Tuesday, November 22, 2016

कांग्रेस से निकली पार्टिया गठबंधन करेगी !

अखिलेश अखिल 
 जिस तरह की राजनीति देश में चल रही है उससे  कहा जा सकता है कि  आने वाले दिनों में कई गठबंधन तो बनेंगे ही कांग्रेस से निकली तमाम पार्टिया भी एक गठबंधन बनाकर आगे की राजनीति को आगे बढ़ा सकती है। कांग्रेस से अलग होकर पार्टी बनाने वाले ममता बनर्जी, शरद पवार, जगन मोहन रेड्डी और जीके वासन एक साथ आ सकते हैं। हालांकि तब केजरीवाल और उद्धव ठाकरे इसमें शामिल नहीं होंगे। मोदी की राजनीति से पस्त कांग्रेस आज सबसे ज्यादा परेशान हलकान है।  लगातार कमजोर हो रही कांग्रेस की राजनीति अभी कही फिट नहीं बैठा रही है।  उसके गठबंधन भी फेल होते दिख रहे है और मुख्य विपक्ष की भूमिका में भी  कांग्रेस  अपना कोई असर छोड़ती नजर नहीं आ रही है।ऐसे में  कांग्रेस का एक गठबंधन भी बन सकता है।  जिसमें लेफ्ट पार्टियां साझेदार होंगी। इससे ऐसा लग रहा है कि भाजपा के खिलाफ एक की बजाय कई मोर्चे बनेंगे। 
        राजनीतिक पार्टियां अपनी पोजिशन बदल रही हैं। यह बात आज इसलिए भी कही जा रही है कि  पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद करने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद देश के अलग अलग हिस्सों में चल रही राजनीति से एक नए किस्म के गठबंधन की संभावना दिख रही है। पार्टियां अपनी पोजिशन बदल रही हैं और ज्यादा फायदे की संभावना के हिसाब से सहयोगी चुनने की कवायद कर रही हैं।
इस बदलती राजनीति में  तीन बड़ी पार्टियों के नेताओं ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा की ओर रूझान दिखाया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता फिलहाल केंद्र के साथ दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में इन तीनो नेताओ की राजनीति किस करवट बैठेगी यह देखना होगा लेकिन अभी इन नेताओ की राजनीति मोदी की राजनीति के इर्द गिर्द घूमती दिख रही है। इन सबकी स्थानीय राजनीतिक जरूरतें हैं, जिनकी वजह से इन्होंने कांग्रेस नेतृत्व वाले दूसरे या किसी तीसरे मोर्चे के मुकाबले भाजपा को चुना है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार इस समय भाजपा से नजदीकी दिखा रहे हैं, लेकिन यह संभव है कि शिवसेना के साथ मिल कर वे कोई अलग राजनीति करें। शिवसेना की भाजपा से दूरी बढ़ी है तो एनसीपी की कांग्रेस से। उधर ममता बनर्जी ने अरविंद केजरीवाल से फिर से नाता जोड़ा है। फारूक अब्दुल्ला की पार्टी इनके साथ है। यह भी संभव है कि एनसीपी भी इस गठबंधन से जुड़े।
        सबकी नजरें  उत्तरप्रदेश चुनाव पर टिकी है। यूपी चुनाव के परिणाम देश की दशा और दिशा बदलने वाली होगी।  कई राजनितिक धरे तैयार होंगे।  कई पार्टियों में टूट  संभावना बनेगी।  कई गठबंधन में दरार आएंगे और नए गठबंधन सामने दिखेंगे। यूपी चुनाव में बीजेपी की राजनीति और चुनाव परिणाम आगे की राजनीति के लिए निर्णायक होंगे।  बीजेपी अगर सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो कई क्षेत्रीय दाल बीजेपी के साथ मिल जाने में ही भलाई समझेंगे।  बीजेपी की असफलता कांग्रेस और दूसरे मोर्चे की राजनीति के साथ गोलबंद होने के लिए कई क्षेत्रीय दलों को बाध्य कर देगा।  लेकिन इतना तय दिख रहा है की आने वाले समय में कुछ पार्टिया कांग्रेस खेमे से अलग होगी तो कुछ बीजेपी के विरोध में अन्य मोर्चे के साथ होगी।  विरोध और सपोर्ट की पूरी राजनीति २०१९ के चुनाव को लेकर होनी है। 

No comments:

Post a Comment