Monday, June 27, 2016

ठहरिए जनाब! यहां तो अमेठी की लूट जारी है.....




अखिलेश  अखिल
अमेठी में सचमुच लूट जारी है। अमेठी लूट की षिकार है। अमेठी की लूट इतनी चुपके चुपके की गई कि अमेठी वालों को इसकी भनक तक नहीं लगी। अमेठी के लोग जब सो कर उठे तब तक आधी अमेठी लूट चुका थी। दौरे दौरे लोग अपने आका के पास पहुंचे। उम्मीद थी कि बाकी बची अमेठी लूट से बच जाएगी। लेकिन आका को अपने रक्षकों पर भरोसा था। आका ने कहा कि - ‘आप लोग नाहक परेषान हो रहे हैं। अमेठी हमारी है और हमारी ही रहेगी। वहां लूट नहीं हो सकती। हमारे लोग सब ठीक कर देंगे। लूट का सामान भी वापस हो जाएगा। आपलोग जाइए और मेरे नाम का माला जपते रहिए। सब ठीक हो जाएगा।’
      जो लोग हांफते हुए अमेठी लूट की जानकारी और अमेठी को बचा लेने की आस लिए दिल्ली पहुंचे थे मूंह लटकाए निराष होकर लौटे। इनके पहुचते ही पूरे अमेठी में हाहाकार मच गया। अब क्या होगा? उनकी पत्नियां उलाहना देने लगी ।  कहने लगी - ‘तुम्हारे आका किस चीज के बने हैं जी। यहां सब कुछ लूट गया और वे नींद में सोए हैं। ये तो वही बात हुई कि रोम जल रहा था और नीरो बंषी बजा रहा था। उस नीरो और तुम्हारे आका में कोई अंतर है क्या? अब तुम लोग अपने आका के नाम की माला जपते रहो, हम पत्निया ंतो चली अब उस नए संभावित आका की तरफ। उसकी बात में दम भी है और कुछ नयापन भी। तुम्हारे आका तो न हम लोगों से मिले हैं और न हीं हमारी हाल चाल ही पूछते हैं। संभावित आका तो हमें हमारी नाम से बुलाती है और मीठी मीठी बाते भी करती है। हम तो उसके मुरीद हो गए है जी।’
      तो यह है आधुनिक अमेठी का नजारा। राहुल गांधी इसी अमेठी से राजनीति करते हैं और अमेठी भी इसी राहुल गांधी के उपर अपना सब कुछ न्योछावर करती रही है। यह अमेठी कांग्रेस का गढ माना जाता है। और गांधी परिवार के लिए तो अमेठी अपना घर ही  है। कांग्रेस की हार भले ही पूरे देष से हो जाए, अमेठी कांग्रेस के लिए कभी हारी नहीं। हर बार जीत और हर बार गांधी परिवार के प्रति समर्पित। अमेठी को  भी अपने पर गर्व है। किसको किसको खड़ा नहीं किया। इंदिरा गांधी, संजय गांधी, सोनिया गांधी से लेकर राहुल को संसद तक पहुंचाया। ढोया। आज भी ढो ही तो रही है। यह बात और है कि अमेठी को जितना मिलना चाहिए उतना नहीं मिला। अमेठी देष का संबसे मोस्ट वीआईपी लोक सभा क्षेत्र है। केंद्र में सरकार किसी की भी बने किसकी मजाल कि अमेठी को नजर अंदाज कर दे। लेकिन अमेठी आज अपनी बेवसी पर आंसू बहा रही है।
      तो सवाल है कि अमेठी की लूट कैसे हो गई? और किसने की इतनी बड़ी लूट? माफ कीजिएगा सबसे पहले आपको बता दूं कि अमेठी में सियासी लूट हुई है और लूट करने वाली है भाजपा की वहीं स्मृति इरानी जो  देष की षिक्षा मंत्री बनी हुई है। इस पर आगे चर्चा होगी पहले कांग्रेस की अमेठी कैसे लूटी इस पर बात हो जाए।  अमेठी के सांसद और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पुष्तैनी सीट मानकर अमेठी को वक्त नहीं देते। राहुल गांधी अमेठी की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद चार लोगों पर रख छोड़ी है। ये चारों नेता हैं- दीपक सिंह, योगेंद्र मिश्र,मोहम्म्द नईम और फतेह मोहम्मद। दीपक अमेठी के सेवई गांव,ब्लाक षाहगढ से आते हैं। दीपक प्रदेष कांग्रेस में महासचिव भी हैं। हालत ये है कि इनके गांव सेवई में ही इनकी किसी से नहीं बनती। पिछले लोक सभा चुनाव में इनके गांव के अधिकतर  लोगों ने राहुल की बजाए स्मृति इरानी को पसंद किया था। राहुल से स्मृति क्यों ? जबाव मिला कि दीपक की वजह से। राहुल बाबा आते नहीं और दीपक से किसी की पटती नहीं। सेवई के लोग आगे भी कुछ ऐसा ही करेगे। 
     राहुल गांधी के एक अन्य विष्वास पात्र हैं योगेंद्र मिश्र। मिश्र जी अमेठी जिला अध्यक्ष भी हैं। बहोरीपुर गांव, गौरीगंज के रहने वाले हैं। 2009 के चुनाव में मिश्र जी की राजनीति विसात ठीक ठाक थी। लेकिन अब वे लोगों के रडार पर चढ गए हैं। लोग कहते हैं  िकवे सिर्फ अपनी कमाई करने में लगे रहते हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि हम केवल वाट डालते रहे और मिश्र जी धन इकट्ठा करते रहे हैं। पेट्ोलपंप के मालिक हो गए हैं। और भी बहुत कुछ है। चुनाव आने दीजिए आगे की राजनीति क्या होगी अब तय हो जाएगी। मतलब साफ है कि मिश्र जी की राजनीति यहां डोल गई है। लेकिन मिश्र प्रेम में फंसे राहुल गांधी  को आज भी उनपर ही यकीन है।
     जगदीषपुर के रहने वाले मो0 नईम के बारे में लोग तरह तरह की बातें करते है। दवंग टाईप के नईम को राहुल गांधी इस बार के उत्तरप्रदेष चुनाव में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन जिस नईम के प्रबंधन से राहुल को वोट मिल जाते थे, अब उसकी संभावना न के बराबर है। भाजपा वालों ने नईम के खेल में सेंध लगा दी है। और फतेह मोहम्मद की राजनीति स्मृति की राजनीति से फीकी पड़ गई है। गुवांवा गांव, गौरीगंज के रहने वाले फतेह मोहम्मद कई गैस एजेंसी के मालिक बताए जाते हैं। कम पढे लिखे फतेह मोहम्मद के गांव से भी लोक सभा चुनाव में कांग्रेस को भारी झटका लगा था। आगे की राजनीति को सफल करने के लिए अब ये चारों नेता कमजोर सावित होते जा रहे हैं।
       गौरी गंज के कुछ लोगों ने इस संवाददाता को बताया कि ‘अगर राहुल गांधी आगे का चुनाव अमेठी से लड़ना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें इन चारो लोगों को हटाना पड़ेगा। इन चारों की विष्वसनीयता अब लोगों में नहीं रह गई है। अमेठी वाले यह भी बताने से नहीं चुके कि वे लोग आज भी कांग्रेसी है लेकिन राहुल गांधी को उनके लोग यहां की असलियत की जानकारी नहीं देते और भाजपा मजबूती से यहां घूस रही है। संभव है कि  स्मृति इरानी प्रदेष चुनाव इसी गौरीगंज से लड़ेगी। और ऐसा हुआ तो आगे का चुनाव राहुल के लिए मुष्किल हो जाएगा। ऐसे में राहुल को किसी दक्षिण राज्य की ओर पलायन करना होगा। ऐसा होगा तो अमेठी को दर्द भी होगा और अफसोस भी।’
       साफ है कि अमेठी की कांग्रेसी  राजनीति में भाजपा की सेंधमारी हो चुकी है। समय रहते राहुल गांधी अमेठी को नहीं संजो पाते हैं तो अमेठी कांग्रेस से दूर हो जाएगाीे।   

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