Monday, July 18, 2016

नीतीश के खेल से भाजपा परेशा न


अखिलेश  अखिल
उत्तरप्रदेश  के  फूलपुर में नीतीश  की रैली ने  कई पार्टियों के लिए सबक सिखाने की दस्तक दे दी है। सपा, बसपा की राजनीति को कौन कहे नीतीष की फूलपुर रैली से अब भाजपा की सांसे भी फूलने लगी है। नीतीश  के हाथ से बिहार में पटकनी खा चुकी भाजपा यूपी में अब नीतीश  को हल्के में नहीं ले सकती। नीतीश  की रैली में बढती भीड़ से घबराई भाजपा नए सिरे से रणनीति बनाने लगी है। वह तो पहले से ही कांग्रेस से परेषान थी अब नीतीश  की धमक ने उसे और चैंकन्ना कर दिया है।  बीजेपी नेताओं की नींद उड़ाने के लिए नीतीश कुमार अब उत्तरप्रदेश में घुस आए हैं। शुरुआत उन्होंने बिहार की सीमा से लगे पूर्वी उत्तर प्रदेश से की। लेकिन जब नीतीश कुमार की सभाओं में अच्छी भीड़ जुटने लगी तो उनके हौसले और मंसूबे दोनों बढ़ने लगे और अब उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश पर नजरें टिका दी है। फूलपुर की कामयाब रैली के उसकी एक बानगी है । अगली रैली अब लखनउ में होने वाली है। जाहिर है नीतीश  कुमार को बिहार के बाद यूपी में नया स्पेस मिलता दिख रहा है।  नीतीश  के लिए यह स्पेस 2019 में ज्यादा कारगर सावित होगा।
     रविवार को नीतीश कुमार इलाहाबाद के करीब फूलपुर में अपनी जनसभा की। फूलपुर वही संसदीय क्षेत्र है जो एक जमाने में जवाहरलाल नेहरू की सीट हुआ करती थी और अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य वहां के सांसद हैं। यानी नीतीश कुमार सीधे बीजेपी के मुखिया के घर में घुसकर उसे चुनौती दे रहे हैं। नीतीष ने प्रधानमंत्री मोदी को मां गंगा को ठगने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें पूरे देष में षराब बंदी पर रोक लगानी चाहिए। नीतीष ने मोदी की भाषा में ही मोदी को घेरने की कोषिष की। उन्होने कहा कि मोदी जी कहते हैं कि गांधी जी के विचारों से लैष होकर उन्होने स्वच्छता का अभियान ष्षुरू किया था । फिर गांधी जी जिस श राब के विरोध में बोलते थे उस पर रोक क्यों नहीं लगाते। यूपी की अखिलेष सरकार पर भी नीतीश  खूब बोले। उन्होने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत षराब पर रोक लगानी चाहिए। अगर आज यहां शराबबंदी होती तो एटा ३० से ज्यादा लोगों की मौत नहीं होती। लगभग 2 लाख से ज्यादा भीड़ को देखकर नीतीष का उत्साह देखते ही बनता था।
इलाहाबाद की रैली को लेकर नीतीश कुमार इतने गंभीर थे कि जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और के सी त्यागी, पहले से ही फूलपुर में डटकर रैली को सफल बनाने के लिए जी जान लगा रहे । इलाहाबाद के बाद नीतीश कुमार का अगला ठिकाना कानपुर होगा। अभी से एलान किया जा चुका है कि अगले महीने नीतीश कुमार कानपुर के घाटमपुर में जनसभा करेंगे। इससे पहले नीतीश कुमार पूर्वांचल के बनारस व मिर्जापुर में सभाएं करके यह दिखा चुके हैं कि उत्तर प्रदेश को लेकर उनके इरादे क्या हैं। नीतीश कुमार शराबबंदी के जुमले के साथ यूपी में घुसे हैं और इसी के नाम पर यहां के वोटरों, खास तौर पर महिलाओं को रिझाने में लगे हैं। बिहार में नीतीश कुमार यह देख चुके हैं कि शराब बंदी के नाम पर उनको महिलाओं से जबरदस्त समर्थन मिला।
     लेकिन शराब बंदी तो यूपी में घुसने का महज एक बहाना है, नीतीश कुमार की नजर दरअसल कुर्मी वोट बैंक पर है जो इस बार के चुनाव में किसी का खेल बना और बिगाड़ सकती है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी, पटेल, शाक्य, राजभर, कुशवाहा और  मौर्य लगभग एक सी जातियां हैं और यह पूरे उत्तर प्रदेश में फैले हुए हैं। लेकिन यूपी के 16 जिलों में इनकी आबादी 6 प्रतिशत से लेकर 11 प्रतिशत तक है। लगभग 100 सीटों पर हार जीत की कहानी इन्ही जातियों के उपर रहती है। यही वजह है कि इस चुनाव में बड़े स्तर पर इन जातियों के बीच राजनीतिक दलों की गोलबंदी षुरू हो गई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में इन जातियों को एक अहम वोट बैंक माना जा रहा है और हर पार्टी इन को लुभाने में लगी है। कुर्मी वोट बैंक को अपना बनाने की गरज से ही बीजेपी ने केशव प्रसाद मौर्य को यूपी बीजेपी की कमान सौंप दी और अनुप्रिया पटेल को मोदी के मंत्रिमंडल में जगह मिली ।
     समाजवादी पार्टी ने भी मौके की नजाकत को समझा और पुरानी दुश्मनी भूलकर मुलायम सिंह यादव ने बेनी प्रसाद वर्मा को गले से लगाया और राज्यसभा भेज दिया। इसी जाति से संबंध रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य जब मायावती से बगावत करके अलग हो गए तो बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी दोनों ने उन्हें चारा डाला। पिछले हफ्ते मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा ने भी स्वामी प्रसाद मौर्या से मुलाकात की और उन्हें एनडीए में आने का न्योता भी दिया। लेकिन अभी तक स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वह फिलहाल 22 सितंबर को लखनऊ में अपनी शानदार रैली करने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
      बीजेपी में अमित शाह और उनकी टीम ने पूरी ताकत लगा रखी है कि किसी तरह से कुशवाहा, कुर्मी, पटेल वोट बैंक को अपने साथ जोड़ा जाए। लेकिन नीतीश कुमार देश में कुर्मियों के सबसे कद्दावर नेता हैं और उनका इस तरह से यूपी में सक्रिय होना बीजेपी की कोशिशों में  पलीता लगा सकता है। कानपुर, इलाहाबाद, फतेहपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, जालौन, उन्नाव, प्रतापगढ़ कौशांबी और श्रावस्ती के इलाकों में कुर्मियों की आबादी बहुत है और इसीलिए नीतीश कुमार इन्हीं इलाकों में पूरी ताकत लगा रहे हैं। बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह भी है की नीतीश कुमार अपनी ताकत बढ़ाने के लिए छोटी-छोटी पार्टी और नेताओं को साथ जोड़ने में भी लग गए हैं। बहुजन समाज पार्टी से अलग हुए आर के चैधरी ने नीतीश कुमार से हाथ मिला लिया है और 26 जुलाई को लखनऊ में होने वाली होने वाली उन उनकी रैली में नीतीश कुमार मंच पर मौजूद रहेंगे।

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