Saturday, October 15, 2016

अखाड़े के पहलवान का राजनीतिक का मुलायम दाव


      अखिलेश  अखिल 

 अखाड़े की पहलवानी से यूपी की राजनीति की नकेल अपने हाथ में संभालने वाले मुलायम सिंह की अदा को भला कौन नहीं जानता। देसी  सियासत के सबसे बड़े पहलवाल मुलायम के दांव-पेंच आज भी जवानी के दिनों की तरह ही चलते हैं। कहते हैं कि उनकी राजनीति बेमिशाल है। लोग जबतक समझे तब तक मुलायम की राजनीति सध चुकी होती है।  यह बात और है कि आगामी चुनाव में हार जीत के फैसले को अगर दरकिनार कर दिया जाए तो साफ है कि प्रदेष की राजनीति में इस यादव परिवार का वर्चस्व आज भी कायम है और आने वाले समय में भी इस यादव परिवार की राजनीति कुछ यूंही चलती रहेगी।  यहां मामला  बाप -बेटे के बीच चल रही तकरार का नहीं है। फिर मामला चाचा- भतीजे के बीच चल रहे मनमुटाव का भी नहीं है। मामला तो यह भी नहीं है कि अखिलेश  की सौतेली मां और सौतेला भाई साधना गुप्ता और प्रतीक यादव के इशारे पर मुलायम सिंह अपने प्राण से प्यारे बेटे अखिलेश  यादव की राजनीति को तहस नहस कर रहे हैं। मामला तो सिर्फ यही है कि चाहे जैसे भी हो सपा की राजनीति बरकरार रहे और यूपी की बागडारे यादव परिवार के पास ही रहे। धुन के पक्के और राजनीति के मजे खिलाड़ी मुलायम सिह की राजनीति पिछले कुछ महीनो से यही बता रही है कि सपा के भीतर आपसी फूट बताकर अखिलेश , शिवपाल अपने अपने चेहरे के दम पर वोट उगाहे । जिसके वोट ज्यादा होगे, जिसके विधायक ज्यादा होगे जिसकी राजनीति ज्यादा चमकेगी उसमें मुलायम सिंह अपना आधार वोट जोड़कर सत्ता की राजनीति को अंजाम देंगे। कौन नहीं जानता कि मुलायम सिंह के वगैर न तो षिवपाल की कोई हस्ती है और न हीं उनके बेटे अखिलेष की। कहते हैं कि सिंह इज किंग। मुलायम आज भी पार्टी के किंग है और उनकी इषारे के वगैर पार्टी में कोई पत्ता भी नहीं हिल नहीं सकता। तो साफ है कि पहले चुनाव जीतो ,फिर सरकार बनाओ। मुलायम का फैसला ही अंतिम फैसला होगा।
        अब मुलायम सिंह के आज के प्रेस वार्ता से जुड़ी पहलूओं पर भी नजर डाल लें । मुख्यमंत्री पद को लेकर 2012 के चुनाव परिणाम के बाद शिवपाल और अखिलेश के बीच रार की नींव पड़ी थी। मंलायम सिंह नहीं चाहते कि इस चुनाव में भी पहली वाली बात दुहराई जाए। सपा की राजनीति में भाई षिवपाल की भूमिका से भी मुलायम परिचित है और बेटे अखिलेष की साफगोई के भी कायल हैं। अखिलेष की छवि सत्ता की राजनीति में आज भ्ज्ञी निर्विवाद है। सत्त की राजनीति में आपसी टकराव और इगों की राजनीति कहां न्हीं है। घर से लेकर परिवार , समाज और देष हर जगह इगो और वैचारिक मतभेद की राजनीति दिखाई पड़ती है। जाहिर है मुलायम सिंह नहीं चाहते कि चुनाव से पहले परिवार के भीतर चल रहे मनमुटाव का असर पार्टी पर पड़े और नुकसान उठाना पड़े।  राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम सिंह  ने बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया है। दरअसल मुलायम ने चुनाव में पार्टी का चेहरा बाद में तय करने की बात कहकर शिवपाल की उम्मीदों को भी जिंदा कर दिया है । इसके पीछे मुलायम की चालाक राजनीति ही है। चुनाव से पहले पार्टी अखिलेश और शिवपाल गुट की आपसी लड़ाई का शिकार न बने। अगर अखिलेश को अभी से सीएम घोषित कर दिया जाता  तो शिवपाल समर्थक चुनाव में असहयोग कर सकते हैं।
पत्रकारों ने मुलायम सिंह से पूछा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा कौन होगा। क्या अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा। इस पर मुलायम सिंह यादव ने बड़े मंझे अंदाज में सवाल टालते हुए कहा कि यह पार्टी तय करेगी कि कौन चुनाव में चेहरा होगा। यानी मुलायम सिंह यादव के इस बयान में शिवपाल यादव के समर्थक कुछ संभावनाएं देख सकते हैं। सवाल उठ रहा है कि जो मुलायम 2012 में खुद व्यक्तिगत रूप से अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया जबकि पार्टी खुद मुलायम को सीएम के रूप में देखना चाहती थी, अब मुलायम के सुर कैसे बदल गए। इस सुर के पीछे की कहानी सिर्फ यही है कि सियासी संग्राम में किसी तरह से पार्टी को बचाया जाए और सत्ता पायी जाए। मुख्यमंत्री के दो संभावित उम्मीदवारों को आपनी अपनी ताकत दिखाने और उन्हें उनकी औकात बताने से भी मुलायम नहीं चुके। 
    इस पूरे मामले में गायत्री भी एक प्रकरण दिखाई पड़ता कदख रहा है।  कहते हैं कि गायत्री अखिलेश  मंत्रीमंडल का सबसे भ्रष्ट मंत्री होने की वजह से ही अखिलेष ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था। दरअसल कई माामलों के आरोपी गायत्री मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के ज्यादा करीब बताया जाता है। सूत्रों की बात माने तो गायत्री खनन मंत्री रहते हुए खूब पैसे कमाए और उन पैसों से साधना गुप्ता को उपकृत भी किया। साधना के बेटे प्रतीक यादव की बेहिसाब संपत्ति खड़ा करने में गायत्री का बहुत बड़ा हाथ माना जाता है। अपनी पत्नी साधना गुप्ता  के दबाव में पहले भी गायत्री कासे मंत्री बनाया गया था और बाद में भी। इस बात को मुलायम सिंह भी जानते हैं कि गायत्री भ्रष्ट है। यही कारण है कि अपने प्रेस वार्ता में मुलायम सिंह ने गायत्री की तरफ इषारा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ही ऐसी पार्टी है जो गायत्री जैसे लोगों को भी मंत्री पद पर बैठा सकती है। मुलायम का यह इशारा सबके समझने के लिए काफी था। 
      आगामी पांच नवंबर को सपा अपनी  25 रजत जयंती मनाने जा रही है।  गायत्री के उपर इस जयंती को सफल करने का दायित्व मुलायम सिंह ने दे दिया है। कल तक गरीबी रेखा में रहने वाला गायत्री आज एक हजार करोड़ का मालिक है। मुलायम सिंह ने गायत्री की पार्टी में उपयोगिता साबित करने के लिए इस बड़े आयोजन का  जिम्मा सौंपा है। इससे गायत्री की उपयोगिता भी सावित हो जाएगी और उनके दूसरे बेटे के बिजनेश  एंपायर खड़ा करने वाले गायत्री पर कुपा भी बरकरार रहेगी। 

No comments:

Post a Comment