Wednesday, December 14, 2016

हम कैशलेस इकॉनमी की राह में



हम कैशलेस इकॉनमी की तरफ बढ़ रहे है। आज  भले ही इस नीति की चाहे जितनी निंदा की जाए लेकिन आने वाले समय में कैशलेस इकॉनमी ही सबकी जरुरत हो जायेगी।   यह बात और है कि  मोदी सरकार की नोटबंदी की नीति वर्तमान में समाज और जनता को परेशान किये हुए है लेकिन जिस तरह से कालाधन की गति बढ़ रही थी उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।  इस नोटबंदी से कालाधन कितना प्रभावित होगा यह देखना होगा लेकिन कैशलेश खेल सुकून देगा।  फिलहाल इस खेल को धीरे धीरे लागू करने की जरुरत थी। मोदी  सरकार ने 'भ्रष्टाचार व काले धन की बुराई खत्म करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को नकदीविहीन कैशलेस बनाने का बड़ा मिशन शुरू किया है।  पिछले 8 नवंबर को लागू हुई नोटबंदी से फिलहाल लोगों को दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ रहा है, किंतु इस क्रम में इलेक्ट्रॉनिक व ऑनलाइन भुगतान चलन में आ गया, तो यह इस पूरे घटनाक्रम का दूरगामी लाभ देने वाला परिणाम होगा। इसीलिए अपेक्षित है कि जब सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रोत्साहनों की घोषणा की है, तब लोग इसमें उत्साही सहभागी बनें। ज्यादा से ज्यादा लोग ऑनलाइन या कार्ड से पेमेंट करें, इसके लिए केंद्र ने कई तरह के लाभ देने का एलान किया है। इसके तहत डिजिटल विधि से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर 0.75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। रेलवे का ई-टिकट खरीदने और बीमा भुगतान करने पर रियायत दी जाएगी। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले किसानों को नाबार्ड के जरिए रूपे कार्ड देने आदि की घोषणा हुई है। 2000 रुपए तक के डेबिट कार्ड से लेन-देन पर सर्विस टैक्स से छूट मिलेगी। 10,000 की आबादी वाले गांवों में कार्ड स्वैपिंग मशीनें लगाई जाएंगी। स्पष्टत: ये ठोस उपाय हैं। 
             बहरहाल, सरकार इससे जरूर अवगत होगी कि भारत को पूर्णत: कैशलेस इकोनॉमी बनाना बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए भगीरथ प्रयास की जरूरत होगी और यह कार्य समयसाध्य होगा। इस रास्ते में अनेक बाधाएं मौजूद हैं। गौरतलब है, देश में 34 करोड़ 20 लाख लोग (यानी कुल आबादी का 27 फीसदी हिस्सा) इंटरनेट के यूजर बताए जाते हैं। हालांकि इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं, जो कभीकभार इंटरनेट का उपयोग करते हैं, मगर इस संख्या को सही मान लें तब भी हकीकत यही है कि 73 फीसदी जनसंख्या अभी इंटरनेट के दायरे में नहीं है। ग्रामीण इलाकों में तो सिर्फ 13 प्रतिशत लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरी समझा जाता है। भारत में सिर्फ 17 फीसदी वयस्क इन फोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या एक अरब 2 करोड़ जरूर है, लेकिन उनमें से केवल 15 फीसदी को ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपलब्ध है। ब्रॉडबैंड की रफ्तार भी एक बड़ा मुद्दा है। भारत में आज भी ज्यादातर कनेक्शन अपेक्षाकृत धीमी गति के हैं। फिर डेबिट व क्रेडिट कार्ड की स्वैपिंग मशीनों की उपलब्धता विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। अपने यहां हर दस लाख आबादी पर 856 मशीनें ही हैं। इनमें से भी ज्यादातर शहरी इलाकों में हैं। तात्पर्य यह कि भारत को कैशलेस बनाने का उद्देश्य प्रशंसनीय और पूर्णत: वांछित है, लेकिन यह श्रमसाध्य काम है। इसमें कामयाबी के लिए जरूरी है कि सरकार इसको लेकर जनता में उत्साह पैदा करे, ताकि कैशलेस होने की मुहिम जन-आंदोलन का रूप ले सके।

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