Thursday, December 28, 2017

फरेबी मर्द से भला सच्चा नामर्द


अखिलेश अखिल 
धार्मिक ग्रंथों में तमाम ऐसे प्रसंग हैं जो हमें महान ऋषि मुनियों ,महर्षियों के तप ,बल ,ज्ञान और तपोशक्ति से साक्षात्कार कराते हैं। शाप देने वाले और शापित होने वाले आत्मायों की बड़ी सूचि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। उन ग्रंथों में यह भी वर्णित है कि एक बार ऋषि मुनियों के मुँह से शाप निकल गया तो फिर उसका कोई काट नहीं। उसे भुगतना जरुरी है। शापित लोग जब उसी ऋषि मुनियों से दया की भीख मांगते थे तो द्रवित  होकर वही ऋषि शाप से मुक्ति का उपाय भी बता जाते थे लेकिन तब तक शाप का फल भोगना आवश्यक था। सतयुग ,त्रेता और द्वापर तक ऐसा विधान था क्योंकि तबतक संत महात्माओं में तपोबल था। उनमे शक्ति थी ,उनमे ब्रह्म था और उनमे ईश्वरीय आराधना का तपो तेज पुंज भी था। वे सत्य से परे नहीं थे। वे झूठ से परे थे ,वे माया ,लोभ और कुचरित्र से परे थे। इसलिए वे शक्तिवान थे। लेकिन अब ? ऐसा देखने को नहीं मिलता। कलयुग में ऐसा संभव भी नहीं। यहां ना कोई ब्रह्म है ना ही उसमे कोई ब्रह्म तेज।  ना कोई सच्चा है ना ही कोई माया से परे। आज पूरी सृष्टि की बुनियाद ही झूठ ,फरेब ,दगाबाजी ,मायावी और धोखेबाजी से लबरेज है। जो होते दिख रहा है और जो करते दिख रहा है महज एक धोखा है ,ठगी है और भ्रम। इसके सिवा कुछ भी नहीं। 
      तमाम धारणिक ग्रंथों को पढ़ जाइये और तब के महर्षियों ,ऋषि मुनियों के इतिहास को देखिये तो पता चलता है कि आदि काल में जितने भी भी ऋषि मुनि हुए हैं उनमे ब्राह्मण ना के बराबर ही हुए हैं। इनके माता -पिता कौनहैं इसकी जानकारी मिलना मुश्किल है। कई ग्रंथों में नियोग के जरिये उत्पत्ति की कहानी आती है।  वह नियोग क्या था कहना मुश्किल है। आज के सन्दर्भ में शायद वह नियोग कृत्रिम फर्टिलिटी से लगाया जा सकता है। फिर माँ कौन और बाप कौन इसे कौन बताये !महाभारत को बार बार पढ़िए। महाभारत के लगभग पुरे पात्र वर्ण शंकर ही दीखते हैं। बाप किसी जाति के और माँ किसी और जाति की।  फिर महाभारत के पात्रो को क्षत्रिय गौरव परम्परा से कैसे जोड़ा जाय। यह सब शोध का विषय है। आज ना बाह्मणो में ब्राह्मणत्व  है ना ही क्षत्रियों में क्षात्र धर्म। दोनों धर्म से विमुख हैं। अपने चाल चरित्र और चिंतन से विमुख। वैश्य और शूद्र की जिस तरह महिमा कही गयी है और उसे नीचे दर्जे का मानव माना गया है ,वह आज समाज के शीर्ष जगहों पर आसीन है। होना भी चाहिए।  प्रकृति का नियम भी यही है। आज उसी शूद्र और वैश्य के पीछे ब्राह्मण और क्षत्रिय शाष्टांग नतमस्तक है। फिर सतयुग ,त्रेता और द्वापर का ब्रह्मतेज इनमे कैसे आये। सब कुछ गडमड हो गया है। चुकी अब सबकी पोल खुल चुकी है इसलिए कलयुग में सबकुछ वर्णशंकर ही दिखता है। जब सब कुछ का घालमेल होगा तो वर्णशंकर ही तो होगा। यही कलयुग की माया है ,यही कलयुग का प्रकोप भी और दया भी। यहां सबसे पहले चरित्र का लोप होता है। दम्भ ,घमंड ,अहंकार ,झूठ, फरेब ,दगाबाजी और ढीठपन का बोलबाला होता है। हम सब ऐसा ही तो हैं। 
      वर्तमान समाज को राजनीति संचालित करती है। राजनीती राज सत्ता से जुडी है। तब के राजा सदाचारी ,प्रजापालक थे। झूठ बोलना नर्क में जाने जैसा था लेकिन अब ऐसा नहीं। वे मर्द थे।  उनमे मर्दानगी थी।  अपने बातों पर अटल रहने का बुता था लेकिन अब झूठ बोलना अपमान नहीं मान का विषय है। झूठ बोलना मर्यादित माना जाता है। इसलिए हम आज मर्द नहीं नामर्द से भी गए गुजरे हैं। कलयुग में ऐसा होता है ,होगा भी। 
      गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी के भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत अन्य कांग्रेस नेताओं पर सवाल खड़े किए गए थे। इसपर कांग्रेस ने हंगामा किया, जिसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संसद में सरकार की ओर सफाई पेश की थी और कहा था कि पीएम मोदी की बातों का वह मतलब नहीं था। जेटली की सफाई पर अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुटकी ली है।
      राहुल गांधी ने ट्विटर पर ‘धन्यवाद मिस्टर जेटली। देश को यह याद दिलाने के लिए कि हमारे पीएम जो कहते हैं, उसका वह अर्थ नहीं होता और पीएम वह बात नहीं कहते, जिसका कोई अर्थ होता है।’ इस दौरान उन्होंने हैशटैग ‘बीजेपीलाइज’ का इस्तेमाल किया। अपने ट्वीट के साथ राहुल ने पीएम के उस भाषण का वीडियो भी साझा किया जिसमें मोदी ने गुजरात चुनाव में पाकिस्तान की साजिश होने की बात कही थी।
जेटली ने सरकार की सफाई में कहा था कि "माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयाम या भाषणों में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह या पूर्व उप-राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी पर कोई सवाल नहीं उठाया। न ही उनके बयान के मायने इनकी देश के प्रति वचनबद्धता पर सवाल उठाने के थे। ऐसी कोई भी धारणा पूरी तरह गलत है। हम इन नेताओं का और इनकी राष्ट्र के प्रति वचनबद्धता का भी संपूर्ण आदर करते हैं।"
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा के पालनपुर में रैली के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर पर हमला बोला था। मोदी ने कहा था कि अय्यर ने अपने घर पर पाक के पूर्व जनरल अरशद रफीक से मीटिंग की थी जिसमें अहमद पटेल को सीएम बनाने की बात हुई थी। मोदी ने कहा कि मीटिंग में मनमोहन सिंह समेत कई सीनियर नेता मौजूद थे।
     जेटली जी की संसदीय बयान पर आप हंस सकते हैं ,मायूस हो सकते हैं लेकिन शर्मशार नहीं हो सकते। क्योंकि यह कलयुग है। झूठ और झूठ का बतंगड़ यहां का रिवाज है। लेकिन अफ़सोस केवल यही है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग जब जनता को बेवकूफ बनाना शुरू कर दे तो बात कुछ और हो जाती है। मणिशंकर के एक नीच वाले बयान से जब गुजरात की राजनितिक धारा बदल सकती है तो फिर जेटली के बयान से संसद क्यों नहीं चल सकती। लेकिन पूर्व की तमाम बातें हमारे लोकतंत्र और इस तंत्र के संविधानिक पदों पर किसी कुठाराघात से कम नहीं। 

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