Wednesday, December 14, 2016

कालेधन की वसूली से गरीब कल्याण योजना


सरकार का ने ऐलान किया है कि  नोटबंदी के बाद पकडे गए कालेधन से  गरीब जनता के लिए काम किये जाएंगे।  गरीबो की मौलिक जरूरते  इन कालेधन के पैसे  से  पूरी की जायेगी। नोटबंदी को लेकर सरकार का पक्ष है कि कर चोरी से देश महत्त्वपूर्ण संसाधनों से वंचित होता है। ये संसाधन सरकार के पास हों, तो वह उन्हें गरीबी मिटाने तथा विकास के कार्यक्रमों पर खर्च कर सकती है। सरकार का यह भी कहना है कि कर चोरी का ईमानदार करदाताओं पर अनुचित बोझ पड़ता है।
राजस्व में रह गई कमी को भरने के लिए उन्हें ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। इसीलिए 500 और 1000 रुपए के नोट रद्द किए गए। मगर उसके बाद आय कर अधिनियम-1961 के कुछ प्रावधानों को लेकर कुछ हलकों से चिंता जताई गई। कहा गया कि इनका इस्तेमाल काले धन को छिपाने के लिए किया जा सकता है। इन्हीं चिंताओं दूर करने के लिए 28 नवंबर को लोक सभा में कराधान अधिनियम (दूसरा संशोधन) विधेयक- 2016 पेश किया गया।
इसके जरिए कर ना चुकाने वाले लोगों पर अधिक ऊंची दर से कर तथा जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जा रहा है। संशोधन बिल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 2016 के लिए कराधान एवं निवेश व्यवस्था करने का भी प्रावधान है। इसके मुताबिकः अब तक अघोषित रकम पर टैक्स, जुर्माना और उपकर लगेगा। यह कुल रकम के 50 फीसदी तक पहुंचेगा। इस साल के अंत तक ढाई लाख रुपए से ज़्यादा जमा की गई राशि का अध्ययन आय कर अधिकारी करेंगे। जहां शक होगा, नोटिस जारी किए जाएंगे। जो लोग खुद सूचना देंगे अथवा ये मान लेंगे कि उन्होंने काला धन जमा कराया, उन्हें अपनी रकम पर 30 फीसदी टैक्स और 10 प्रतिशत जुर्माने के अलावा कर रकम पर 33 फीसदी गरीब कल्याण उपकर देना होगा। इसके अलावा पूरी रकम का 25 प्रतिशत हिस्सा चार साल के लिए प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना में जमा हो जाएगा, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। बाकी रकम सफेद हो जाएगी।
लेकिन ऐसी घोषणा करने वालों को धन कर तथा दीवानी एवं अन्य कराधान कानूनों से छूट मिलेगी। लेकिन फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून), मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) और मादक पदार्थ तथा काला धन कानूनों से उन्हें कोई संरक्षण नहीं मिलेगा। अन्य प्रकार की अघोषित आय पर 85 प्रतिशत की प्रभावी दर से टैक्स लगेगा। इसमें रकम का 60 प्रतिशत टैक्स और 25 प्रतिशत अधिभार (सरचार्ज) शामिल है। जिन लोगों ने खुद खुलासा नहीं किया, मगर पाया गया कि उन्होंने काला धन जमा कराया, तो उस पर 85 प्रतिशत टैक्स और जुर्माना लगेगा। यानी सिर्फ 15 फीसदी रकम ही खाता धारक को वापस मिलेगी। इसके अलावा ऐसे कर्ज, निवेश, स्वर्ण एवं जेवरात, शेयर में निवेश, अन्य जायदाद एवं हूंडी नोटों पर भी इसी दर से टैक्स लगेगा, जिसकी आय का स्रोत उसके मालिक स्पष्ट नहीं कर पाएंगे। सरकार ने कहा है कि गरीब कल्याण उपकर से प्राप्त तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण कोष में जमा रकम का उपयोग गरीबों की भलाई के लिए होगा। बिल में कहा गया है कि इसे सिंचाई, आवास, शौचालय, बुनियादी ढांचे, प्राथमिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य एवं आजीविका विकास पर खर्च किया जाएगा, ताकि न्याय एवं समता सुनिश्चित हो सके।  अब देखना है की नोटबंदी के बाद कितना कालाधन सामने आता है।  अगर सरकार की योजना के मुताविक कालाधन सामने आ गया तो गरीबो की योजनाए शुरू करने में कोई कमी नहीं रहेगी।  

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