Tuesday, November 22, 2016

शराबबंदी से नोटबंदी और भिखारियों के पाव बारह

अखिलेश अखिल 
सबसे पहली खबर तो ये है कि दिल्ली के कनाट प्लेस रीगल के पीछे वाले हनुमान और शिव मंदिर के पास जमे भिखारियों की चांदी ही चांदी है।  इनकी झोली और गाँठ में बंधे पैसे और रुपये आजकल फुर्र  फुर्र उड़ रहे है। सैलानियों से लेकर आम जन भी उन भिखारियों के पास मंडरा रहे है जो अक्सर उन्हें हिकारत की नजरो से देख रहे थे।  खेल है नॉट भुनाने का।  भिखारियों की झोली से खुदरे नोट खूब निकल रहे है।  कह सकते है कनाट प्लेक्स के भखारी चलता फिरता खुदरा नोट देने का मशीन बने हुए है। भिखारियों ने लोगो को बड़ी राहत दी है।  भला इन लोगो का।  अब आप सोचेंगे कि खुदरा देने वाले भिखारी ५०० और १००० के नोट फिर क्या करेंगे ? वे कहा जाएंगे ? क्या उनके अकाउंट बैंक में है ? जबाब हां में है।  सबके अकाउंट अलग अलग बैंक में है।  लेकिन खेल ये हो रहा है कि कालाधन रखने वाले धनधारी उन भिखारियों के करिये भी नोट भुना रहे है।  पिछले एक सप्ताह से कई भिखारी ४००० के हिसाब से अलग अलग बैंको में जाकर अपने आका के धन को भुना रहे है।  
         दूसरी खबर ये है कि नॉट बंदी को लेकर जहां सारा विपक्ष एक होकर मोदी सरकार की नोटबंदी नीति पर हमला करने के फिराक में है ,वही बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार हालात का जायजा ले रहे है।  आगे की रणनीति और राजनीति को टटोल रहे है।  मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो सबसे पहले नितीश कुमार ने ही मोदी सरकार के इस निर्णय का तहे दिल से स्वागत किया और देश के लिए लाभकारी बताया था।  यह बात और है कि तब नितीश जी को लगा था कि यह नीति ज्यादा सफल नहीं होगी लेकिन समर्थन करके नितीश जी ने यह साफ़ कर दिया था कि वे मोदी जी के हर निर्णय के विरोधी नहीं है। अब संसद में क्या रणनीति बनेगी जदयू की , यह देखने की बात होगी। नितीश जी पता है कि मोदी भी उनकी तरह ही धुन के पक्के है।  नोटबंदी के पीछे कालाधन निकालने की नीति की जितनी सराहना की जाए काम ही है।  लेकिन इसमें राजनीति भी कम नहीं है।   साफ़ है तमाम तरह के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद मोदी जी को अब इस नोटबंदी की नीति का लाभ आगामी चुनाव में मिलने की संभावना ज्यादा बढ़ गयी है।  आम जनता को परेशानी ज्यादा होने के बावजूद लोगो के मन में यह भी सवाल आ रहा है कि इस नीति से देश के लुटेरो के चेहरे सामने आ जायेगे और वे बर्बाद हो जाएंगे।  जनता को यह भी मालुम है कि इस खेल से उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला लेकिन कालाधंधारी मर जाए इसमें उनका विश्वास ज्यादा है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ़ कर दिया है कि नोटबंदी की नीति ठीक है लेकिन जनता को तकलीफ नहीं हो इसपर सरकार को नजर रखने की बात कही है। 
          नितीश कुमार भी शराबबंदी पर अड़े रहे।  लाख विरोध के बाद भी  नितीश कुमार अपने मकसद से हेट नहीं है।  जिद्दी नेता की छाप नितीश कुमार में देखने को मिली।  शराब बंदी भी सफल रही है।  बिहार के लोग पिने के आदि कुछ ज्यादा ही हो गए थे।  कुछ दिनों तक परेशानी रही लेकिन अब सब शांत हो गया है।  लोग शराब भूल से गए है।  हो सकता है कि शहरी इलाको में कुछ मुनाफाखोर शराब की स्मगलिंग कर रहे होंगे लेकिन गाव के लोगो में अब शराबबंदी का पूरा असर देखने को मिल रहा है।  जिद्दी मुख्यमंत्री के इस खेल की जितनी शराहना की जाए काम ही है।  
      नितीश की तरह मोदी कितने जिद्दी है इसे अभी परखना पडेगा।  अब तक ढाई साल में मोदी जी किसी जिद्द पर ज्यादा नहीं टिक पाए है।  लोगो की उलाहनाये उन्हें कुछ ज्यादा ही मिली है।  लेकिन नोटबंदी पर मोदी जी का जिद्द कायम रहेगा।  इससे देश का भला भी होना है और चुनावी राजनीति भी सधनी है।  

No comments:

Post a Comment