्य धर्म से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को हाथ लगे हैं। लेकिन रंजीत मुसलमान है इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।  लेकिन पूरे देष में इस प्रकरण को लव जेहाद की संज्ञा दे दी गई है।  इस तरह के बहुत सारे सवाल हंै। कहीं ऐसा न हो कि धर्म की राजनीति के फेर में रंजीत उर्फ रकीबुल के भेष में कोई देशद्रोही न छुपा हो। जाहिर है कि इस आदमी के पीछे कोई बड़ा गैंग काम कर रहा हो। संभव है कि रंजीत की आड़ में कई नेता, अधिकारी और समाज के अन्य बड़े लोग कोई बड़ा रैकेट चला रहे हों। तारा का मसला सिर्फ धर्म बदलने से लेकर प्रतारित करने के सिवा और कुछ नहीं है। यह भी सच है कि किसी को जबरन धर्म बदलने को नहीं कहा जा सकता। और यह कानूनी जुर्म  है। लेकिन तारा ने जितने तरह के  संगीन आरोप रंजीत पर लगाए है उन सभी की जांच की जानी चाहिए ताकि इसके रैकेट का पर्दाफास हो सके। रंजीत पर सबसे ज्यादा शक की सुई यह है कि 2011 से पहले यह बेरोजगार था और ठगी का धंधा करता था। 2011 के बाद यह करोड़ों में खेलने लगा। कैसे?
रांची के जिस बरियातू मुहल्ला में रंजीत का परिवार रहता था, वह गरीबी में था। रंजीत के पिता  हरनाम की पहली शादी से कई बच्चे थे। सभी बेहतर नौकरी भी कर रहे हैं।  बरियातू के लोग मानते हैं कि बाद में हरनाम ने अपनी नौकरानी कौशल रानी से शादी कर ली। कौशल पटना के मीठापुर इलाके की है। जाति की बनिया।   हरनाम की दूसरी शादी होते ही पहली पत्नी के संतान हरनाम को छोड़ कर चले गए। संभव है कि हरनाम की दूसरी पत्नी कौशल रानी दूसरे धर्म ही हो।
और समाज में अपनी इज्जत बचाने के लिए हरनाम ने उसका नाम बदल दिया हो। यह जांच का विषय हो सकता है। कौशल से हरनाम के चार बच्चे हुए। दो लड़का और दो लड़की। रंजीत का बड़ा भाई रजरप्पा में एक दिन अपने दोस्तों के साथ घूमने गया और पानी में डूब मरा। रंजीत की बड़ी बहन एक अधिकारी के यहां घरेलू काम करती थी। उस अधिकारी के नौकर के साथ उसने शादी कर ली। आजकल वह संभवत: पंजाब में रह रही है। बाद में हरनाम की मौत हो गई। हरनाम की मौत के बाद रंजीत और उसकी मां और बहन भुखमरी की कगार पर आ गए। हरनाम के रिटायरमेंट के 3 लाख रूपए मिले थे। उस पैसे से रंजीत ने एक वैन खरीदी और किराए पर चलाने लगा। उसके बाद रंजीत रकीबुल कैसे बना इसकी जानकारी बरियातू के लोगों को नहीं है। और अंत में एक बात यह है कि पूरे देश में  पिछले कुछ सालों से एक नए शब्द लव जिहाद  चर्चा में आया है। संभव है कि इसमें सच्चाई भी हो। लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इन शब्दों को लेकर पश्चिमी उत्तरप्रदेश में एक अलग तरह की राजनीति जारी है।  इस जेहाद के नाम पर वहां सेना का स्थाई डेरा जमा है। 
सांप्रदायिक शक्तियों का मानना है कि लव जिहाद के नाम पर एक खास संप्रदाय की बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। एक समुदाय के लोग अपनी पहचान छुपाकर लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर शादी कर रहा है।  लेकिन यह सब एक राजनीतिक साजिश से ज्यादा कुछ भी नहीं। यह एक वोट की राजनीति है। हमारे देश में प्रेम तो ऐसे भी किसी विद्रोह से कम नहीं है। प्रेम का विस्फोट ही एक तरह का सामाजिक जिहाद है। प्रेम किसी मजहब को नहीं जानता और न ही किसी सरहद को। लेकिन राजनीति जारी है। तारा शाहदेव को उचित न्याय मिले और फिर ऐसी घटना समाज में न हो। लेकिन रकीबुल जैसे शातिर की जांच भरोसे के साथ की जाए ।

No comments:

Post a Comment