Monday, April 2, 2018

हे प्रधानसेवक !दलितों का यह भारत बंद 2019 के लिए बीजेपी को चेतावनी है

अखिलेश अखिल 
दलितों का यह भारत बंद आंदोलन अगले चुनाव में अपनी ताकत दिखाने जैसा है। कोई माने या ना माने देश के दलित अब अपने वोट का  हिसाब लेने कोबेचैन है। इस दलित आंदोलन का बड़ा असर अगले चुनाव में पडेगा और संभव है कि इसका नुक्सान बीजेपी को उठाना भी पडेगा। आगे की राजनीति पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले कुछ आंकड़ों पर गौर करें तब पता चलेगा कि दलितों का यह भारत बंद आखिर इतना मुखर क्यों है ? क्या केवल दलित आदिवासी कानून में ढील देने की वजह से पूरा भारत जल उठा है ?हरगिज नहीं। इस भारत बंद के पीछे कई महीनो की पीड़ा है ,शोषण की दास्ताँ है और राजनीतिक  सन्देश भी। इन आंकड़ों को देखिये। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में कुल 20 करोड़ 13 लाख 78 हजार 86 दलित हैं।  देश में 16.63 फीसदी दलित आबादी है।  जनसंख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दलित आबादी है।  2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल दलित आबादी 4 करोड़ 13 लाख 57 हजार 608 है।  औसत के हिसाब से सबसे ज्यादा दलित पंजाब में हैं।  पंजाब की कुल जनसंख्या में 31.94 फीसदी दलित हैं। लोकसभा की 543 सीटों में 84 सीट दलित समुदाय के लिए आरक्षित है।मौजूदा संसद में दलित समुदाय के कुल 84 सांसद में बीजेपी में कुल 40 दलित सांसद हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित उत्तर प्रदेश की सभी 17 सीटों पर बीजेपी सांसद ही हैं।
  अब दलितों पर हुए मामले को देखिये। माना जा रहा है कि  मोदी राज में दलित उत्पीड़न की बड़ी घटनाएं हुयी हैं। 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी,11 जुलाई 2016 को गुजरात के ऊना में दलित युवकों की पिटाई,गौ रक्षा के नाम पर ऊना में दलित युवकों पर हमला,मई 2017 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलितों के खिलाफ हिंसा,आंबेडकर जयंती और महाराणा प्रताप जयंती के दौरान हिंसा,1 जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में दलित समुदाय पर हमला। ये वे हमले और हिंसाक घटनाएँ है जो दलितों को बहुत कुछ सोचने कोमजबूर कर रहे हैं। उनके मन में बदले की भावना भी है। उन्हें लग रहा है कि मौजूदा सरकार दलितों के प्रति इन्साफ नहीं कर रही है। 
    इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का मामला सामने आ जाता है। दलितों से जुड़े एक्ट में बदलाव की बात सामने आते ही देश भर के दलित मुखर हो गए। उनकी इस मुखरता में कई दलों को राजनीति भी दिखाई पड़ने लगी। वे भी हवा देने लगे। अंजाम ये हुआ कि  देशभर के 14 राज्य दलितों के भारत बंद से प्रभावित हैं।  हिंसा का सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में हुआ है।  मध्य प्रदेश में चार लोगों की मौत हो गई है वहीं राजस्थान के अलवर से भी एक मौत की खबर है।  उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में उपद्रवियों ने दुकानों और गाड़ियों को आग लगा दी। 
       यह  कि दलितों के भारी विरोध को देखते हुए एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है तो वहीं दूसरी ओर विरोधी अभी सरकार पर हमलावर हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की मानसिकता जातिवादी है, बीजेपी सरकारी शक्तियों और संसाधनों के दमपर इसे बढ़ावा दे रही है।  हिंसा के पीछे हमारी पार्टी का कोई हाथ नहीं है।  दलित संगठनों के साथ पूरा विपक्ष है।  आंदोलन को एनडीए के दलित सांसदों का भी समर्थन प्राप्त है। माहौल ठंडा करने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। 

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