Sunday, June 12, 2016

राजनाथ की राजनीति को रोकने के लिए गोरखपुर तैयार

राजनाथ की राजनीति को रोकने के लिए गोरखपुर तैयार
अखिलेश  अखिल
    लगता है कि भाजपा की ओर से राजनाथ सिंह  का  नाम सीएम उम्मीदवारी  के तौर पर मीडिया में उछालने के पीछे राजनीति है। भाजपा की आंतरिक सोंच क्या है यह भला किसे पता लेकिन उपरी तौर पर भाजपा यह कहती फिर रही है कि यूपी चुनाव में वह किसी अगड़ी जाति को सीएम उम्मीदवार बनाना चाहती है। इस खेल के जरिए वह पिछड़ी जाति समेत अगड़ी जाति को साधने की कोषिष में है। राजनाथ सिंह के नाम के पीछे की राजनीति यहीं है। लेकिन यह भी तय है कि अंतिम फैसला कुछ और ही होना है। 
        यह राजनीति भी खूब  है। पार्टी जातीय राजनीति के सहारे चुनाव को प्रभावित कर अपने पक्ष में सारा समीकरण करने के फिराक में होती है जबकि नेता अपनी राजनीति के दम पर पार्टी के खेल को चुनौती देते रहते हैं। पार्टी की जातीय राजनीति पर नेता का भरोसा तो होता ळै लेकिन जब एक  जाति की महत्वकांक्षा अपने ही जाति के किसी दूसरे नेता से टकराती है तो अंजाम बड़ा बुरा हो जाता है। यूपी में भाजपा के भीतर अब जो हाने जा रहा है उसकी कल्पना कभी नहीं की गई थी। पार्टी अध्यक्ष अमित ष्षाह की यह राजनीतिक कौषल कहिए या फिर सब कुछ जानते हुए खेल के पीछे की राजनीति यह भला कौन जाने। दो दिन पहले राजनाथ सिंह को यूपी के सीएम उम्मीदवार  के नाम की मीडिया ट्रायल  किया गया। संभव है पार्टी के लोग राजनाथ सिंह के नाम पर पार्टी के भीतर की प्रतिक्रिया जानना चाह रहे हो। इस पूरे खेल में राजनाथ सिंह की स्वीकृति थी या नहीं इसकी जानकारी भी किसी को नहीं मिली है। दो दिनों के बाद एक खबर सामने आई जिसमें राजनाथ सिंह यह कहते हुए देखे गए कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौपेगी, उसका निर्वहन वे करेंगे। राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद ही गोरखपुर की राजनीति गर्म होने लगी। योगी आदित्य नाथ नेपथ्य से आग का गोला तैयार करने लगे। अपने सेवकों, समर्थकों के साथ बैठके करने लगे। और अंत में वही बात सामने आई जिसकी संभावना दिख रही थी। योगी आदित्य नाथ के समर्थक रामाकांत यादव खुलकर योगी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की बात कह गए। उन्होने कहा कि भाजपा के इंटरनल सर्वे जिन संभावित सीएम उम्मीदवार  पर लोगों से राय मांगी गई थी, उसमें योगी का नाम सबसे उपर था। सबसे ज्यादा लोगों ने योगी के नाम पर सहमति जताई थी। लेकिन पार्टी अगर इस सर्वे रिपोर्ट को नजर अंदाज कर रही है तो उसके गंीज्ञीर परिणाम सामने आ सकते हैं। जाहिर है राजनाथ सिंह के नाम के विरोध में जोगी का यह पहला षंखनाद है।
       सूत्र बताते हैं कि यूपी की राजनीति में राजनाथ और योगी के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। योगी पूर्वांचल के षेर माने जाते हैं।  कहते हैं कि पूर्वी यूपी समेत लगभग 40 जिलों में योगी की राजनीति कुंलाचे मारती है और भाजपा के पक्ष में वोट वे वोट टर्न करने में सफल रहते हैं। इसमें सच्चाई भी है। फिर योगी के नाम भाजपा की सहमति क्यों नहीं? यह बड़ा सवाल है। आखिर योगी के नाम से अमित षाह क्यों कटते नजर आ रहे हैं? सवाल यह भी है कि फिर राजनाथ सिंह को आगे बढाने के पीछे की राजनीति क्या है? कहा जा रहा है कि योगी आदित्य नाथ की राजनीति और अख्खड़ता को षाह और मोदी पसंद नहीं करते। हिंदुत्व की राजनीति तक तो योगी की पूछ पार्टी के भीतर बनी हुई है लेकिन योगी की पिछड़ी जातियों के प्रति सोंच को षाह सही नहीं मानते।यही वजह है कि सर्वे रिपोर्ट में योगी सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बनने के बावजूद योगी के नाम को अभी दबा दिया गया है। जहां तक राजनाथ सिंह की बात है उसके बारे में भाजपा के कुछ लोग मान रहे हैं कि अमित ष्षाह और खुद प्रधानमंत्री मोदी चाहते है ंकि राजनाथ सिंह को केंद्र से हटाकर प्रदेष की राजनीति में पटक दिया जाए ताकि सरकार के प्रति उनके मन में जो कुंठाए दबी है उससे निजात मिल जाए। हालाकि राजनाथ सिंह खुले तौर पर कभी भी सरकार के विरोध में कोई बातें नहीं कही है लेकिन षाह को लगता है कि राजनाथ सिंह मोदी सरकार और उनके कार्यप्रणाली से खुष नहीं हैं। यही वजह है कि षाह चाहते हैं कि राजनाथ सिंह को प्रदेश  की राजनीति में खपा दिया जाए। लेकिन इसके पीछे की एक और राजनीति छुपी हुई है। राजनीति यह है कि  प्रदेष के भीतर राजनाथ सिंह के कई विरोधी हैं। इसी में योगी भी है।  दोनों के बीच के टकराहट में दोनों के नाम का पत्ता कट जाएगा और उम्मीदवारी किसी और की हो जाएगी।  मादी और षाह की सोंच है यूपी से किसी पिछड़ी जाति के नेता को ही उम्मीदवार खड़ा किया जाए। ऐसी उम्मीदवारी पर अगड़ी जाति के संभावित कई लोग षांत हो जाऐंगे। और ऐसा नहीं होने पर ब्राम्हण, राजपूत के बीच पार्टी की लडाई षुरू होगी जिससे पार्टी को हानि हो सकती है। और ऐसा है भी। जाहिर है राजनाथ सिंह का नाम उछालकर प्रदेष की अगड़ी जाति का रिएक्षन देखना चाह रही है भाजपा।  
       यूपी से सीएम उम्म्ीदवारी का दावा वरूण गांधी को भी है। वरूण गांधी आगे की रणनीति क्या अपनाते हैं यह अभ्ज्ञी देखना होगा लेकिन भाजपा में वरूण और उनकी मां मेनका की राजनीति बुहत ठीक नहीं कही जा सकती। कह सकते हैं कि चुनाव से पहले भाजपा में तूफान आ सकते है।

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