Sunday, June 4, 2017

विपक्षी नेताओं ने दिया चेन्नई से एकता का सन्देश



अखिलेश अखिल 
बीते शनिवार को चेन्नई में विपक्षी नेताओं की आवाजाही से विपक्षी राजनीति को बल  मिल गया।  तमिलनाडु के पूर्व सीएम करूणानिधि के 94 वें जन्म दिन को मनाने देश भर के दिग्गज नेता चेनाई पहुंचे और मंच भी साझा किया।  इस मंच से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खूब बोले और वाहवाही भी लुटी।  माना जा रहा है कि करूणानिधि के जन्म दिन के बहाने विपक्षी एकता को एक सूत्र में बाँधने की यह कोशिश थी। राजनितिक जानकार मान रहे हैं कि  अगर ये एकता बनी रह गयी तो आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी की विस्तारवादी राजनीति को धक्का लग सकता है।   यह बात और है कि विपक्षी एकता की शुरुआत तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भोज से ही हो चुकी है लेकिन बीते शनिवार को जब डीएमके नेता और तमिलनाडु के पूर्व सीएम करुणानिधि के 94वें जन्मदिन समारोह में विपक्ष के कई नेता एक मंच पर जुटे, तो इस पर मुहर लगती दिखी। इस मंच पर नीतीश कुमार के पहुंचने के बाद उन लोगों को करारा धक्का लगा है जो  नीतीश कुमार के सोनिया के भोज में नहीं पहुंचने से कई तरह की राजनीति को भाप रहे थे। आपको याद होगा कि सोनिया गांधी के भोज के दूसरे दिन पीएम मोदी के भोज में शामिल हुए थे जिसके बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि नीतीश बीजेपी के साथ जा सकते हैं लेकिन नीतीश कुमार ने इस समारोह में शामिल होकर अटकलें लगाने वालों को करारा जवाब दिया है।

करुणानिधि के 94वें जन्मदिन के बहाने देश के कई विपक्षी नेताओं की गोलबंदी को  2019 से पहले भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय महागठबंधन की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित विपक्ष के कई नेता शामिल हुए थे ।
 चेन्नई के इस मंच से नीतीश  कुमार की हैशियत बिहार से बाहर ज्यादा  मजबूत होती दिखी है।  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने बिहार में शराबबंदी के फायदे गिनाये और डीएमके को पुराने वायदों की याद दिलाते हुए कहा कि वे जब सत्ता में आएं, तो तमिलनाडु में भी शराबबंदी लागू करें। नीतीश कुमार ने कहा कि डीएमके नेता एम के स्टालिन तमिलनाडु में अगली सरकार का नेतृत्व करेंगे। हालांकि बीमारी की वजह से समारोह में खुद करुणानिधि शामिल नहीं हुए। खुद नीतीश कुमार ने करुणानिधि के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। करुणानिधि के संसदीय जीवन का 60 साल भी पूरा हुआ है। 
नीतीश ने बताया कि मैंने स्टालिन से कहा है कि वे अपने पिता एम करुणानिधि के शराबबंदी के वायदे को जरूर पूरा करें। नीतीश ने डीएमके के 2016 विधानसभा चुनाव में जारी घोषणा पत्र की याद भी दिलायी, जिसमें सत्ता में आने पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का वायदा किया गया था। उन्होंने कहा, इससे सामाजिक न्याय आंदोलन को मजबूती मिलेगी। 
    नीतीश ने कहा कि बिहार में शराब बंदी से कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं के मामले कम हुए हैं, ताकि घरेलू हिंसा और अपरराध की दर भी घटी है। समारोह में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी पर नीतीश ने कहा कि यह राष्ट्रीय राजनीति में करुणानिधि के प्रभाव को दर्शाता है। 
उन्होंने कहा कि हम सब अलग-अलग पार्टियों और देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां आये हैं, जो करुणानिधि के भारतीय राजनीति पर पकड़ को साबित करता है। नीतीश ने मंडल कमीशन की सिफारिसों को लागू कराने में डीएमके प्रमुख की भूमिका को भी रेखांकित किया।
      विपक्षी एकता की पहली अग्नि परीक्षा राष्ट्रपति चुनाव में होने की संभावना है।  माना जा रहा है कि अगर बीजेपी सर्वसम्मति राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़ा करना चाहती है तो विपक्ष भी सहयोगी बन सकता है। ऐसा होने पर विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा। देखना होगा कि विपक्ष की भूमिका आगे कहा तक सार्थक हो पाती है क्योंकि विपक्षी एकता इस बात पर निर्भर करेगा कि उसको संचालित करने का जिम्मा किसके हाथ जाता है। 


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