Monday, April 17, 2017

अब बंगाल को भी फतह कर सकती है बीजेपी !


अखिलेश अखिल
उपचुनाव में बंगाल की कांथी सीट भले ही भाजपा हार गयी लेकिन जिस तरह से उसका मत प्रतिशत बढ़ा है वह सत्ताधारी पार्टी और वाम दलों के साथ ही कांग्रेस की नींद उड़ाने के लिए काफी है। जातिविहीन बंगाली समाज अब हिन्दुत्व की राग अलापने लगा है। बंगाल की 74 फीसदी हिन्दू आवादी को लगने लगा है कि सत्ता में बैठी ममता की सरकार सिर्फ 26 फीसदी अल्पसंख्यंकों की राजनीति कर रही है। बंगाली समाज अब कहने लगा है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। जनता की सोच में अगर यह बात आ गयी है तो साफ़ है कि बंगाल की जातिविहीन समाज अब ममता की राजनीति में छिद्र कर देगी। आनेवाले समय में बीजेपी की राजनीति हिन्दुत्वा के मसले पर और उग्र होगी। ऐसे में ममता की नीति हिन्दुओं के फीवर में नहीं बनती है तो बंगाल में बीजेपी की बढ़ती राजनीति को रोकना असंभव है। कह सकते हैं कि अगले विधान सभा चुनाव में 294 सीटों वाली बंगाल विधान सभा में बीजेपी 200 का आंकड़ा भी पार कर जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। अगर ऐसा होता है तो इसके लिए सिर्फ ममता बनर्जी दोषी होगी।
बंगाल उपचुनाव में भले ही ममता ने बाजी जीतकर अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने की कोशिश की है लेकिन बीजेपी की बढ़ती राजनीती बहुत कुछ कह जाती है। कह सकते है की बीजेपी का यह शानदार प्रदर्शन रहा है। इस शानदार प्रदर्शन की कई वजह है।लेकिन मुख्य वजह यह भी है कि रामनवमी के अवसर पर हथियार के साथ जुलूस निकालने के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि बंगाल में नहीं चलेगा शस्त्र प्रदर्शन।सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाली भाजपा धर्म के नाम पर लोगों को बांट रही है।रामनवमी अखाड़ा की आड़ में भाजपा नेता शस्त्र प्रदर्शन कर रहे हैं, माकपा और कांग्रेस साथ दे रही है।भाजपा राज्य में धर्म के नाम पर लोगों को बांट रही है।राज्य में हथियार लेकर रैली निकालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।धर्म के नाम पर राज्य को जो भी बांटने की कोशिश करेगा, उसे जनता बरदाश्त नहीं करेगी।सरकार ने सख्त रुख अपनाया।विधायक व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत गैर जमानती मामला दर्ज किया गया।उनके खिलाफ एक अन्य मामला भी दर्ज किया गया, जिसमें कहा गया कि बच्चों के हाथों में आखिर हथियार किसने दिये ? बच्चे हथियार लेकर कैसे जुलूस में शामिल हुए ? उधर, हथियार के साथ जुलूस निकालनेवाले संगठनों के खिलाफ भी मामले दर्ज किये गये। कार्रवाई पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि क्या यह कानून सिर्फ मेरे लिए है ? क्या इससे पहले कभी हथियार लेकर कोई रैली नहीं निकली है ? आखिर पहले क्यों कार्रवाई नहीं की गयी ? रामनवमी पर सदियों से यह शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें लोग परंपरा के अनुसार गदा व तलवार लेकर चलते हैं। रैली में किसी भी बच्चे के हाथ में कोई हथियार नहीं दिया गया और न ही उन्होंने किसी बच्चे को हथियार दिया। साथ ही उन्होंने राज्य प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत ही खराब हो गयी है।राज्य में मां-बहनों की इज्जत दावं पर है, इसलिए वह अगर अपने बचाव के लिए हथियार लेकर चलते हैं तो इसमें क्या बुराई है।अपनी अस्मत बचाने के लिए ऐसा करना गलत नहीं है।आरएसएस के प्रांत कार्यवाह डॉ जिष्णु बसुु ने सरकार की कार्रवाई पर कहा कि यदि शस्त्र लेकर जुलूस निकालने से कानून का उल्लंघन होता है, तो यह सभी के लिए होना चाहिए।मुहर्रम में तलवार लेकर जुलूस निकाला जाता है, तो क्या कानून का उल्लंघन नहीं होता है, तब राज्य प्रशासन और पुलिस क्यों नहीं कार्रवाई करती है।सभी के लिए समान कानून होना चाहिए, केवल एक वर्ग को संतुष्ट करने के लिए इस तरह की कार्रवाई की गयी है, यह पूरी तरह से निंदनीय है।राहुल सिन्हा वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि रामनवमी जुलूस में बच्चे हथियार लेकर शामिल नहीं हुए थे, बल्कि वे खिलौने लिये हुए थे।आज हथियार तो बम, बंदूक और मशीनगन होता है, जो तृणमूल के समर्थकों के पास है। बहरहाल, इतिहास भी संतोषजनक नहीं कहा जा सकता।बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी।बंगाल में दुर्गा पूजा हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है।ये वो समय होता है जब पूरा बंगाल जश्न में डूबा होता है, लेकिन कालीग्राम के लोगों के लिए यह बात सही नहीं है।मालदा से 75 किलोमीटर दूरी पर इस गांव में दुर्गापूजा का जश्न नहीं होता।सांस्कृतिक तौर पर बेहद समृद्ध गांव माना जाता है, लेकिन यहां दुर्गा पूजा पर तनाव की स्थिति रहती है।लगभग हर साल दुर्गा पूजा के आसपास ही मुहर्रम पड़ता है और इसके नाम पर दुर्गा पूजा पर बंदिशें और रोकटोक लागू कर दी जाती हैं।हिंदू आबादी वाले इस गांव से जब भी ताजिया गुजरता है, साल भर शांत रहने वाला ये इलाका हिंसा की भेंट चढ़ जाता है।साल 2015 में भी यही हुआ था और साल 2016 में भी वही हुआ।कमोबेश समूचे पश्चिम बंगाल में इसी कदर का माहौल है।
तो फिर बंगाल की राजनीति क्या कहती है ? राजनीति तो यही कह रही है कि जिस तरह से ममता की आक्रामक राजनीति वाम राजनीति को खा गयी ठीक उसी तरह अब बीजेपी की हिन्दुत्व की राजनीति ममता की राजनीति को निगल सकती है। प्रदेश की जनता अब खुलकर धार्मिक बातें करने लगी है और ममता की मुस्लिम परास्त राजनीति की आलोचना करने लगी है। यह आलोचना कोई मामूली नहीं। इससे पहले कभी भी बंगाल की राजनीति और बंगाली समाज में जाति की राजनीति उभर कर सामने नहीं आयी ,लेकिन धार्मिक अस्तित्व की बातें अगर वहा होने लगी है तो बंग समाज को बंटने से भला कौन रोक सकता है।

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