Wednesday, December 14, 2016

नोटबंदी का असर मोदीबंदी के रूप में दिखेगा

अखिलेश अखिल 
इसमें कोई शक नहीं देश में बढ़ते भ्रष्टाचार से जन जीवन आजिज और परेशान है। 1952  में पहला लोकसभा चुनाव हुया था। तबसे लेकर आजतक ना जाने देश के भीतर कितने चुनाव होते रहे।  हर चुनाव में  एक ही बाते होती रही कि देश को आगे बढ़ाना है , गरीबो को उनका हक़ दिलाना है और भ्रष्टाचार को मिटाना है।  देश के  गरीब और गरीबी को लेकर कांग्रेस की नीति बनती रही और चुनाव में कांग्रेस को भारी बहुमत भी मिलते रहे।  गरीबी नहीं मिटी। आबादी बढ़ती गयी और उसी अनुपात में गरीबी बढ़ती गयी।  बाद के वर्षो में राजनीति तो बदली लेकिन वोट पाने के केंद्र में गरीबी की राजनीति नहीं बदली।   कई चुनाव  गुजर गए।  हर चुनाव के बाद महंगाई और भ्रष्टाचार।  बाद के वर्षो में भ्रष्टाचार सब पर भारी दिखने लगी।  इस भ्रष्टाचार में सबने गोता लगाया।  सबने खाया।  सबने कमाया।  सबने पीया और अघाया।  क्या बीजेपी वाले , क्या कांग्रेस वाले , क्या तमाम क्षेत्रीय राजनीति करने वाले।  जिसको जहां मौक़ा मिला सरकारी पैसे को निगल गया।  किसी भी सरकार मर इतनी हिम्मत नहीं रही कि वह भ्रष्टाचार पर चोट कर सके।  सबको डर  था।  चुनाव हारने का डर।  इसमें कोई शक नहीं कि प्रधानमन्त्री मोदी ने इस गंभीर समस्या पर गौर किया।  इसके परिणाम आगे जो भी हो लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि  मोदी ने कालाधन निकालने और भ्रष्टाचार को बंद करने का पहला व्यापक अभियान चलाया है।  इस भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के अपने स्याह और सफ़ेद पक्ष हो सकते है , लेकिन नोटबंदी की नीति का असर अगर थोड़ा भी पड़  गया तो आने वाला भारत बदल सकता है।  
         लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है ? नोटबंदी की राजनीति धीरे धीरे तो सामने आएगी ही। अभी तो देश की आम जनता अच्छे दिनों की आस में अपना सब कुछ न्योछाबर करने को तैयार है। उसे उम्मीद है की भले ही इसका लाभ उसे नहीं मिले लेकिन भ्रष्टाचारियो पर नकेल तो लग जाए।  कालाधन की जमाखोरी पर अंकुश तो लग जाए।  तो देश भर में लाइन में खड़े लोगो को यही सोच है। लेकिन इस देश का मिजाज बदलता भी है।  हमेशा कीर्तन गाने वाले लोग भी यहाँ उग्र हो जाते है।  अकसर हां में हां मिलाने वाले लोग जब उग्र होते है तो मामला पेचीदा हो जाता है।  मोदी की नोटबंदी को लेकर अब कुछ लोग सुगबुगाने लगे है।  कहते है की बीजेपी हिन्दू , हिन्दुत्व और हिंदुस्तान की राजनीति करती रही है।  इसी विचारधारा से जुड़े हिन्दू महासभा के लोग अब मोदी के विरोध में कीर्तन गाने लगे है।  उग्र हो चले है। 
      हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय माहसचिव पूजा शकुन पांडेय ने पिछले दिनों अलीगढ में एक सभा को संबोधित करते हुए मोदी की नोटबंदी को हिन्दू विरोधी करार दिया है।  पांडेय का कहना है कि मोदी सरकार ने नोटबंदी की योजना हिन्दू शादी कैलेंडर में शुरू की है।  इस योजना की वजह से कई शादिया टूट गयी है या फिर नहीं हो सकी है।  मोदी सरकार का यह दोहरा चरित्र है।  एक तरफ वह हिन्दू शादियों पर नकेल कस रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी के सांसद महाराष्ट्र शोलापुर में इस्लामिक बैंको का बढ़ावा दे रहे है।  अभी हाल में ही शोलापुर में बीजेपी सांसद सुभाष देशमुख ने इस्लामिक बैंक का उदघाटन किया है।  इस बैंक के जरिये गरीब मुस्लिम परिवार को जीरो ब्याज पर लोन देने की योजना है। 
          पूजा पांडेय यही तक नहीं रुकी। उन्होंने नोटबंदी की योजना को मोदीबंदी तक कह डाला।  उनका कहना था कि आने वाले दिनों में यही नोटबंदी मोदीकी राजनीति को समाप्त कर देगी।  हिन्दू महासभा के उत्तरप्रदेश प्रभारी ने कहा है कि जो लोग मोदी सरकार की नोटबंदी योजना का विरोध कर रहे है उसे जबरन राष्ट्रद्रोही सावित करने की कोशिश की जा रही है।  ऐसे लोगो को डराने  की कोशिश जारी है। अगर मोदी भक्तो को ऐसा लगता है कि इस खेल का लाभ यूपी चुनाव में मिल सकता है तो यह उनके लिए काल सावित हो सकता है। 
          कह सकते है कि नोटबंदी का विरोध अब शुरू हो गया है।  हालांकि नोटबंदी को लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जिस तरीके से इन नोतबड़ी की राजनीति में पूरी जनता को परेशान किया गया है इससे आम लोगो में रोष व्याप्त है।  

No comments:

Post a Comment