Monday, July 4, 2016

भारतीय मिसाइल सुरक्षा से पाकिस्तान परेशा न- मानस विहारी वर्मा


अखिलेश अखिल 
आज जिस तेजस लड़कू विमान की चर्चा दुनिया भर में हो रही है,उसे बनाने वाले  बिहार के महान वैज्ञानिक डा0 मानस बिहारी वर्मा दरभंगा षहर से बाहर एक छोटे से मकान में रह रहे हैं।  डीआरडीओ और एरोस्पेस के महान  वैज्ञानिक एमबी वर्मा  अपनी बहन के एक छोटे से मकान में रहते हुए दुनिया भर के वैज्ञानिक शोधों  पर भी नजर रख रहे हैं।  तेजस के प्रमुख  वैज्ञानिक वर्मा डीआरडीओ की परियोजना के तहत काम करने वाले एयरोनाटिकल डेवलपमेंट एजेंसी, एडीए निदेश क थे और लाईट कंबैक्ट एयरक्राफ्ट के प्रोग्राम डायरेक्टर।  डा0 वर्मा पूर्व राष्ट्पति अब्दुल कलाम के वे खास सहयोगी रहे हैं और उनके प्रषंसक भी।  डा0 वर्मा अविवाहित हैं।  डा0 वर्मा  पिछले कुछ साल से ग्रामीण भारत को विज्ञानमय करने के प्रयास में लगे हैं। बिहार में विज्ञान के प्रति छात्रों में रूचि बढाने के लिए वे कई तरह के प्रयोंगो के साथ बच्चों के बीच विज्ञान को बढावा दे रहे हैं। हालाकि विहार सरकार अभी तक डा0 वर्मा के प्रयोगों को अमली जामा पहनाने में सफल नहीं हो पायी है।  एमबी वर्मा से अखिलेश  अखिल की हुई बातचीत के अंश ....

 तेजस की सफलता से आप कितना खुश  है?

 बहुत खुश  हूं। हमारे वैज्ञानिक बेहतर काम कर रहे हैं। तेजस की मारक क्षमता बेजोड़ है। यह नौ सेना के लिए भी उपयोगी है। वह इसका इस्तेमाल कर सकती है। एक बात और बता दें कि एयरास्पेस का काम जटिल और लंबा होता है। कई लोग कहते हैं कि तेजस में काफी समय लगा । ऐसा नहीं है। 2004 में इसका दूसरा फेज षुरू हुआ और परिणाम आपके सामने है। कई और योजनाओं पर भी हमलोग काम कर रहे है।
  
बिहार के ग्रामीण स्कूलों में विज्ञान को आगे बढाने और छात्रों में  विज्ञान के प्रति रूझान बढाने के आपके मोबाईल साइंस लैबोटरी जैसे  प्रयास को काफी सराहा जा रहा है ।

इसमें सराहना की कोई बात नहीं है। इंसान को अपना काम करना चाहिए। हर आदमी को अपनी क्षमता के अनुरूप समाज को कुछ देने की जरूरत है। डीआरडीओ में हम कलाम साहब के अनुयायी रहे और उनसे काफी कुछ सीखा भी ।हम तेजस के निर्माण से भी जुड़े रहे और सफल भी रहे । नौकरी से अवकास पाने के बाद हम वही कर रहे हैं जो कलाम साहब चाहते हैं। ग्रामीण इलाकों के छात्रों  में विज्ञान को भारी विषय माना जाता है औ बच्चे इससे भागते रहते हैं। हम मोबाईल साइंस लायबोटरी के जरिए इन छात्रों को विज्ञान की षिक्षा देने में लगे हैं। छात्रों की इसमें रूचि बढ रही है।

क्या बिहार सरकार इसमें सहयोग कर रही है?
इसमें बिहार सरकार का कोई सहयोग नहीं है। आंध्रा की विकसित भारत फाउंडेशन और बंगलोर की अगस्त्य इंटरनेषनल फाउंउेषन जैसी गैर सरकार संगठन इसमें मदद कर रही है। बिहार सरकार इसमें हाथ बढाए तो ब्यापक स्तर पर ग्रामीण छात्रों को आगे बढाने में मदद मिल सकती है ।

आप बिना प्रचार प्रसार के इतना बड़ा काम कर रहे हैं?
इंसान को अपना काम चुप रहकर ही करना चाहिए। अपनी प्रषंसा सुनने से परहेज करनी चाहिए।जो लोग प्रषंसा पाने के लिए काम करते हैं, वे सही काम नहीं कर सकते । हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और समाज देष के निर्माण के लिए सदा आगे रहना चाहिए ।

आपको लगता है कि मोबाईल साइंस लैबोटरी ग्रामीण बच्चों के लिए बरदान के समान है?
 गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है। एक से बढकर एक प्रतिभा गांवों में छुपी है। जरूरत है उसे तरासने की ।हम प्रयास में लगे हैं और तय मानिए आने वाले दिनों में गांव के बच्चे कमाल करेंगे। हम जिस तरह से स्कूल के बच्चों को बड़ी वैज्ञानिक समस्या को जब प्रायोगिक तौर सामने लाते हैं तो बच्चे झूम जाते हैं।

एरोस्पेस के महान वैज्ञानिकों में आपका नाम  है। इस क्षेत्र में देश  कहां है?
 देखिए, यह क्षेत्र बड़ा ही सेंसेटिव है। ज्यादा कुछ बोलना ठीक नहीं है ।लेकिन इससे जुड़े कार्यक्रम लंबे होते हैं ।इसमें भविष्य का ब्लू प्रिंट तैयार रहता है। हमलोग उस पर काम करते रहते हैं। अभी हम सबसे ज्यादा सुरक्षित सैटेलाइट और एरोस्पेस पर काम कर रहे हैं। 

क्या इन काय्रक्रमों पर राजनीतिक उठापटक का असर नहीं होता?
 इस पर राजनीति का असर न के बराबर होता है । सरकार बदलती रहती है लेकिन हमारा डीआरडीओ अपना काम करता रहता है। चूकि देश हित से जुउ़े कार्यक्रम कोते हैं इसलिए इस पर असर नहीं होता।

डीआरडीओ अभी सबसे महत्वपूर्ण काम क्या कर रहा है?
सारे कामों की चर्चा तो नहीं की जा सकती लेकिन हम मिसाइल सुरक्षा पर सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं।  और इसमें हम कई देषों से आगे हैं। पाकिस्तान समेंत कई देष हमारे इस प्रयास से खासा परेषान है। और आप को बता दें कि हमारी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली इतनी मजबूत हो गई है कि पाकिस्तान को अब छोटे छोटे बम बनाने पड़ रहे हैं। 
अन्य विकसित देशो  की तुलना में हमारा एरोस्पेस कहां खड़ा है?  

 पहले हम लोग विकसित देषों की तुलना में 20 से 30 साल पीछे थे अब ऐसा नहीं है।कुछ तकनीक में हम उनके बराबर है, कुछ तकनीक ऐसे हैं जिसमें हमें और काम करना है। हमें संसाधन मिले तो काफी कुछ करने की स्थिति में हम आ जाऐंगे।  तकनीकी स्तर पर देखें तो हम चीन और पाक से हम पीछे नहीं हैं। कुछ मामलों में तो हम काफी बढ गए हैं।  साफ्टवेयर के मामले में हम चीन से आगे जा चुके हैं। चूकि चीन इन सब पर संसाधन ज्यादा खर्च कर रहा है  जबकि हम उस हिसाब से खर्च कम कर रहे हैं । फिर हमारी कुछ आंतरिक समस्या भी है ।
 आपका इशारा राजनीति की ओर तो नही? 

आप चाहे जो भी माने। हमारी सोंच है कि विज्ञान और वैज्ञानिक क्षेत्रों  के कामों में कोई रूकावट नहीं आना चाहिए।  विकास के जुड़ी  संस्थाओं  को मजबूत करने की जरूरत है। संसाधन और मैन पावर की बर्वादी न हो इस पर ध्यान देने की जरूरत है । किसी भी हालत में ज्ञान की बर्वादी न हो ।

 हमारा इसरों कैसा काम कर रहा है?

इसरों बेहतर काम कर रहा है। और उसे अपना काम आगे करते रहना चाहिए।  उसके काम में रूकावट नहीं आना चाहिए । जो लोग वहां काम कर रहे हैं बड़े ही समर्पित लोग हैं। बेवजह उन्हें फंसाने का खेल नहीं करना चाहिए। फिर वे भाग सकते हैं वहां से। इसरों रडार टेक्नोलाजी में जो काम कर रहा है काबिलेतारिफ है। विज्ञान संस्थान को राजनीति से दूर रखना चाहिए 

No comments:

Post a Comment