Saturday, January 6, 2018

धरती पर होती इंद्र सभा और बगुला भगतों की नियत

अखिलेश अखिल 
महाभारत सभा पर्व के ‘लोकपाल सभाख्यान पर्व’ के अध्याय 7  में इन्द्र की सभा का बेजोड़ वर्णन है। नारद जी सभा का वर्णन अर्जुन के सामने कर रहे हैं। नारद जी कहते हैं - ''कुरुनन्दन! इन्द्र की तेजोमयी दिव्य सभा सूर्य के समान प्रकाशित होती है।स्वंय इन्द्र ने उस पर विजय पायी है। उसकी लंबाई डेढ़ सौ चौड़ाई सौ योजन की है। वह आकाश में विचरने वाली और इच्छा के अनुसार तीव्र या मन्द गति से चलने वाली है। उसकी ऊँचाई भी पाँच योजन की है। उसमें जीर्णता, शोक और थकावट आदि का प्रवेश नहीं है। वहाँ भय नहीं है, वह मंगलमयी और शोभा सम्पन्न है। उसमें ठहरने के लिये सुन्दर-सुन्दर महल और बैठने के लिये उत्तमोत्तम सिंहासन बने हुए हैं। वह रमणीय सभा दिव्य वृक्षों से सुशोभित होती है। कुन्तीनन्दन! उस सभा में सर्वश्रेष्ठ सिंहासन पर देवराज इन्द्र शोभा में लक्ष्मी के समान प्रतीत होने वाली इन्द्राणी शची के साथ विराजते हैं। उस समय वे अवर्णनीय रूप धारण करते हैं। उनके मस्तक पर किरीट रहता है और दोनों भुजाओं में लाल रंग के बाजू बंद शोभा पाते हैं। उनके शरीर पर स्वच्छ वस्त्र और कण्ठ में विचित्र माला सुशोभित होती है। वे लज्जा, कीर्ति और कान्ति- इन देवियों के साथ उस दिव्य सभा में विराजमान होते हैं। राजन! उस दिव्य सभा में सभी मरूद्गण और गृहवासी देवता सौ यज्ञों का अनुष्ठान पूर्ण कर लेने वाले महात्मा इन्द्र की प्रतिदिन सेवा करते हैं। सिद्ध, देवर्षि, साध्यदेवगण तथा मरुत्वान- ये सभी सुवर्ण-मालाओं से सुशोभित हो तेजस्वी रूप धारण किये एक साथ उस दिव्य सभा में बैठकर शत्रुदमन महामना देवराज इन्द्र की उपासना करते हैं। वे सभी देवता अपने अनुचरों के साथ वहाँ विराजमान होते हैं। वे दिव्य रूप धारी होने के साथ ही उत्तमोत्तम अलंकारों से अलंकृत रहते हैं। कुन्तीनन्दन! इसी प्रकार जिनके पाप धुल गये हैं, वे अन्नि के समान उद्दीप्त होने वाले सभी निर्मल देवर्षि वहाँ इन्द्र की उपासना करते हैं। वे देवर्षिगण तेजस्वी, सोमयाग करने वाले तथा शोक और चिन्ता से शून्य हैं। पराशर, पर्वत, सावर्णि, गालव, शंख, लिखित, गौरशिरा मुनि, दुर्वासा, क्रोधन, श्येन, दीर्घतमा मुनि, पवित्रपाणि, सावर्णि (द्वितीय), याज्ञवल्क्य, भालुकि, उद्दालक, श्वेतकेतु, ताण्डव्य, भाण्डायनि, हविष्मान, गरिष्ठ, राजा हरिश्चंद्र, हृद्य, उदरशाण्डिल्य, पराशरनन्दन व्यास, कृषीवल, वातस्कन्ध, विशाख, विधाता, काल, करालदन्त, त्वष्टा, विश्वकर्मा तथा तुम्बुरु- ये और दूसरे अयोनिज या योनिज मुनि एवं वायु पीकर रहने वाले तथा हविष्य-पदार्थों को खाने वाले महर्षि सम्पूर्ण लोकों के अधीश्वर वज्रधारी इन्द्र की उपासना करते हैं। भरतवंशी नरेश पाण्डु नन्दन! सहदेव, सुनीथ, महातपस्वी वाल्मीकि, सत्यवादी शमीक, सत्यप्रतिज्ञ प्रचेता, मेधातिथि, वामदेव, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, मरुत्त, मरीचि, महातपस्वी स्थाणु, कक्षीवान, गौतम, तार्क्ष्य, वैश्वानरमुनि, षडर्तु, कवष, धूम्र, रैभ्य, नल, परावसु, स्वस्त्यात्रेय, जरत्कारु, कहोल, काश्यप, विभाण्डक, ऋष्यश्रृंग, उन्मुख, विमुख, कालकवृक्षीय मुनि, आश्राव्य, हिरण्मय, संवर्त, देवहव्य, पराक्रमी विष्वक्सेन, कण्व, कात्यायन, गार्ग्य, कौशिक, दिव्यजल, ओषधियाँ, श्रद्धा, मेधा, सरस्वती, अर्थ, धर्म, काम, विद्युत, जलधरमेघ, वायु, गर्जना करने वाले बादल, प्राची दिशा, यज्ञ के हविष्य को वहन करने वाले सत्ताईस पावक, सम्मिलित अग्नि और सोम, संयुक्त इन्द्र और अग्नि, मित्र, सविता, अर्यभा, भग, विश्वेदेव, साध्य, बृहस्पति, शुक्र, विश्वावसु, चित्रसेन, सुमन, तरुण, विविध यज्ञ, दक्षिणा, ग्रह, तारा और यज्ञनिर्वाहक मन्त्र- ये सभी वहाँ इन्द्रसभा में बैठते हैं।राजन! इसी प्रकार मनोहर अप्सराएँ तथा सुन्दर गन्धर्व नृत्य, वाद्य, गीत एवं नाना प्रकार के हास्यों द्वारा देवराज इन्द्र का मनोरंजन करते हैं। इतना ही नहीं, वे स्तुति, मंगल पाठ और पराक्रम सूचक कर्मों के गायन द्वारा बल और वृत्रनामक असुरों के नाशक महात्मा इन्द्र का स्तवन करते हैं। ब्रह्मर्षि, राजर्षि तथा सम्पूर्ण देवर्षि माला पहने एवं वस्त्राभूषणों से विभूषित हो, नाना प्रकार के दिव्य विमानों द्वारा अग्नि के समान देदीप्यमान होते हुए वहाँ आते-जाते रहते हैं। बृहस्पति और शुक्र वहाँ नित्य विराजते हैं। ये तथा और भी बहुत से संयमी महात्मा जिनका दर्शन चन्द्रमा के समान प्रिय है, चन्द्रमा की भाँति चमकीले विमानों द्वारा वहाँ उपस्थित होते हैं। राजन! भृगु और सप्तर्षि, जो साक्षात ब्रह्माजी के समान प्रभावशाली हैं, ये भी इन्द्र-सभा की शोभा बढ़ाते हैं। महाबाहु नरेश! शतक्रतु इन्द्र की कमल-मालाओं से सुशोभित सभा मैंने अपनी आँखों देखी है। ''
      इन्द्र और उनकी सभा का वर्णन हम आदि काल से सुनते आ रहे हैं। उस सभा का सच क्या है भला कौन जाने ! आधुनिक समाज में ऐसा संभव कहा ? लेकिन आजादी के बाद की राजनीति भी किसी इन्द्र सभा से कम नहीं। राजनीतिक दलों के नेता और सरकार के मुखिया भी किसी इन्द्र से थोड़े ही हैं। पार्टी के सारे लोग ,मंत्री संत्री और लगुआ -भगुआ अपने नेता का वर्णन भी तो नारद की तरह ही करते हैं। इंद्र और इंद्र सभा की कहानी धरती पर भी उतरती जा रही है। चारो तरफ धरती के इंद्र,सरकार और उनके मुखियाओं का वर्णन भी कुछ इसी तरह से किया जा रहा है। 
       बीजेपी शासित राज्यों की सूचि लगातार बढ़ रही है। सब पीएम मोदी जी कमाल ही तो है। उनकी दिव्य दृष्टि ,उनका चेहरा ,उनकी वाक्पटुता और उनका अंदाज सबको भा रहा है। बीजेपी शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों उनके केंद्रीय मंत्रियों के बयान को गौर से देखिये तो यह धरती स्वर्ग के ही सामान है। मोदी की तुलना भगवान से की जा रही है। धरती  पर इंद्र सभा ! की कल्पना की जा रही है। जो धरती पर इन्द्र सभा और सरकार के मुखिया को इन्द्र तक कहने से बाज नहीं आ रहे हैं उनके राजनितिक क्षेत्र की जनता कराह रही है। बिलख रही है। मंत्री -संत्री और लगुआ -भगुआ को देश की रुदाली ,गरीबो की पीड़ा ,महिलाओं का अपमान ,युवाओं की बेरोजगारी ,महंगाई और मनुष्यों के बीच की विषमता नहीं दिख रही है। 
      उधर एक तरफ इन्द्र और इन्द्र सभा की बगुला भक्तो द्वारा यशोगान जारी है तो दूसरी तरफ झारखण्ड से महिला उत्पीड़न की दर्दनाक घटना सामने आ रही है। संसद में ट्रिपल तलाक के मसले पर वोट की राजनीति जारी है तो झारखण्ड में गरीब महिला को डायन बताकर मारा -पीटा जा रहा है। मैला पिलाया जा रहा है। एक तरफ महिलाओं को तलाक से आजादी दिलाने का स्वांग है तो दूसरी तरफ महिलाओं का अपमान ! विचित्र हवा बाह रही है।
     झारखंड के देवघर में यहां एक गरीब महिला को डायन बताकर न सिर्फ उसके बाल काट दिए, बल्कि जबरन मैला भी पिलाया गया। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक देवधर कबसारवां थाना क्षेत्र की एक महिला ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मामला दर्ज करवाया है कि उसे डायन बताकर न सिर्फ प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसके बाल काटकर जबरन उसे मैला भी पिलाया गया।
जब वह खुद पर हो रहे प्रताड़ना की शिकायत करने पुलिस के पास पहुंची तो मामला दर्ज नहीं किया गया। पुलिस द्वारा शिकायत थाने में दर्ज न करने पर महिला ने कोर्ट की शरण ली है। अब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने महिला के उत्पीड़न का मामला दर्ज कर लिया है, जल्द ही इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। शिकायत में कहा गया है कि पीड़ित महिला गरीब है, जो किसी तरह मजदूरी करके अपना गुजारा करती है।
मामले के मुताबिक कबसारवां थाना क्षेत्र के एक गांव के परमेश्वर दास का बैल बीमार था, तो तांत्रिक ने इसे डायन की करतूत बताया और एक गरीब महिला को डायन बता दिया। तांत्रिक के यह कहने के बाद गांव के परमेश्वर दास, रोहित दास, देबू दास, बलवीर दास और सुशीला देवी महिला के घर पर धमककर गाली-गालौज करने लगे। जब महिला ने खुद पर हो रहे अत्याचार का विरोध किया तो महिला को बाल पकड़कर जमीन पर पटक दिया।उसकी साड़ी का आंचल काट लिया और डायन का प्रभाव खत्म करने के लिए कटे बाल और उसके आंचल को चौराहे पर ले जाकर जला दिया। झारखण्ड में हर साल दर्जनों महिलाओं के साथ ऐसा ही होता है। लेकिन यहां की इन्द्र सभा में यह सब किसी को दिखाई नहीं पड़ती। सच तो यह है कि हमारा देश बगुला भगतों से भरा हुआ  है। ये ऐसे बगुला भगत हैं जो इन्द्र को चुनौती तो देते हैं लेकिन इन्द्र के सामान हंस होते नहीं। यहां कौन हंस है खोजिये।  कोई नहीं मिलेगा। 

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