Wednesday, December 14, 2016

काले कौए की काली कमाई पर मोदी का ब्रह्माष्त्र


अखिलेश अखिल 
हंस चुगेगा दाना और कौआ मोती खायेगा।  कलयुग के बारे  कुछ ऐसा ही बयान दिया गया है।  तो कलयुग में ऐसा हो रहा है। कलयुग में हंस और कौए को एक डाल  पर लाने की मोदी की कोशिश कितना रंग लाएगी इस पर देश में नर्तन जारी है।  मायावी बाजार में मोदी का यह ब्रह्माश्त्र कितना कारगर होगा इसका अंत किसी को पता नहीं।  लेकिन हंस बेहाल है , बर्बाद के कगार पर है।  ७० साल की आजादी और २५ साल के  उदारीकरण में काले कौए की आबादी भी कोई ७० फीसदी हो गयी है।  कितने काले कौए फास में आएंगे  कोई नहीं बता सकता क्योंकि काले कौए ने बड़ा  संसार और बड़ी आबादी तैयार कर ली है।   इस काले कौए में आखिर कौन शामिल नहीं।  बहती गंगा में डुबकी किसने नहीं लगाई ?  लोकतंत्र के चारो स्तंभो से लेकर धर्म , कर्म , साधना और विरक्त  रहने की कसमे खाने वालो ने भी लूट की रति क्रिया में बराबर के हकदार बने।  किसी ने भक्ति के नाम पर कुकर्म किया तो किसी ने प्रवचन के नाम पर धंधा किया।  कोई राजनीति के नाम पर देश को लुटा तो किसी ने सरकार के नाम पर राष्ट्र को चुना लगाया। कोई लिखने पढ़ने और दिखाकर वह सब कुछ किया जिसकी मनाही थी।   कह सकते है कि  सबने अपने अपने हिस्से का देश जी भर बेचा। फिर नर्तन कैसा ? काले कौए  की काली कमाई से तो देश कराह रहा है।   
          सबसे पहले  नोटबंदी के बाद  कुछ पकडे गए गद्दारो , लुटेरो  की से आप दो चार हो लीजिये।   इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बेंगलुरु में दो ब्यूरोक्रेट्स के पास से 5 करोड़ रुपए जब्त किए है । इसमें 4.7 करोड़ नए नोट हैं। बाकी 30 लाख रुपए के पुराने और छोटे नोट हैं। 5 किलो से ज्यादा का गोल्ड भी मिला है। उधर, तमिलनाडु पुलिस ने एक बीजेपी नेता के पास 20 लाख रुपए बरामद किए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक अफसर ने बताया- ” इन दोनों अफसरों के पास इतनी बड़ी तादाद में नकदी कैसे पहुंची? इसे लेकर जांच की जा रही है।” इतना ही नहीं इनके पास से 5 किलो से ज्यादा गोल्ड और छह किलो के ज्वैलरी भी बरामद हुई है। इसके अलावा लक्जरी स्पोर्ट्स कार भी मिली।
“मौके से पहचान पत्र मिले हैं। माना जा रहा है कि इनका इस्तेमाल रुपये एक्सचेंज करवाने में भी किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें एक स्टेट हाइवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में चीफ प्लानिंग ऑफिसर है। वहीं, दूसरा कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड में मैनेजिंग डारेक्टर है।

            उधर पटना में आईटी डिपार्टमेंट ने  बताया कि पटना एयरपोर्ट से थाईलैंड के नागरिक को हिरासत में लिया गया है। इसके पास 1.2 करोड़ रुपए के पुराने नोट मिले।  बीजेपी की यूथ विंग के नेता जेवीआर अरुण को तमिलनाडु पुलिस ने  20 लाख रुपए के साथ अरेस्ट किया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अरुण के पास से 2000 के 926 नोट बरामद हुए हैं। इसके अलावा 1530 नोट 100 के और 50 रुपये के 1000 नोट थे। पुलिस ने बताया कि हमने अरुण को अपना पक्ष और पैसों का सोर्स बताने के लिए वक्त दिया है।
चंडीगढ़ पुलिस ने  2000 के नकली नोट चलाने के आरोप में दो भाई-बहन को अरेस्ट किया।
21 साल के बीटेक स्टूडेंट अभिनव वर्मा और उसकी 20 साल की कजिन विशाखा वर्मा ने 2000 के नए नोट स्कैन किए और फिर ब्लैकमनी को व्हाइट करने का झांसा देकर मार्केट में चलाया। आरोप है कि दोनों ने नकली नोट से 20 लाख रुपए की सेकंड हैंड ऑडी भी खरीदी थी। पुलिस ने इनके पास से 62 लाख रुपए बरामद किए। ऐसा आरोप है कि इन्होंने 6 करोड़ रुपए मार्केट में चलाए हैं।
 करीब एक सप्ताह पहले दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन स्टेशन के बाहर एक कार से 27 लाख रुपये के नए नोट बरामद किए थे। इस मामले में दो लोगों को अरेस्ट में लिया गया था।बरामद हुई यह रकम 2000 के नए नोटों में थी।
 वहीं, हरियाणा के पंचकुला में भी कुछ दिन पहले 8 लाख रुपये के नए नोट बरामद हुए थे।
       नोटबंदी के बाद की कालाबाजारी और नोट जमाखोरी की आदते भला कैसे छूट सकती है।  वर्षो से  कालाधन बनाने वाले लोग भला इस धंधे को कैसे छोड़ देंगे ? कालाधन बनाना कोई खेल है क्या ? लेकिन जब इस खेल में सरकार के लोग ही शामिल हो तो बाकी के पाकिटमार जैसे उचक्के को कौन पूछे !पिछले २५ साल की आर्थिक उदारीकरण की कहानी तो यही कह रही है कि उदारीकरण के इस खेल में सबने डुबकी लगाईं।  सरकार चाहे जिसकी रही हो , सबने लूट की और धन बनाया।  यह २५ साल के भीतर का ही धन है कि देश के तमाम छोटे बड़े शहरो में देखते देखते कॉलोनी बस गयी।  रातो रात बड़ी बड़ी इमारते खड़ी हो  गयी और मकान के गेट के सामने कुत्ते भौंकने लगे। किसी ने नकली दवा को बेचा तो किसी ने दवा के नाम पर चीनी , गुड़ की चासनी बेचीं।  आज भी बेच रहे है।  भयानक रोग के लिए बने कैप्सूल मिटटी , हल्दी आदि के पाउडर से भरे मिले।  किसी ने स्कूल कालेज  को बेचा तो किसी ने शिक्षा को ही नीलाम कर दिया। अशिक्षित लोग शिक्षा जगत की बड़ी बड़ी डिग्रियां बेचने लगे। आज भी बेचीं जा रही है।  कह सकते है कि सरस्वती पर मूर्खो का राज।  जो पढ़े सो बेकार जो अनपढ़ सो होशियार।  देश का कोयला बिक गया।  सारे खनिज बिक गए।  जंगल बिक गए।  जंगल के आदिवासी और नंगे हो गए।  सरकार की जितनी योजनाए आयी , गपक लिए लोगो ने  और नेता अधिकारी ने।  जमीन किसी और की  बेचने वाला कोई और।  सौ की जमीन  के भाव १० हजार हो गए।  लूट के इतने पैसे  आये की इन २५ सालो में ही सवा लाख करोड़पति पैदा हो गए।  वैसे करोड़पति जिनके पास २०० करोड़ से ज्यादा की संपत्ति पायी गयी।  इन पिछले २५  वर्षो में  १५ साल कांग्रेस के रहे तो करीब ९ साल बीजेपी के।  आजाद भारत के इतिहास में जितने घोटाले और आर्थिक डकैती पिछले ४५ साल में नहीं हुयी उतनी इन्ही २५ सालो में हो गयी।  और लूटने वाले कौन थे ? कौन किसका नाम ले सकता है ? राजनीति करने वाला या नेता की चापलूसी करने वाला या फिर सेक्युलर राजनीति का अलाप गाने वाला या फिर राम धुन और देशभक्ति की झूठी गवाही देने वाला ? कांग्रेस  में रहकर जिसने खूब लूट मचाई आज बीजेपी में कैसे पाक हो गया ?  वाजपयी के काल में जितने लूट काण्ड हुए  और क्या उस लूट काण्ड में कांग्रेस के लोग भी शामिल नहीं थे ? सच तो यही है कि देश की ३० फीसदी आबादी तन मन से भ्रष्टाचार में लिप्त रही है और आज भी है।  नेता , नौकरशाह सरकारी कर्मचारी से लेकर जज और पत्रकार में बमुश्किल १० फीसदी लोग ही ऐसे बचे होंगे जिनकी आत्मा आज भी संविधान की शर्तो पर काम करती  है।  लेकिन उनकी हालत तो देखिये।  आज बेकार सावित हो गए है ऐसे लोग। घर से भी बहिष्कृत।  
          देश की अधिकतर योजनाए  आम जनता और खासकर गरीबो को केंद्र में रख कर बनायी जाती है।  यह २५ साल की उदारीकरण की नीति ही रही है कि गाव गाव  में  पैसे का फ्लो  बढ़ा  और देखते देखते  लोगो की चाल में बदलाव  आ गए।  उदारीकरण की नीति अगर हमारे देश के लिए अभिशाप दिख रही है तो यही उदारीकरण  किसी बरदान से भी कम नहीं।  लेकिन पूरी दुनिया को उदारीकरण डरा रहा है।  दुनिया के अधिकतर  देश  अब इस  नीति  से अलग होने को छटपटा रहे है।  इसलिए  अब इस नीति की समीक्षा  होनी चाहिए।   मोदी की नोटबंदी  के पीछे का गणित  चाहे जो भी हो , इस नोटबंदी के पीछे बीजेपी की राजनितिक चाह  जो भी हो , लेकिन एक  बात तय है की  नोटबंदी बहुतो  को नंगा कर देगी।  इस नोटबंदी से आम लोगो को जो परेशानी हो रही है  उसके लिए भी सरकार ही  दोषी है।  नोटबंदी गलत नहीं , तैयारी हर हाल में  गलत है।  और इसका आने वाले दिनों में असर भी पडेगा।  

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