Saturday, August 6, 2016

अमित शाह के रुपाणी गुजरात के नए शाह


अखिलेश  अखिल
अब गुजरात वैसा नहीं रहा। पटेलों की राजनीति अब वैसी नहीं रही। पटेलों की धमक अब कमजोर हो गई। भाजपा अध्यक्ष अमित षाह ने अपनी कूटनीति से पटेल राजनीति को गुजरात में कमजोर करने का खेल किया है। संभव है इसके पीछे पटेलों के आंदोलन के मामले हो। अब गुजरात के पटेल लोग आगे की रणनीति क्या बनाते हैं यह देखना होगा। ये बातें इसलिए कही जा रही है कि आज जिस तरह से आनंदी के घोर विरोधी और पहली बार विधायक बने विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाने का खेल किया गया है वह पटेल समाज पर किसी तमाचा से कम नहीं। माना जा रहा है कि ष्षाह की इस राजनीति  का असली खेल अगले साल के गुजरात चुनाव में देखने को मिलेगा।
      आज गुजरात में खुब राजनीति हुई। नए मुख्यमंत्री बनाने के लिए सरोज पांडे और नीतीन गडकरी गुजरात पहुंचे। अमित शाह वहां पहले से ही विराजमान थे। सुबह तक नीतीन पटेल को मुख्यमंत्री बनाने की बात चल रही थी। लेकिन शाह ने जैसे ही अपनी छाया विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही तो आनंदी बेन पटेल भड़क गई। उन्होने नीतीन का समर्थन किया और रूपाणी का विरोध किया। बात यहां तक ब्ढ गई कि शाह और आनंदी के बीच गरमा गरम बहस भी हो गई। माहौल गर्म होते देख गडकरी और षाह अलग होकर संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क साधा। माना जा रहा है कि मोदी के आदेष के बाद ही तय हुआ कि रूपाणी मुख्यमंत्री बनेंगे और नीतीन पटेल उपमुख्यमंत्री। सुबह तक संभ्ज्ञावित मुख्यमंत्री के तौर पर कई मीडिया कर्मियों को नीतीन पटेल साक्षात्कार भी दे चुके थे।
         कई लोग सवाल कर सकते हैं कि आखिर रूपाणी अचानक मुख्यमंत्री कैसे बन गए। आपको बता दें कि रूपाणी जैन समाज से आते हैं और इस समाज का गुजरात में कोई बड़ा वोट बैंक भी नहीं है। लेकिन रूपाणी के पक्ष में एक बात सबसे मजबूत रही है कि वे अमित षाह के सबसे करीबी माने जाते हैं और गुजरात में रूपाणी कोष्षाह का छाया माना जाता है।  खबर है कि जब नरेंद्र मोदी केंद्र की राजनीति करने जब दिल्ली बढ रहे थे तब आनंदी बेन को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। उसके पीछे की राजनीति ये थी कि आनंदी सबसे सीनियर मंत्री भी थी और पटेल समाज से आती थी। वही पटेल समाज जसो पिछले कई चुनाव से गुजरात में भाजपा की सरकार बनाती आ रहा था। लेकिन अब सब बदल गया है। पपटेल आंदोलन के बाद से ही मोदी और षाह के निषाने पर पटेल समाज आ गया था। यही वजह है कि गुजरात में पहली दफा उपमुख्यमंत्री का पद बनाया गया। नीतीन पटेल को षांत करने के लिए। जब यह फैसला हो रहा था वहां आनंदी बहुत भावुक भी हो गई थी। आनंदी अपनी भावना को छुपा नहीं पाई और कहने लगी कि पिछले दो साल से षाह और उसके लोगों ने उसकी सरकार को कमजोर करने को खेल किया। नीतीन पटेल की लंबी राजनीतिक यात्रा रही है और और पटेलों की राजनीति को साधने में वे काफी आगे रहे हैं।  नीतीन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाने के बाद पटेल ओदेलन के नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि नीतीन को अपने पद से हट जाना चाहिए।
      तो क्या माना जाए कि मोदी के काल का गुजरात अब बदल गया है। बदल गई है वहा की राजनीति। क्या षाह के सामने अब किसी की कोई औकात नहीं। कह सकते हैं कि आगामी चुनाव में इसका असर पड़ेगा। निष्चित तौर पर पटेलो की राजनीति बदल सकती है। गुजरात भाजपा में गुटबंदी बढ सकती है। संभव है कि भाजपा का एक हिस्सा कांग्रेस या दूसरी दलों में जा सकते हैं। केजरीवाल की पार्टी को इसका लाभ्ज्ञ सबसे ज्यादा मिल सकता है।
     

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