Wednesday, December 27, 2017



हाँफते चावल बाबा ,फुफकारते जोगी और पथराई कांग्रेस के बीच छत्तीसगढ़िया 
अखिलेश अखिल 

अगले चुनाव में छत्तीसगढ़ की राजनीति क्या होगी ? सरकार किसकी बनेगी और जनता को क्या मिलेगा इसी को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्म है। सत्ता में बैठे लोग भी परेशान है और विपक्ष वाले भी। इसी बीच यह सवाल भी खड़ा होता जा रहा है कि रमन सिंह की राजनीति फिर रंग दिखाएगी या पिट जायेगी। एक सवाल और भी है की प्रदेश में चावल बाबा के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री रमन सिंह का यश अभी बरकरार है या समाप्त हो गया ? फिर कांग्रेस की राजनीति सामने आती है और कांग्रेस से अलग होकर छत्तीसगढ़ को एक नया नेतृत्व देने का दावा करने वाले अजित जोगी  पर भी सबकी नजरें टिकी हुयी है। पहले कांग्रेस और बीजेपी में सीधी लड़ाई चलती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं दिखता क्योंकि अजित जोगी की राजनितिक विसात पुरे प्रदेश में फ़ैल चुका है। अजित जोगी की पार्टी की हालत चाहे जो भी हो लेकिन इतना तय हो चुका है कि राज्य में अब त्रिकोणात्मक चुनाव होंगे और सत्ता की छवि जोगी के हाथ चली जायेगी। इसलिए जोगी पर सबकी निगाहें टिकी है। कांग्रेस की कोशिश जोगी से में मिलाप की है तो बीजेपी वाले जोगी को आगे बढ़ा रहे हैं ताकि कांग्रेस को और गर्त में धकेला जा सके। 
   छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की राजनीति पर सबकी नजर है। उनकी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने अगले साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा शुरू कर दी है। उन्होंने एक साल पहला अपनी पार्टी की पहली सूची जारी की। कुछ समय पहले कांग्रेस ने जब पीएल पुनिया को राज्य का प्रभारी बनाया था, तब कहा जा रहा था कि कांग्रेस और जोगी की पार्टी में तालमेल हो सकता है। ध्यान रहे जोगी और पुनिया दोनों आईएएस अधिकारी रहे हैं और दोस्त रहे हैं। पर तालमेल की अटकलों को गलत साबित करते हुए जोगी ने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी।
हालांकि कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि जोगी और उनके परिवार के ऊपर भाजपा का दबाव है कि वे कांग्रेस के साथ तालमेल न करें। भाजपा को लग रहा है कि अगर जोगी की पार्टी अलग चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस को इसका बड़ा नुकसान होगा। लगातार चौथा चुनाव जीतने की तैयारी कर रही भाजपा कांग्रेस के वोट बांटने रणनीति पर काम कर रही है। पर छत्तीसगढ़ की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा का यह गणित उलटा भी हो सकता है। जोगी उसको भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि जोगी के मजबूती से लड़ने से चुनाव त्रिकोणात्मक बनेगा और तब विधानसभा त्रिशंकु भी हो सकती है। अभी कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई में भाजपा को मामूली बढ़त मिलती है। दोनों के वोट में एक फीसदी या उससे कम का ही अंतर रहता है। सीटों की संख्या में भी ज्यादा का अंतर नहीं रहता है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि जोगी की पार्टी दोनों के वोट में सेंध लगाएगी। ऐसे में दोनों की सीटों की संख्या घट सकती है। ऐसे में जोगी किंगमेकर की भूमिका में आ जाएंगे। अभी जोगी की पत्नी रेणु जोगी और बेटे अमित विधायक हैं। अगर वे सभी सीटों पर लड़ते हैं और चार, पांच या इससे ज्यादा विधायक जीत गए तो सत्ता की चाबी उनके हाथ में आ सकती है।
     छत्तीसगढ़ में बीजेपी 15 साल की सरकार अगले साल पूरा करेगी। रमन सिंह 15 साल से मुख्यमंत्री है। पुरे प्रदेश में चावल और नमक के जरिये जनता को अपने पक्ष में करने में रमन सिंह अब तक कामयाब ही रहे हैं। प्रदेश की गरीबी और बेरोजगारी से इतर रमन सिंह की राजनीति सबको चावल पहुंचने तक सिमित रही है। लेकिन अब शायद उनका चावल वाली राजनीति सबको बोर कर रही है। रमन सिंह भी समझने लगे हैं कि इस बार चावल पर बात नहीं बनेगी। चुनाव को नजदीक आते देख रमन सरकार बहुत कुछ करने का स्वांग भर्ती आ रही है लेकिन चालक जनता भी उनके खेल को समझ रही है।  बीजेपी को संघ से भी बहुत कुछ फीड मिलता है और संघ की नजर में अब जनता का यकीन रमन सिंह पर पहले जैसा नहीं रहा। इसलिए बीजेपी और संघ की राजनीति अब अजित जोगी की राजनीति को भी पढ़ रही है और समझ रही है। अजित जोगी की संभावित राजनीति और संभावित हार जीत को मानकर अभी से ही बीजेपी अजीत जोगी के साथ गलबहियां करने में जुटी है। देखना होगा कि अजीत की राजनीती छत्तीसगढ़ के निर्माण में बीजेपी और कांग्रेस को कहाँ पहुंचाकर  दाव खेलती है। 

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