Tuesday, October 25, 2016

सपा लड़ाई में विपक्ष की वोट राजनीति



अखिलेश अखिल 
 यादव  परिवार की राजनीति कई राजनितिक पार्टी  के  लाभकारी है।  यही वजह है कि कुछ राजनितिक पार्टिया भी सपा की पारिवारिक राजनीति में खाद पानी डाल रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे झगड़े से किसको फायदा होगा? बहुजन समाज पार्टी के नेता सबसे ज्यादा उत्साह में हैं। उनको लग रहा है कि सपा के झगड़े से उनको सीधा फायदा हो रहा है। मायावती ने लखनऊ की रैली में मुस्लिम मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि सपा में सब एक दूसरे को हराने में लगे हैं और इसलिए मुसलमानों को गुमराह नहीं होना चाहिए और उनको एकमुश्त बसपा के पक्ष में वोट करना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के नेता इस उम्मीद में हैं कि सपा में कमजोर होकर हाशिए में जाने का फायदा उसको होगा। सपा टूट जाती है तब भी और नहीं टूटती है तब भी भाजपा फायदे की उम्मीद में है। भाजपा की चुनाव रणनीति से जुड़े एक जानकार नेता का कहना है कि बसपा से सीधी लड़ाई बनने और मुस्लिम वोट के ध्रुवीकरण से भाजपा को गैर यादव पिछड़ी और पूरा सवर्ण वोट एक करने में आसानी होगी।
कांग्रेस के नेता दो तरह का फायदा देख रहे हैं। उनको लग रहा है कि सपा के झगड़े से तालमेल का रास्ता खुल रहा है। सपा कमजोर हो रही है और इसलिए उसके अंत में गठबंधन बना कर लड़ना होगा। कुछ नेताओं ने महागठबंधन का प्रयास शुरू भी कर दिया है। अगर बिहार जैसा गठबंधन बन जाता है तो कांग्रेस को उम्मीद है कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी उसकी वापसी हो जाएगी। रालोद और कौमी एकता दल जैसी छोटी पार्टियां भी अपना फायदा देख रही हैं। 
       अभीतक की राजनीति सपा को कमजोर ही करती दिख रही है।  नेता जी मुलायम सिंह यादव कुछ नहीं कर पाने की हालत में है।  वे आगे की राजनीति भी समझ रहे है और घर की अंतिम राजनीति का हश्र भी समझ रहे है।  अपने बेटे अखिलेश की राजनीति और उसकी बेदाग़ छवि के वे कायल भी है लेकिन भ्राता प्रेम भी उनके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।  पार्टी के भीतर चल रही राजनीति के केंद्र भी नेता जी ही है और उस खेल को ख़त्म करने वाले भी नेता जी ही होंगे।  लेकिन अखिलेश की राजनीति अब पारिवारिक संस्कृति को भी पर कर रही है।  कहा जाना लगा है की अखिलेश को सपा की वर्तमान राजनीति से परेशानी है तो उन्हें चुचाप अलग होने से भला कौन मना कर रहा है।  
        सपा की पूरी राजनीति अभी सपा की बर्बादी की तरफ ही ले जा रही है।  कोई दल  इससे लाभ कमा ले तो भला इसमें उसका कोई दोष कहा से ? राजनितिक भवर  में सभी राजनितिक पार्टी एक दूसरे की कमजोरी को अपना हथियार बनाकर आगे बढ़ना चाह रही है।  सपा की कमजोरी कई पार्टी के लिए बरदान हो सकती है।  

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