Saturday, July 30, 2016

घाट -घाट का पानी पीए नेताओं का घाटों के शहर पर धावा


अखिलेश  अखिल 
 घाटों की सांस्कृत नगरी वाराणसी पर कब्जा करने की रणनीति बन गई है।घाट घाट का पानी पीए अलग अलग दल के नेता बनारस की राजनीति को बदलने के फेर में जुट गए हैं। सबने अपनी  सेनाएंे तैयार कर ली है। सेनाओं को पाठ पढा दिया गया है। सेनाओं को शिक्षित  और दीक्षित कर दिया गया है। यूपी के अगले विधान सभा चुनाव में यूपी के गणित को बदलने के लिए भाजपा की रण चैकरी को मात देने के लिए सपा, बसपा के अलावा कांग्रेस और जदयू कुछ ज्यादा ही तल्ख तेवर अपनाए हुए है।  खासकर कांग्रेस की रणनीति  इस बार यूपी की राजनीति में किंग मेकर की हालत में पहुंचने की है।  इस रणनीति को अमली जामा पहुंचाने के लिए कांग्रेस सबसे पहले मोदी के बनारस को हड़पने की है। इसी नीति के तहत सोनिया गांधी बनारस पहुंच रही है । अपने दलबल के साथ। बनारस प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय इलाका है। पिछले लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जी यहां से चुनाव लड़े और षान से जीते भी। चुनाव लड़ते वक्त मोदी जी ने बनारस वालों को कहा था कि घाटों की इस धर्म नगरी को क्योटो षहर बना देंगे। भगवान आषुतोष की नगरी आधुनिक षहर बनेगा। लोगों को यकीन हो गया था। एक तो भगवान की राजनीतिक रंग में रंगी भाजपा का आभा मंडल और दूसरी ओर मोदी जैसे तपे तपाए नेता के वादे । धर्म नगरी लोग झासे में आ गए और मोदी जी के नाम पर अपना मत दे दिया।  लेकिन अब तक बनारस क्योटों नहीं बन सका। आधुनिकता नहीं आई। कांग्रेस की राजनीति से ओतप्रोत यह नगरी फिर कुंलाचे मार रही है।  वहां की घाटें फिर बदलाव की राजनीति तलाष रही है। कांग्रेस  अगले चुनाव में मोदी की राजनीति को पलटने के फेर में है। भला कांग्रेस से ज्यादा घाट घाट का पानी किसने पीया है। एक से बढकर एक खिलाड़ी। 
       कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दो अगस्त को बनारस में रोड शो करेंगी। कांग्रेस का इरादा तो नरेंद्र मोदी को उनके ही घर में ही घेरने का है। ये सोनिया गांधी के रोड शो का आइडिया भी प्रशांत किशोर यानी पीके का है। अगले विधान सभा चुनाव में बीजेपी को वाराणसी में कितनी सीटें मिलती है इस पर देश भर की नजरें होगी। कांग्रेस मोदी के संसदीय क्षेत्र में उनका खेल खराब करना चाहती है।  कांग्रेस की तरह ही नीतीश कुमार की भी  भाजपा को पूर्वी यूपी में पटखनी देने के मूड में हैं। इन इलाकों में कुर्मी वोटरों की अच्छी खासी आबादी है, जिन्हें नीतीश अब मोदी से दूर करना चाहते है।
          बनारस के बहाने मोदी सरकार पर हमला करने का अखिलेश यादव भी कोई मौका नहीं चूकते। मसला नरेंद्र मोदी का वाराणसी को क्योटो शहर बनाने का वादा हो या फिर गंगा सफाई का, यूपी के सीएम मोदी के खिलाफ तंज करना नहीं भूलते । राज्य सरकार वाराणसी में घाटों को सुन्दर बनवाने के अलावा वरुणा नदी पर रिवर फ्रंट बनवा रही है। वाराणसी में ही सबसे पहले हर हर मोदी, घर घर मोदी के नारे लगे थे। लोकसभा की 80 में से 71 सीटें बीजेपी जीत गयी। वाराणसी के सभी आठ विधान सभा सीटों पर मोदी आगे रहे। लेकिन असली चुनौती तो अब आगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पता है रास्ता कांटो भरा है। इसलिए हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में चंदौली के एमपी महेंद्र पांडे को ले लिया।         जातिगत समीकरण बैठाने के लिए पड़ोसी सांसद अनुप्रिया पटेल को भी मंत्री बना दिया। अनुप्रिया कुर्मी समाज से है और मिर्जापुर से अपना दल के टिकट पर एमपी बनी है। केशव मौर्या को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाने में भी बनारस फैक्टर है। वाराणसी में विधान सभा की आठ सीटें है। इनमे से एक पर कांग्रेस का, तीन पर बीजेपी का, दो दो पर बीएसपी और एसपी का कब्जा है। एक जमाना था जब बनारस कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। अगले विधान सभा चुनाव के बाद यूपी में सरकार किसी की बने, लेकिन वाराणसी के नतीजे नरेंद्र मोदी के लिए इज्जत बचाने की लड़ाई से कम नहीं । देखना होगा कि कांग्रेस की हूंकार और सपा, बसपा की रणनीति बनारस की राजनीति को कितना बदलती है। लेकिन एक बात तय हो गया है कि घाटों का षहर बनारस तरह तरह के झेडे बैनर लिए किसिम किसिम के नेताओं से भर गए हैं ।

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