Sunday, July 3, 2016

वेतन बढोतरी का खेल


 अखिलेश अखिल 

केंद्र सरकार अपने 93 लाख कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन में भारी बढोतरी की तैयारी में है। कर्मचारियों के घर पर पहले से ही घी के दीए जलाए जा रहे हैं। उनके बच्चे और पत्निया गर्मी की तपिस से बचने के लिए ठंढ इलाकों की सैर कर रहे हैं। जो अभी तक बाहर नहीं जा सके है, अब निकल रहें हैं। एरियर के पैसे को किसी तरह खपाना है। केंद्र सरकार  के कर्मचारी मोदी सरकार को नमन करते फिर रहे हैं। कहते हैं कि मोदी सरकार ने अपने 2 सालों के भीतर कई राज्यों में जीत हासिल की है। कई और राज्यों में जीत की संभावना बनी हुई है। प्रधानमंत्री के सलाहकारों ने षायद सलाह दी है कि कर्मचारियों की वजह से ही उनकी जीत हुई है और आगे भी ऐसा ही होना है। सरकार भी जानती है कि अधिकतर कर्मचारी कोई काम नहीं करते। या तो उनके पास कोई काम नहीं है या फिर वे काम करते नहीं। देष की जनता का सरकारी कर्मचारियों पर यकीन नहीं है। वे इन कर्मचारियों को निठल्ले समझते हैं। इस बात में भले ही पूरी सच्चाई हो लेकिन इसे झुठलाया भी नहीं जा सकता।
     सरकार की योजना अब केंद्रीय कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 23 हजार 500 रूपए करने की है। इसे मोदी सरकार की सौगात के रूप में माना जा रहा है। मोदी जी सरकार में आने से पहले सबके खाते में कुछ कुछ देने की बात कही थी। विपक्षी वाले मोदी जी के इस वादे का बहुत खिल्ली उड़ा रहे थे। लेकिन अब कोई खिल्ली नहीं उड़ाएगा। कमसे कम 93 लाख कर्मचारियों के खाते में कुछ से ज्यादा राषि तो रही है। कर्मचारी खुष हुआ तो राजनीति सहज हो जाएगी। कमसे कम दो चार साल तो कोई कुछ नहीं बोलेगा। उत्तरप्रदेष चुनाव में इस वेतन बढोतरी का कमाल देखने को मिल सकता है। कहते हैं कि इस वेतन बढोतरी से केद्र सरकार के खाते में सवा लाख करोड़ से ज्यादा का भार पड़ने वाला है। लेकिन सरकार को इससे भला क्या मतलब?
      सवाल यह है कि क्या इस वेतन बढोतरी का असर आम जनता पर नहीं पड़ेगा? सवा सौ करोड़ की आवादी वाले इस देश  में 93 लाख कर्मचारियों को खुष करने से सरकार की नीतियों को कर्मचारी लोग जनता तक कितना चहुंचा पाते हैं यह तो देखना होगा लेकिन इनके बढे वेतन से आम जनता महंगाई की मार से और दब जाऐंगे। वेतन बढने से पहले ही महंगाई कुलांचे मार रही है जिस दिन वेतन बढने की घोषणा हो जाएगी उस दिन से आम जनता का जीना मुष्किल हो जाएगा। लेकिन सरकार को इससे क्या मतलब?
     मोदी सरकार को याद करना चाहिए कि जो वेतन मान केंद्रीय कर्मचारियों को वे दे रहे हैं उसके पीछे बेहतर जीवन यापन जीने की बात होगी। ऐसा होना भी चाहिए। लेकिन अगर यह भी  मान लिया जाए कि 93 लाख कर्मचारियों और परिवार के लोगों ने भाजपा को वोट दिया है तो सत्य यह भी है कि इस देष की आम जनता भी बड़ी संख्या में भाजपा को समर्थन किया है। फिर उन लोगों के बारे में मोदी सरकार की क्या योजना है? क्या आम जनता को बेहतर जीवन जीने का हक नहीं है? निजी कंपनियों में काम करने वाले लोगों की हालत क्या है इसकी जानकारी भी उनकी सरकार के लोगों को होगी। राज्य सरकार और निजी कंपनियों की न्यूनतम वेतन क्या है इसकी भी  जानकारी उन्हें होगी ही। 20 करोड़  से ज्यादा लोग इस देष में ऐसे है जो विकास के सबसे नीचले पैदान पर खड़े है। उनके लिए विकास एक सपना भर है। योजनाएं उनके लिए चलती दिखती है लेकिन वह ऐसे लोगों के पास आज तक नहीं पहुंची। इन लोगों में से ज्यादातर लोगो ने  अच्छे दिन की आस में मोदी के समर्थन में वोट डाला होगा। उनके लिए, उनकी बेहतरी के लिए कोई योजना है  मोदी सरकार के पास?

     फिर देष का मध्यम वर्ग जिस हालात से गुजर रहा है इसकी भी जानकारी मोदी के लोगों को होगी। दिल्ली जैसे ष्षहर में एक पांच आदमी के परिवार को रहने के लिए कम से कम 28 हजार रूपए की जरूरत होती है। लेकिन यहां की अधिकतर आवादी 10 से 15 हजार की नौकरी करके केवल जीवित रहने का स्वांग करता दिख रहा है। ऐसे में समाज के बीच बैमनष्यता और बढने की संभावना है।

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