Sunday, June 12, 2016

यमुना तीरे कीर्तन मंडली की राष्ट्रवादी बैठक




 
                यमुना तीरे कीर्तन मंडली की राष्ट्रवादी बैठक 

अखिलेश अखिल 

 इलाहाबाद में  यमुना के  तट पर बीजेपी की कीर्तन मंडली की बैठक बेहद राष्ट्रवादी है। कई लोगो ने पूछा की बीजेपी की कार्यकारिणी बैठक को कीर्तन मंडली कैसे कह सकते है ? सवाल कमजोड़ नहीं था।  सवाल के साथ  ही उन्होंने इसका उत्तर भी स्वयं  ही दे दिया था।  कहा - देखो भाई देश में राजनीति तो कई गिरोह करते है लेकिन बीजेपी की राजनीति गिरोह से आगे की है। यहाँ हर बात को पहले हिन्दू , राष्ट्रवाद  और भक्ति के तराजू पर तौला जाता है और तब आगे की राजनीति शुरू होती है।  आगे की राजनीति के पहले आडम्बर की तैयारी होती है और तब शिगूफा का ताना बाना तैयार किया जाता है।  अगर आप इसे कीर्तन मंडली कहते है तो आपकी मर्जी लेकिन एक बात जान लीजिए यही कीर्तन मंडली आज देश को पागल बनाये हुए है।  पहले की मण्डली कमजोड़ थी ,आज बेहद मजबूत और असरकारी है। मैंने कुछ सवाल पूछने की कोशिश की तो वे निकल गए।
         तो कहानी यह है की यमुना के तीर पर उत्तरप्रदेश की सत्ता पर कब्जा कैसे की जाय , इस पर बीजेपी अपने लोगो के साथ चिंतन मनन में जुटी है।  जुटना भी चाहिए।  चिंतन की रूप रेखा इतना भर है की कैसे उत्तरप्रदेश में फतह हो।  किसको नेता बनाया जाय ? किसकी विश्वशनीयता को बेचा जाए ? और कैसे लोगो को ठगा जाए ? आगे बढे इससे पहले यह साफ़ हो जाना चाहिए की नेता और पार्टी  देस और मूलक के लोगो को अब तक ठगती ही रही है।  कही राष्ट्रवाद के नाम पर ठगी ,कही विचारधारा के नाम पर ठगी , कही विकास के नाम पर ठगी , कही राम के नाम पर ठगी , कही सेकुलरवाद के नाम पर ठगी , कही गांधी परिवार के नाम पर ठगी , कही समाजवाद , दलितवाद  के नाम पर ठगी तो कही हिन्दू बनाम मुसलमान के नाम पर ठगी। लोग हमें अभी तक ठगते रहे और हम ठगते रहे।  धर्म,जाति , सम्प्रदाय ,लोभ , लालच , डर , दवंगै  के नाम पर हम लुटते रहे।  कहते है की लोभियों के देस में ठगों की जय जयकार।  यमुना के तट  पर जो हो रहा है उसके मूल में यही है।
          फिर सवाल है की इस कीर्तन मंडली में गांधी परिवार वाले वरुण गांधी कहा है ? इलाहाबाद की जो तस्वीर आ रही है उस्सवे साफ़ पता चलता है की वहा की दीवारे वरुण गांधी के पोस्टरों से भरी पारी है।  कई लोगो ने कहा की वरुण भी उत्तरप्रदेश  के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के दौड़ में है।  समझ नहीं पाया।  क्या बीजेपी वाले वरुण गांधी को सी एम उम्मीदवार बनाएंगे ?  अभी दो राज पहले ही तो राजनाथ सिंह के नाम पर मीडिआ में ख़बरें आयी की राजनाथ सिंह अगर चाहे तो बीजेपी उनके नाम की घोषणा कर सकती है।  यह भी समझ नहीं पाया।  इसमें राजनाथ सिंह की क्या चाहत है ? उनकी चाहत से तो कोई काम होता नहीं।  उनकी चाहत तो बहुत कुछ है , लेकिन होता कुछ भी नहीं।  फिर दूर दिन गोरखपुर से खबर आयी की योगी साहब भी मुख्यमंत्री बनने के लाइन में खड़े है।  सब जानते है की योगी और राजनाथ की नहीं पटती।  बीजेपी को भी  पता है और कुछ ज्यादा ही पता है।  कह  सकते   है की राजनाथ सिंह  का विरोध योगी के जरिए बीजेपी ही करा रही है।  ऐसे सवाल है की क्या यह पूरी राजनीति वरुण के लिए हो रही है।? हरगिज नहीं।  वरुण तास के पत्ते है।  उपयोग करने के लिए।  दो दिनों से एक और खबर प्रसारित हो रही है की वरुण कांग्रेस के साथ जा सकते है , सोनिया और मेनका के सम्बन्ध बेहतर हो रहे है।  क्या इनके सम्बन्ध कभी ख़राब थे ? क्या वरुण और राहुल , प्रियंका के प्रेम में कोई कमी है ? क्या वरुण , सोनिया गांधी की इज्जत नहीं करते ?  यही है कीर्तन होने से पहले की तैयारी।  इस तैयारी में उस हर उम्मीदवार की नाप तौल की गयी है और उसका  रिएक्शन  लिया गया है।  फीडबैक।
           किसी को किसी पर कोई यकीं नहीं।  ब्राह्मणो को राजपूतो पर यकीं नहीं।  दलित को पिछड़ो पर यकीं नहीं , और एक जाती के नेता को अपने जाती के दूसरे नेता पर कोई यकीं नहीं है।  और असली सवाल यही है की उत्तरप्रदेश  को जितने के लिए बीजेपी को किसी भी अगड़ी  जाती  के नेता पर  यकीं नहीं है।  और गांधी परिवार पर तो और भी नहीं।  वरुण गांधी बीजेपी के लिए बेहतर चेहरा हो सकते है लेकिन गांधी का पदनाम बीजेपी को जचता नहीं।  इन्तजार अभी और करना होगा।  सपा , बसपा , कांग्रेस  को धूल धूसरित करने वाले  किस नेता पर बीजेपी बाजी लगाती है पहले उसे देख लीजिए।  वरुण, राजनाथ, योगी , से लेकर तमाम मिश्रा , शर्मा , वर्मा  , तिवारी और द्विवेदी त्रिवेदी की राजनीति कम से कम  इस चुनाव में तो कुछ भी नहीं है।  वोट दिलाइये और बीजेपी को जिताइये  की भूमिका ही उनकी होनी है।  वरुण को अभी इन्तजार करना होगा।
         

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