Friday, January 19, 2018

हे गोदी मीडिया! तनी हमरो गुहार सुनिए

अखिलेश अखिल 
तीन दिन पहले की बात है। दिल्ली स्टेशन के बाहर खड़ा किसी का इन्तजार कर रहा था। पूरब की तरफ से रेल आयी थी। स्टेशन के बाहर पुरबियों का ताँता लग गया। बाहर निकलते लोगों की कतार ख़त्म ही नहीं हो रही थी। माथा चकरा गया। बूढ़े, जवान ,महिलायें ,बच्चे गवईं भेष भूषा में बाहर निकल रहे थे। सबके माथे और कंधे पर बोरी -झोरी लदे थे। अधिकतर महिलायें अपने मासूम बच्चों को बगल में दबाये अचकचाए नज़रों से बाहर निकल कर दिल्ली की हावो हवा की गंध ले रही थी। रहा नहीं गया तो एक अधेड़ से पूछा - कहाँ से आ रहे हैं भाई जी।  जबाब मिला बलिया से। उनके साथ ही उनके समधी का परिवार भी था। छपरा से आये थे। फिर पूछा कहा जाएंगे ? जबाब मिला अब जहां भगवान् ले जइहें। आबे में बड़ा दिक्कत भइल हां भाई साहेब। माल जाल से भी बत्तर हाल बा इस गाडी के। मन दुखी हो गया यह सब सुनकर। पूछा -काम की तलाश में आये हैं क्या ? त - और काहे के लिए आएंगे ! उहाँ कुछ बचा है। काम धाम है नहीं और ऊपर से बाते -बात में फसाद। जब से ई सरकार आइल ह गावं का हाल ख़राब बा। अब एहि रहकर कुछ काम कैल जाई। इ तीन तीन गो बेटी के बिआह कइसे होई। चुप्पी साधे उस परिवार को ऑटो में बैठाकर बिदा कर दिया। 
         सच तो यही है जो आप पढ़ रहे हैं। लेकिन इस पर कही कोई शोर गुल नहीं है। जो वृत्तांत गाड़ी से उतरे महेश भाई सुना गए  भारत की सच्चाई का बखान है। सरकार कहती है कि सब कुछ हो रहा है। सबका साथ सबका विकास हो रहा है। देश अमेरिका बनने के कगार पर है। रोज रोज देश अंतरिक्ष मिशन पर जा रहा है। हथियारों का जखीरा इकठ्ठा कर रहा है। करोडो -अरबो का प्रोजेक्ट चलता दिख रहा है। विजली पानी पहुंचाने का नारा दिया जा रहा है। लेकिन यहां तो पूरी जमात ही पलायन का शिकार है। भूख ,गरीबी ,बेकारी और शोषण से पूरा समाज काँप रहा है। अब गाँव में वही लोग रह गए हैं जो सरकार और राजनीती से जुड़े हैं और सरकारी योजनाओं के नाम पर लूट खसोट कर रहे हैं।  याद कीजिये यूपी चुनाव से पहले के वादे। योगी की सरकार तो बन गयी लेकिन पूर्वांचल का पलायन जारी है। बुंदेलखंड में इंसानी कराह जारी है और लोग अपनी इज्जत -आबरू बचाने से लेकर जान बचाने के लिए भागते फिर रहे हैं। गजब का तमाशा है भाई। हे गोदी मीडिया ज़रा इन तस्वीरों को दिखायो ताकि कोई लज्जित तो सके। 
      कहाँ का बखान कीजियेगा। पूरा देश मर रहा है। लाश के सामान है। बोलने पर सजा हो जायेगी। केवल वोट पाने के लिए गरीब गुरबों की फ़ौज खड़ी की गयी है। जो लोग गाँव में रहकर कभी हिन्दू -मुसलमान की बात नहीं करते थे अब करने लगे हैं। गाय सबसे ज्यादा प्रधान हो गयी है। अपना पेट भरे या ना भरे गाय का पेट भरना है। दिन भर दूसरे के हिस्से की लूट भले ही करते रहे मुँह में राम नाम ,जय श्रीराम की रट चलती रहती है और माथे पर त्रिपुण्ड से लेकर रामनामी चन्दन। 
      पिछले दिनों बुन्देल खंड ,पूर्वी उत्तरा प्रदेश बिहार के कई इलाकों और मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान और छत्तीसगढ़ के गरीब इलाकों की कहानी पढ़ी और देखि तो आवाक रह गया। 21 वीं सदी में मानवता का इतना छरण और मानव समाज के साथ इतना अत्याचार शायद ही किसी सदी में देखा गया हो। लेकिन आश्चर्य तो यह है कि हम मीडिया के लोग देश की इस भयंकर त्रासदी को दिखाने में दिलचस्पी नहीं लेते। पूरा देश उजाड़ पर है। पूरा गाँव खाली हो रहा है। पूरी सामजिक संस्कृति तहस नहस है और देश की बड़ी आवादी कोर्ट मुकदमो से लेकर अस्पताल में हाजिरी लगाती फिर रही है लेकिन गोदी मीडिया अपने में मस्त और व्यस्त है। 
       विदेशी मेहमान पर कई दिनों से बहस जारी है लेकिन अपने लोगों की गरीबी ,पलायन की तस्वीर गोदी मीडिया से गायब है। आजाद भारत का यह खेल शायद ही कभी देखने को मिला होगा। लोक तंत्र का चारो स्तंभ लगता है बेकार और बेजान हो गया है और सबसे बड़ी बात कि जब समाज ही गोदी मीडिया से लगा हो जाए तो कहने के लिए कुछ बचता नहीं। 
       

       

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