Sunday, August 7, 2016

अलगाववादियों को पहले बंद कीजिये मादी जी !

अखिलेश अखिल 
हम कह सकते है की इस देश का असली दुश्मन भले ही पाकिस्तान समर्थक आतंकी है  लेकिन  दुसरा सच  यह भी है की देश के भीतर जो अलगाववादी तत्व बैठे हुए  है वे पाकिस्तानी आतंकी से भी ज्यादा खतरनाक है . विदेशी दुश्मनों से आप लोहा ले सकते है लेकिन देशी गद्दारों से आप भला कैसे निपट सकते है जब धर्म के नाम पर वोट की राजनीति की जाती रही हो . हमें पाकिस्तानी और पाक समर्थित आतंकियों से मौत का खौफ हो सकता है ,क्योंकि वे कही भी किसी भी जगह कुछ भी कर सकते है . उनसे हम निपट भी लेते है और देश की जनता जानती है की जिस दिन भारत यह तय कर लेगा की की अब हद से बाहर की बात हो गयी तो पाक समर्थित आतंकवाद ख़त्म भी हो सकता है . लेकिन ऐसा होना नहीं है . जो देश आतंकियों को मारने के लिए अपनी सेनाओं को तो हर जगह तैनात लिए हुए है लेकिन जो लोग आतंकियों को पनाह दे रहे है , उसे बौधिक बल प्रदान कर रहे है , देश को बांटने की बात कर रहे है , पाकिस्तान के समर्थन में भारत सरकार से बाते करते फिर रहे है उनसे भला कैसे निपटा जाए ? हो सकता है की भारत सरकार और राजनितिक दलों को इन अलगाववादियों से वोट का लाभ मिलते हो लेकिन देश की सीसी भी जनता से पूछा जाए तो एक ही जवाब होगा की ये अलगाववादी देश के लिए कलंक है ,देश पर बोझ है .
       तो सवाल है की देश की सरकार अब तक कर क्या रही है ? देश बड़ा या वोट ? कहने के लिए भले ही हर भारत वासी यह कहते फिर रहे हो की देश भक्ति सबसे ऊपर है . लेकिन इसमें पूरा सच नहीं है . पहले लोगो को लाभ चाहिए . पैसे चाहिए . वोट चाहिए . यही चाहिए वाली बात इस देश के नेताओं को रीढ़ विहीन किये हुए है . जम्मू कश्मीर की समस्या क्या है ? जम्मू कश्मीर में पाक समर्थित आतंकी वहा इसलिए दहशत फैलाते है की कश्मीर पाक का अंग बन जाए . इसके लिए पाकिस्तान कभी अपने सेना के जरिये तो कभी आतंकियों के जरिये भारत को डिस्टर्ब करता रहता है . कश्मीर में रह रहे भारत विरोधी नेता जिसे अलगाववादी नेता के नाम से जानते है वे पाकिस्तान के एजेंट है . पाकिस्तान से भी पैसे खाते है और भारत से सुरक्षा और धन वसूल करते है . प्रत्यक्ष रूप से जितना आतंकी इस देश के लिए खतरा नहीं है उससे ज्यादा ये अलगाववादी देश के लिए नासूर बने हुए है .कश्मीर की जनता शान्ति चाहती है , रोजगार चाहती है और विकास चाहती है . ऐसे सोच वाले लोगो की आवादी बहुमात वाले है . लेकिन अल्पमत वाले अलगाववादी देश को बाटने और आतंक को बढ़ावा देने में लगे है . 
          जान लीजिये कि लंका में रावण की मौत केवल इसलिए हुयी थी की बिभीषण राम के साथ था . धर्म की रक्षा के लिए बिभीषण ने राम का साथ दिया यह अलग बात हो सकती है लेकिन उसने अपने भाई का विरोध करके उसके मौत समेत लंका दहन का कारण भी बना . बिभीषण लंका के लिए देशद्रोही ही तो था . कश्मीर के अलगाववादी उसी देशद्रोही की पंक्ति में खड़े है . वे रहते है इस देश में और गाते है पकिस्तान का पहले तो इन बिभिशानो से सरकार को मुक्त होना चाहिए . 
    सरकार ने भी इन अलगाववादियों  की राजनीति को देख समझ रही है . लेकिन सरकार मौन है . कांग्रेस की सरकार रही हो या फिर किसी और की अलगाववादी हमेशा फलते फूलते ही रहे है . जो लोग देश को बांटने की बात करे उससे हम किस आधार पर बात करते है समझ से पड़े है . साफ़ है की ये अलगाववादी भारत को अपना देश नहीं मानते . ये हमारे मेहमान है जिसकी खातिरदारी और सुरक्षा का जिम्मा भारत सरकार पर है . फिर उन नक्सलियों से सरकार क्यों परेशान है ? अलगाववादी भारत को अपना देश नहीं मानते . वे अलग होने की बात करते है . उधर नक्सली इस देश की कानून और संविधान को नहीं मानते . लेकिन देश को मानते है . नक्सली गरीबो की साम्यवादी सरकार की कल्पना में जी रहे है और खून की होली खेल रहे है . लेकिन किसी भी नक्सली नेता को सरकार सम्मान और सुरक्षा नहीं दे रही है . लेकिन अलगाववादी को? पता नहीं यह कैसा देश है और कैसी सरकार है ? 
     प्रधानमन्त्री मोदी की सरकार से उम्मीद जगी थी की वह कश्मीर की समस्या को हल करेगी . इसी उम्मीद में उसने अलगावादी नेताओं का समर्थन करने वाली पार्टी पी दी पी वाली महबूबा से मिलकर सरकार भी बना ली . लेकिन हुआ क्या ? कह सकते है की सरकार दोगली निति पर चल रही है .वह आतंकवाद से लड़ना भी चाहती है और आतंकवादी और अलगाववादी को पनाह भी देना चाहती है . यह दोनों हालत में कश्मीर की जनता तबाह और तंगहाल है . देश की एक बड़ी राशि कश्मीर को सम्हालने में खर्च हो रही है . हमारे सिपाही मर खप रहे है . जनता की गाढ़ी कमाई पर अलगाववादी मौज कर रहे है . यह कब तक चलेगा मोदी जी . 

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