Saturday, September 3, 2016

कांग्रेस में विधायको की नटलीला और राम-भारत मिलाप


अखिलेश अखिल 
 चुनावी मोड पर खड़ा उत्तरप्रदेश में राजनीति ही केवल गर्म नहीं है कांग्रेस की राजनीति भी करवट लेती दिख रही है। यहाँ हर दिन दलबदलुयो की पैतरेबाजी से जनता तो हतप्रभ है  ही पार्टियों के भीतर भी बेचैनी है।  इस पैतरेबाजी और बेचैनी के बीच पहली खबर तो यही है की यूपी में कांग्रेस के कई और  विधायक पार्टी छोड़कर बसपा या फिर बीजेपी की शरण में जाने वाले है।  माना जा रहा है की कोई १० और विधायको ने  कांग्रेस को अलविदा करने की पूरी तैयारी कर ली है।  अभी इनका नाम छापना ठीक नहीं होगा।  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताविक पश्चमी उत्तर प्रदेश से चुनाव जीते ३ विधायक की बसपा और बीजेपी से बात हो गयी है।  ३ विधायक मध्य यूपी के है जिन्होंने पार्टी से मोहभंग  कर दूसरी पार्टी में जा सकते है।  पूर्वी उत्तरप्रदेश से कुछ विधायक तो पहले ही बसपा और बीजेपी की शरण में जा चुके है बाकी बचे २ विधायक भी बीजेपी के यहाँ दरबारी करते देखे  गए।  इस तरह ये ८ विधायक कांग्रेस से जाने की तैयारी में है।  माना जा रहा है की २ और विधायक है जो केवल इसलिए अभी तक चुप है की उनकी सीट पक्की हो जाए।  अगर सीट कटेगी तो वे पार्टी छोड़ देंगे।  विधायको की इस नटलीला की जानकारी कांग्रेस आला कमान को भी लग गयी है।  कांग्रेस के विश्वस्त  सूत्रों के मुताविक जो ८  विधायक बसपा और बीजेपी के नेताओ से मिले है उनमे से ज्यादातर के बारे में कहा जा रहा है की उनका चुनाव जितना मुश्किल है।  पार्टी के  आतंरिक सर्वे में भी इन विधायको के बारे में  नेगेटिव तस्वीर उभरकर सामने आयी है।  पार्टी के एक नेता कहते है की पार्टी छोड़कर जाने वाले को कोई रोक नहीं सकता।  जाहिर है वे केवल चुनाव जितने की राजनीति करते हो।  लेकिन इस बार कांग्रेस  की राजनीति सब पर भारी पड़ने वाली है।  हम सरकार भले ही न बनाये लेकिन सरकार बनाने में कांग्रेस की भूमिका अहम् होगी।  
         उधर सबसे चौकाने वाली खबर ये है की कांग्रेस में राम भरत -मिलाप की संभावना बढ़ गयी है।  राहुल गांधी और वरुण गांधी अब एक होने वाले है। मिली जानकारी के मुताविक पिछले ४ महीने से इस मिलाप को लेकर बाते चल  रही थी। यह   बात और है की हर बार वरुण गांधी इसे नकारते रहे है।   संभव है की आज भी कोई उनसे इस बाबत पूछे तो वे नकार जाएंगे। लेकिन दो रोज पहले उनकी राजनीति सामने आ गयी।  एक कार्यक्रम में  भारतीय जनता पार्टी से सांसद वरुण गांधी ने इशारो इशारो में किसी का नाम लिए बिना मोदी सरकार पर निशाना साधा वहीँ पंडित जवाहर लाल नेहरू की खुलकर तारीफ की । यूथ कॉनक्लेव में उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि नेहरू धनी परिवार से थेराजा की तरह जिए और पीएम बन गए। लोग भूल जाते हैं कि नेहरू 15 साल जेल में भी  रहे।
वरुण ने कहा, ‘अगर कोई मुझसे कहे कि आप 15 साल जेल में रहिए और बाहर निकलने पर आपको प्रधानमंत्री बना देंगेतो मैं कहूंगा कि मुझे बक्श दो। यह इतना आसान नहीं है। युवा होने पर जेल में रहने का मतलब होता है खुद की जानअपने परिवार की परवाह ना करते हुए काम करना।
वरुण ने कहा कि 82 प्रतिशत नेता राजनीतिक घराने से हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राजनीति में नए चेहरे आने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मेरा नाम फिरोज वरुण गांधी है। लेकिन अगर मेरा नाम फिरोज वरुण अहमदतिवारीसिंह या फिर प्रसाद होता तो फिर इतने लोग मुझे सुनने के लिए नहीं आते।’ इसके साथ ही वरुण ने बोलने की आजादी पर मंडारा रहे खतरे का भी जिक्र किया। वरुण ने बिना नाम लिए छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलियों से निपटने के लिए अपनाई जा रही नीति का भी विरोध किया। उन्होंने कहा,जिस दिन सलमान खान के हिट ऐंड रन केस का फैसला आया थाउसी दिन बस्तर की कोर्ट ने एक लड़की को माफी मांगते हुए बाइज्जत बरी किया था। यह लड़की साल पहले नक्सली होने के आरोप में पकड़ी गई थी। उसका 16 लोगों ने बर्बरता से रेप किया था,लेकिन यह खबर कहीं नहीं आई। वरुण गांधी ने राजस्थान की वसुंधरा सरकार पर भी इशारे इशारे में तंज कसा।  राजस्थान के एक बड़े अखबार को जिस तरह से प्रदेश सरकार तंग कर रही है और विज्ञापन नहीं दे रही है उसका भी उल्लेख वरुण ने किया।  यह सब बीजेपी सरकारों पर हमला ही था।  इसके अलावा वरुण ने यह भी कहा कि जब संसद में आउडीबीएमडब्लूमर्सिडीज से आने वाले सांसद वेतन बढ़ाने के लिए चिल्लाते हैं तो शर्म आती है। वहीं वरुण ने मनरेगा की भी तारीफ की। जाहिर है मनरेगा कांग्रेस की देन है जिससे ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली है।  
         तो राजनीत ये है की वरुण को लेकर कांग्रेस में सब कुछ साफ़ हो गया है।  माना जा रहा है की कांग्रेस की तरफ से वरुण उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण सीएम उम्मीदवार होंगे।  सीएम उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारी गयी शीला दिक्षित बीमार चल रही है और अस्वस्थ है. शीला भी चाहती है की वरुण प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व करे. 
        कांग्रेस के एक दलित नेता कहते है कि  'वरुण जी को लेकर पहले ही सारी  बाते तय हो गयी थी।  आगे की रणनीति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन वरुण जी के आने से पार्टी यूपी चुनाव जीत  जायेगी।' कह सकते है की बीजेपी की राजनीति में वरुण गाँधी को लेकर भी कई तरह की बाते होती रही है।  अमित शाह की टीम वरुण गाँधी पर यकीं नहीं कर रही है और वरुण गाँधी को उत्तप्रदेश पार्टी कार्यकारिणी में भी नहीं रखा गया है।  पहले वरुण गाँधी को उम्मीद  थी कि  यूपी चुनाव में बीजेपी उन्हें सीएम उम्मीदवार बना सकती है लेकिन पार्टी ऐसा नहीं सोच रही है।  ऐसे में माना जा रहा है कि वरुण गांधी प्रदेश अध्यक्ष कैशव प्रसाद मौर्या की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।  
       वरुण गांधी, नेहरू , इंदिरा और फिरोज गांधी की राजनीति के ही अंग है।  नेहरू और इंदिरा की राजनीति पर और नेहरू और इंदिरा के ऊपर हो रहे बीजेपी के प्रहार से भी वरुण आहात है। यही वजह है की सुलतान कॉन्क्लेव में वरुण गांधी ने अपने नाना नेहरू की उल्लेखनीय राजनीति की चर्चा की न कि संघ और बीजेपी से जुड़े बड़े नेताओ की।  पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की नजरो में पहले से चढ़े वरुण गांधी ने नेहरू पर अपना बयान देकर और इशारो इशारो में बीजेपी नेतृत्व और बीजेपी की कई राज्य सरकारों पर टिप्पणी करके मोदी और शाह की आँखों की किरकिरी बन गए है। 
        अगर सब कुछ रणनीति के तहत होता रहा तो चुनाव के मौसम में जहां हर राजनितिक दलों में टूटने और जुटने का खेल चल रहा है , वरुण गांधी का कांग्रेस में वापसी यूपी की राजनीति के लिए मास्टर स्ट्रोक से काम नहीं होगा।  कह सकते है कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस मास्टर स्ट्रोक के लिए वक्त और स्थान तय कर लिए होंगे। 

No comments:

Post a Comment