Wednesday, December 14, 2016

राजनितिक अराजकता की तरफ बढ़ता देश !


अखिलेश अखिल 
नोटबंदी ने देश की सोयी और अपंग  राजनीति को जीवित कर दिया है। घपले घोटाले से तर बतर इस देश में नोटबंदी की एक चोट से सब घायल और  चले है।  सत्ता और विपक्ष वाले भी।  सत्ता वाले बोल नहीं सकते क्योंकि उनके ऊपर उनके आका की तलवार लटक रही है तो विपक्ष वाले अपनी कमजोर और घपले घोटालो की मांद से निकली राजनीति को धारदार बनाकर जनता के बीच अपनी खोई इज्जत -प्रतिष्ठा को उभारने के फेर में है।   शक्तियों के बीच आजाद भारत का आम आदमी बर्बाद और बेकार हो चला है।  
      मोदी ने नोटबंदी को लेकर आम जनता से ५० दिनों का समय माँगा था और कहा था कि इन ५० दिनों में सारे कालाधन धन धारी नंगे हो जाएंगे और देश की तस्वीर निखार जायेगी।  लोगो को जो परेशानी है ,वह ख़त्म हो जायेगी।  अब मात्रा १५ दिन और बचे है।  कह सकते है कि नोटबंदी को लेकर देश का बड़ा समाज आहात और नाराज है।  बेकारी बढ़ी है और बाजार में मंदी छाई है। 
         संसद पुरे सत्र में न के बराबर चली है।  जनता के अरबो रुपये संसद ना चलने से अलग बर्बाद हुए है।  अब २ दिन और बचे है।  विपक्ष संसद में मोदी का बयान चाह रहा है और विपक्ष इस पुरे मसले पर अपनी बात रखना चाह रहा है।  जो संभव नहीं हो पा रहा है।  कह सकते है कि नोटबंदी ने देश को जाम कर दिया है।  संसद जाम मतलब देश जाम। नोटबंदी के इसी दौर में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने खुलासा किया है कि  देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त है और इसकी पुरे दस्तावेज विपक्ष के पास है।  राहुल ने मीडिया के सामने ऐलान किया है कि अगर सरकार के लोग उन्हें सदन में बोलने की इजाजत दे तो प्रधानमन्त्री मोदी के भ्रष्टाचार  से जुड़े दस्तावेज सामने लाकर मोदी की पूरी राजनीति को नंगा कर देंगे।  
         ऐसे में सवाल है कि अब जब संसद के मात्र २ दिन बचे है क्या सरकार और खासकर प्रधानमन्त्री मोदी  नोटबंदी को लेकर अपनी बात रखेंगे ? दुसरा सवाल यह है कि क्या संसद में राहुल गांधी को बोलने की इजाजत मिलेगी ? और तीसरा सवाल है की अगर राहुल अगर संसद में नहीं बोल पाते है तो क्या प्रधानमन्त्री मोदी के बारे में राहुल ने जो भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज होने की बात सरेआम कही है , क्या उसकी जानकारी देशवासियो को मिलेगी ? या केवल आरोप प्रत्यारोप की राजनीति से ही भक्त होने और नहीं होने का कीर्तन चलता रहेगा ?
         नोटबंदी को लेकर जिस तरह का राजनितिक माहौल बन रहा है ऐसे में कहा जा सकता है कि देश किसी विकट संकट की तरफ बढ़ रहा है। अराजकता की तरफ बढ़ रहा है। संसद का नहीं चलना , प्रधानमंत्री का संसद में नहीं बोलना और विपक्ष की बातों का नहीं सुनना आखिर क्या दर्शा रहा है ? राहुल गांधी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी पर भर्ष्टाचार के आरोप लगाए है उससे साफ़ हो गया है कि राहुल के ऐलान के पीछे कोई सच है।  अगर ऐसा है तो राहुल बीजेपी और खासकर मोदी पर कोई डॉक्यूमेंटेड आरोप लगाकर अपने पिता पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधी पर बोफोर्स घोटाले के दाग का बदला ले लेंगे।  आजाद भारत में किसी प्रधानमंत्री पर पहला दाग बोफोर्स घोटाले  का लगा था।  इस घोटाले के आरोप ने कांग्रेस की राजनीति को सालों तक हिचकोले खाने के लिए मजबूर कर दिया था।  मोदी पर घोटाले का आरोप क्या हो सकते है इसकी जानकारी के लिए देश को इन्तजार है।  
         मामला  अब मोदी जी तक ही नहीं रह गया है।  नोटबंदी की राजनीति के तहत ही अब भ्रष्टाचार के मामले में भी इस सरकार को घेरने की राजनीति चल पड़ी है।  मोदी सरकार के ढाई साल के समय में अब तक किसी मंत्री संतरी पर सीधे घोटाले के आरोप नहीं लगे थे।  लेकिन अब लग गए है।  सरकार के गृह राज्य मंत्री किरण जिजुजी पर आरोप सामने आये है कि उन्होंने अपने गृह परदेश अरुणचल में एक बाँध बनाने के मामले में हुए भ्रष्टाचार की वजह से जांच एजेंसी द्वारा रोके गए धन को निकालने के लिए ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल को पत्र लिखा था और पैरवी की थी।  बीजेपी और सरकार के लोग इस तरह के आरोप को बेकार बता रहे है।  लेकिन कुछ इसी तरह के आरोप पर पिछली सरकार  मंत्री रहे सुबोधकांत सहाय को कोल् ब्लॉक मामले में अपने भाई की पैरवी करने को लेकर मंत्री पद से हटना पड़ा था।  इसलिए किरण को पद से हटना ही पद सकता है। 
        
 नोटबंदी के 40 दिन गुजर गए। भारत और इंडिया में रहने वाले लोगो ने इन 40 दिनों में क्या खोया क्या पाया, कितना भोगा कितना जिया इसके बारे में सबकी अपनी अपनी दास्तान है।   कालाधन और नकली नोट देश ,समाज से बाहर करने के लिए मोदी सरकार की नोटबंदी योजना को लेकर पूरा देश दो खेमे में बट गया है।  एक खेमा नोटबंदी को अपनी आहुति देकर भी कालाधन रखने वाले लोगो को दण्डित करने के फेर में है तो समाज का बहुत बड़ा तपका जिसके पास कालाधन , काली कमाई की तिजोरी है उसमे भी कुछ लोग नोटबंदी के साथ सुर में सुर मिलाये हुए है तो कुछ लोग इसे बेकार और जनता के विरूद्ध मान रहे है।  प्रधानमन्त्री मोदी की इस नोटबंदी की नीति पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।  सारा हो हाला और राजनीति नोटबंदी के तरीके और और उसकी तैयारी को लेकर है।  ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी सामने आ गया है कि ४० दिनों के इस खेल में कोई कालाधन सामने आया या नहीं ? इसके जबाब लगभग ना के बराबर ही है।  लेकिन इस पुरे खेल में यह साफ़ जाहिर हो गया है कि देश की बड़ी आबादी बगुला भगत है।  समाज और देश में जिन्हें हम बड़ी हस्ती के रूप में देख रहे है उनकी पूरी कहानी काली कमाई करने और रखने पर ही टिकी है।  
         तो जनता की बात छोड़ भी दीजिये तो राजनीति किधर जा रही है यही सबसे बड़ा सवाल है।  नोटबंदी से कल हमारा भविष्य कितना बेहतर होगा यह कोई नहीं जानता।  लेकिन आज इस नोटबंदी और राजनीति से देश में बड़ा संकट पैदा हो गया है। 

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